Physical Relationship During Ramadan: क्या रोजा रखने के दौरान बना सकते हैं शारीरिक संबंध, जानें क्या हैं नियम?

सतीश कुमार
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Ramadan Rules For Married Couples: दुनियाभर में इस्लाम के पवित्र महीने रमजान की शुरुआत हो चुकी है. भारत में भी आज यानी 19 फरवरी से इस महीने की शुरुआत हो रही है. इस्लाम धर्म का यह पवित्र महीना इबादत, सब्र और आत्मसंयम का महीना है. इस दौरान कई लोगों के मन में यह सवाल आता है कि क्या रोजा रखते हुए पति-पत्नी शारीरिक संबंध बना सकते हैं. चलिए आपको इस सवाल का जवाब देते हैं, जिससे लोगों के मन में जो संशय रहते हैं, उससे छुटकारा मिल सके.

इस्लामिक शिक्षा को प्रमोट करने वाली बेवसाइट studioarabiya के अनुसार, इस्लामी शिक्षाओं में इसका जवाब साफ है, हां, लेकिन समय और नियमों का पालन जरूरी है. कुरआन में उल्लेख मिलता है कि रोजे की रातों में पति-पत्नी के बीच निकटता जायज है. यानी सूर्यास्त के बाद, जब इफ्तार हो जाता है, उस समय से लेकर सुबह की अजान (फज्र) तक वैवाहिक संबंधों की अनुमति है. यह विवाह का स्वाभाविक और वैध हिस्सा है, और इस अवधि में इसमें कोई गुनाह नहीं माना जाता.

कब आपको सावधानी रखनी चाहिए?

हालांकि, रोजे के दौरान यानी फज्र से लेकर मगरिब तक शारीरिक संबंध बनाना मना है. इस समय व्यक्ति खाने-पीने के साथ-साथ शारीरिक संबंधों से भी परहेज करता है. अगर कोई जानबूझकर रोज़े की हालत में ऐसा करता है, तो रोजा टूट जाता है और उसकी कजा के साथ कफ़्फारा भी देना पड़ सकता है. जिसमें लगातार 60 रोजे रखना या 60 जरूरतमंद लोगों को खाना खिलाना शामिल है. इससे समझ आता है कि रोजे की पवित्रता को इस्लाम में कितना महत्व दिया गया है. जहाँ तक अन्य स्नेहपूर्ण व्यवहार की बात है, जैसे गले लगाना या हल्का चुंबन, तो यह सामान्य तौर पर पति-पत्नी के बीच जायज है, लेकिन रोजे की हालत में इतना संयम रखना जरूरी है कि रोजा टूटने की स्थिति पैदा न हो. आत्मनियंत्रण रमजान की मूल भावना है.

आपको इन चीजों का रखना चाहिए ध्यान

रमजान का उद्देश्य केवल भूखा-प्यासा रहना नहीं, बल्कि आध्यात्मिक उन्नति और आत्मसंयम सीखना भी है. इसलिए वैवाहिक जीवन को भी इसी संतुलन के साथ निभाना चाहिए, ताकि इबादत और रिश्ते, दोनों प्रभावित न हों. यदि किसी को नियमों को लेकर संदेह हो, तो विश्वसनीय धार्मिक विद्वान से सलाह लेना बेहतर रहता है. सही समझ के साथ रोजा और वैवाहिक जीवन दोनों को संतुलित तरीके से निभाया जा सकता है. पति और पत्नी को चाहिए कि वे इबादत और वैवाहिक जीवन के बीच संतुलन बनाए रखें. इफ्तार के बाद या सेहरी से पहले का समय आपसी समझ, बातचीत और इमोशनल जुड़ाव को मजबूत करने का भी अवसर हो सकता है.

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.



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Satish Kumar Is A Journalist With Over 10 Years Of Experience In Digital Media. He Is Currently Working As Editor At Aman Shanti, Where He Covers A Wide Variety Of Technology News From Smartphone Launches To Telecom Updates. His Expertise Also Includes In-depth Gadget Reviews, Where He Blends Analysis With Hands-on Insights.