अक्सर यही माना जाता है कि जोड़ों का दर्द सिर्फ 60 या 70 साल की उम्र के बाद ही होता है. घुटनों का जवाब दे देना, सीढ़ियां चढ़ते समय दर्द होना या कमर का झुक जाना, इन्हें बुढ़ापे की निशानी माना जाता था, लेकिन आज की हकीकत कुछ और ही कहानी कह रही है. अब 20–30 साल के युवा भी घुटने, कमर, गर्दन और कंधों के दर्द से परेशान दिखाई दे रहे हैं. कई लोग सुबह उठते ही अकड़न महसूस करते हैं, थोड़ी देर बैठने के बाद खड़े होने में तकलीफ होती है या फिर हल्की-सी एक्सरसाइज के बाद भी जोड़ों में दर्द रहने लगता है.
यह बदलाव अचानक नहीं आया है. हमारी बदलती लाइफस्टाइल, काम करने का तरीका और शरीर के प्रति लापरवाही ने इस समस्या को कम उम्र में ही बढ़ा दिया है.अगर समय रहते ध्यान न दिया जाए, तो यही हल्का दर्द आगे चलकर बड़ी समस्या बन सकता है. तो आइए आज जानते हैं कि युवाओं में तेजी से बढ़ रहे जॉइंट पेन की वजह और बचाव क्या है.
युवाओं में जॉइंट पेन बढ़ने की मुख्य वजहें
1. ज्यादा बैठने वाली लाइफस्टाइल – आज का कामकाज ज्यादातर लैपटॉप और मोबाइल पर निर्भर है. घंटों कुर्सी पर बैठकर काम करना, कम चलना-फिरना और फिजिकल एक्टिविटी की कमी से मांसपेशियां कमजोर होने लगती हैं. जब मांसपेशियां कमजोर होती हैं तो जोड़ों पर ज्यादा दबाव पड़ता है.
2. गलत बॉडी पोस्चर – झुक कर बैठना, मोबाइल देखते समय गर्दन नीचे रखना, या लंबे समय तक एक ही स्थिति में बैठना, ये आदतें गर्दन, कंधे और पीठ के जोड़ों पर बुरा असर डालती हैं.
3. गलत या जरूरत से ज्यादा एक्सरसाइज – एक्सरसाइज फायदेमंद है, लेकिन अगर सही तरीके से न किया जाए तो यह चोट का कारण बन सकता है. अचानक भारी वजन उठाना, वार्म-अप न करना या बिना ट्रेनर के कठिन एक्सरसाइज करना जोड़ों को नुकसान पहुंचा सकता है.
4. कमजोर कोर मसल्स – पेट और पीठ की मांसपेशियां यानी कोर मसल्स शरीर को सहारा देती हैं. इनके कमजोर होने से घुटनों और कमर पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है.
5. दर्द को नजरअंदाज करना – कई युवा सोचते हैं कि अभी तो उम्र ही क्या है, अपने आप ठीक हो जाएगा, लेकिन बार-बार होने वाला दर्द शरीर का संकेत है कि कुछ गड़बड़ है. इसे अनदेखा करना आगे चलकर स्थायी नुकसान पहुंचा सकता है.
कौन-कौन से लक्षणों को हल्के में न लें?
सुबह उठते समय जोड़ों में अकड़न, सीढ़ियां चढ़ते या उतरते समय घुटनों में दर्द, कंधे घुमाने पर चटकने की आवाज, लंबे समय तक बैठने के बाद कमर दर्द, हल्की एक्सरसाइज के बाद भी सूजन या दर्द अगर ये लक्षण बार-बार दिखें, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है. अगर दर्द की शुरुआत में ही जांच कर ली जाए, तो समस्या को बढ़ने से रोका जा सकता है. देरी करने से जोड़ों की स्थिति खराब हो सकती है और इलाज लंबा चल सकता है. विशेषज्ञों के अनुसार, सही समय पर पहचान और सही इलाज से स्थायी नुकसान से बचा जा सकता है.
बचाव के आसान और असरदार उपाय
1. हर दिन कम से कम 30 मिनट पैदल चलें या हल्की एक्सरसाइज करें.
2. वर्कआउट से पहले और बाद में स्ट्रेचिंग जरूर करें. कोर मसल्स मजबूत करने वाली एक्सरसाइज अपनाएं.
3. सीधे बैठें, स्क्रीन आंखों की सीध में रखें और हर 30–40 मिनट में ब्रेक लें.
4. ज्यादा वजन से घुटनों पर ज्यादा दबाव पड़ता है, जिससे दर्द बढ़ सकता है.
5. जोड़ों को भी आराम की जरूरत होती है. लगातार मेहनत के बाद शरीर को रिकवरी का समय दें.
6. दर्द लंबे समय तक बना रहे तो ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञ से जांच करवाएं.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.
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