Deepfake का जाल हर तरफ! AI के इस दौर में 1 मिनट में ऐसे पहचानें फेक वीडियो और तस्वीरें

सतीश कुमार
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Fake Videos and Photo: आज आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने हमारी जिंदगी को आसान बनाया है लेकिन इसके साथ खतरे भी बढ़े हैं. Deepfake तकनीक की मदद से किसी भी व्यक्ति की आवाज, चेहरा या हाव-भाव को बेहद असली जैसा बनाकर फर्जी वीडियो और तस्वीरें तैयार की जा सकती हैं. सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले कई वीडियो अब सच और झूठ की सीमा को धुंधला कर रहे हैं. ऐसे में जरूरी है कि हम सतर्क रहें और कुछ आसान तरीकों से फेक कंटेंट की पहचान करना सीखें.

Deepfake क्या है और क्यों है खतरनाक?

Deepfake एक ऐसी AI तकनीक है जिसमें मशीन लर्निंग मॉडल किसी असली व्यक्ति के चेहरे या आवाज को कॉपी करके नकली वीडियो या ऑडियो बना देता है. इसका इस्तेमाल मनोरंजन से लेकर राजनीतिक प्रचार और साइबर फ्रॉड तक में हो सकता है. कई बार लोग बिना जांचे-परखे ऐसे वीडियो पर भरोसा कर लेते हैं जिससे गलतफहमियां और अफवाहें फैलती हैं.

चेहरे और हाव-भाव पर दें ध्यान

फर्जी वीडियो में अक्सर चेहरे की मूवमेंट थोड़ी असामान्य दिखती है. आंखों की झपक कम या ज्यादा हो सकती है, होंठों की हरकत आवाज़ से मेल नहीं खाती या चेहरे के किनारों पर हल्की धुंधलाहट नजर आती है. यदि वीडियो को ध्यान से देखें तो स्किन टोन और लाइटिंग में भी गड़बड़ी पकड़ में आ सकती है.

आवाज और लिप-सिंक को जांचें

कई Deepfake वीडियो में आवाज़ और होंठों की गति में हल्का अंतर होता है. कभी-कभी आवाज़ बहुत सपाट या रोबोटिक लग सकती है. अगर बैकग्राउंड साउंड और मुख्य आवाज़ का तालमेल अजीब लगे तो शक करना चाहिए.

सोर्स की पुष्टि करें

कोई भी सनसनीखेज वीडियो देखने के बाद तुरंत शेयर करने की बजाय उसके स्रोत को जांचें. क्या यह किसी भरोसेमंद न्यूज प्लेटफॉर्म या आधिकारिक अकाउंट से आया है? गूगल सर्च या रिवर्स इमेज सर्च की मदद से पता लगाया जा सकता है कि तस्वीर पहले कहीं और तो इस्तेमाल नहीं हुई.

AI डिटेक्शन टूल्स का सहारा लें

आज कई ऑनलाइन टूल्स उपलब्ध हैं जो फर्जी इमेज और वीडियो की पहचान में मदद करते हैं. ये टूल्स मेटाडेटा, पिक्सल पैटर्न और एडिटिंग के संकेतों को जांचते हैं. हालांकि ये भी पूरी तरह सटीक नहीं होते लेकिन शुरुआती स्तर पर संदेह दूर करने में मददगार साबित हो सकते हैं.

सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव

Deepfake के दौर में सबसे बड़ा हथियार जागरूकता है. किसी भी कंटेंट को आंख मूंदकर सच मान लेना जोखिम भरा हो सकता है. थोड़ी सी सावधानी, सही जांच और तकनीक की समझ से आप खुद को और दूसरों को गलत जानकारी से बचा सकते हैं.

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Satish Kumar Is A Journalist With Over 10 Years Of Experience In Digital Media. He Is Currently Working As Editor At Aman Shanti, Where He Covers A Wide Variety Of Technology News From Smartphone Launches To Telecom Updates. His Expertise Also Includes In-depth Gadget Reviews, Where He Blends Analysis With Hands-on Insights.