कार का ग्राउंड क्लीयरेंस कैसे बढ़ाएं भारतीय सड़कों के लिए आसान तरीके.

सतीश कुमार
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भारतीय सड़कों पर बार-बार कार का नीचे से टकराना बड़ी परेशानी है. अच्छी बात ये है कि बिना भारी खर्च किए भी आप अपनी कार का ग्राउंड क्लीयरेंस 10 से 40 mm तक बढ़ा सकते हैं. कॉयल स्प्रिंग असिस्टर्स से लेकर टायर अपग्रेड तक, जानिए कौन-सा तरीका आपके लिए सबसे सही और सुरक्षित रहेगा.

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How to increase ground clearance of your car: कार का ग्राउंड क्लीयरेंस (जमीन से कार के सबसे निचले हिस्से की दूरी) कम होने पर भारतीय सड़कों पर स्पीड ब्रेकर, गड्ढे और ऊबड़-खाबड़ रास्तों पर बहुत परेशानी होती है. बंपर स्क्रैच होना, अंडरबॉडी से टकराना या साइलेंसर का नुकसान आम बात हो जाती है. अच्छी बात ये है कि ग्राउंड क्लीयरेंस बढ़ाने के कई व्यावहारिक और सस्ते तरीके मौजूद हैं.

ज्यादातर भारतीय कार मालिक पहले कॉयल स्प्रिंग असिस्टर्स लगवाते हैं (सबसे सुरक्षित और सस्ता), फिर जरूरत पड़ने पर टायर अपसाइज करते हैं. इससे 20-40 mm तक बढ़ोतरी आसानी से हो जाती है और स्पीड ब्रेकर/गड्ढों की समस्या काफी हद तक खत्म हो जाती है. हालाांकि, कोई भी बदलाव करने से पहले अच्छे मैकेनिक या कार स्पेशलिस्ट से सलाह लें और अपनी कार के मॉडल के हिसाब से सही विकल्प चुनें. आइए विस्तार से समझते हैं कि कैसे आप अपनी कार का ग्राउंड क्लीयरेंस बढ़ा सकते हैं.

1. कॉयल स्प्रिंग असिस्टर्स

ये तरीका भारत में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होता है, क्योंकि ये कम खर्च में 10-25 mm तक ग्राउंड क्लीयरेंस बढ़ा देता है. कॉयल स्प्रिंग असिस्टर्स पॉलीयूरेथेन या रबर के बने छोटे-छोटे पैड/बफर होते हैं, जिन्हें कार की कॉयल स्प्रिंग के बीच में फिट किया जाता है. ये स्प्रिंग के पूरा नीचे जाने (कंप्रेस होने) को रोकते हैं, जिससे लोड या गड्ढे में कार का निचला हिस्सा कम झुकता है.

  • फायदा: 800-2500 रुपये (4 पीस सेट) में काम हो जाता है. इंस्टॉलेशन आसान, 1-2 घंटे में हो जाता है.
  • कितना बढ़ता है: आमतौर पर 15-25 mm (कार के मॉडल पर निर्भर).
  • सावधानियां: बहुत ज्यादा मोटा असिस्टर न लगाएं, वरना राइड क्वालिटी सख्त हो सकती है और स्प्रिंग टूटने का खतरा बढ़ सकता है.

2. बड़े साइज के टायर और रिम अपग्रेड करना

ये दूसरा सबसे आम तरीका है. ओरिजिनल टायर से थोड़ा बड़ा (उदाहरण के लिए 185/70 R14 की जगह 195/65 R15 या 205/60 R16) टायर लगाने से टायर का व्यास बढ़ता है और ग्राउंड क्लीयरेंस 8-20 mm तक बढ़ जाता है.

  • फायदा: हैंडलिंग में ज्यादा फर्क नहीं पड़ता अगर सही साइज चुनें. स्पीडोमीटर में भी कम गलती आती है.
  • खर्च: 15,000-40,000 रुपये (4 टायर + रिम).
  • सावधानियां: ज्यादा बड़ा टायर लगाने से फेंडर में रगड़ सकता है. स्पीडोमीटर गलत दिखा सकता है, फ्यूल एफिशिएंसी थोड़ी कम हो सकती है और ABS/ट्रैक्शन कंट्रोल प्रभावित हो सकता है. RTO नियमों का भी ध्यान रखें.

3. स्टीफर (कठोर) सस्पेंशन सेटअप में अपग्रेड करना

अगर बजट थोड़ा ज्यादा है, तो ओरिजिनल सॉफ्ट सस्पेंशन की जगह स्टीफर स्प्रिंग्स और शॉक अब्सॉर्बर (Bilstein, Koni, या Aftermarket जैसे Gabriels) लगवाएं.

  • फायदा: 20-40 mm तक बढ़ोतरी संभव, राइड क्वालिटी बेहतर कंट्रोल वाली हो जाती है, बॉडी रोल कम होता है.
  • खर्च: 25,000-80,000 रुपये ( फुल सेटअप).
  • सावधानियां: राइड बहुत सख्त हो सकती है, खराब सड़कों पर असुविधा बढ़ सकती है.

4. स्पेसर या लिफ्ट किट लगाना

कुछ लोग सस्पेंशन के बीच में मेटल स्पेसर या लिफ्ट किट लगाते हैं. इससे 30-50 mm तक बढ़ोतरी हो सकती है.

  • फायदा: ज्यादा बढ़ोतरी.
  • नुकसान: ज्यादातर लोग इसे अनुशंसित नहीं करते क्योंकि एलाइनमेंट बिगड़ता है. CV जॉइंट पर प्रेशर बढ़ता है, हैंडलिंग खराब हो सकती है और लंबे समय में नुकसान होता है.

बोनस टिप

  • कार में अनावश्यक सामान कम रखें (वजन कम होने से स्प्रिंग कम दबती है).
  • अच्छी कंडीशन के टायर रखें (कम एयर होने पर ग्राउंड क्लीयरेंस कम हो जाता है).
  • स्पीड ब्रेकर पर धीरे-धीरे और एंगल बनाकर निकलें.
  • अगर कार बहुत पुरानी है तो स्प्रिंग्स पहले से ही सेटल हो चुकी होती हैं, नई स्प्रिंग्स लगवाने से 10-20 mm फायदा हो सकता है.



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Satish Kumar Is A Journalist With Over 10 Years Of Experience In Digital Media. He Is Currently Working As Editor At Aman Shanti, Where He Covers A Wide Variety Of Technology News From Smartphone Launches To Telecom Updates. His Expertise Also Includes In-depth Gadget Reviews, Where He Blends Analysis With Hands-on Insights.