नौकरी से लेकर सीखने-सिखाने में जमकर हो रहा AI का इस्तेमाल, 55% लोग पूरी तरह निर्भर; सामने आई स्टडी

सतीश कुमार
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देश के ग्रामीण क्षेत्र में युवाओं के बीच आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है. हाल ही में सामने आई एक रिपोर्ट के सर्वे के अनुसार, गांव में रहने वाले 55 प्रतिशत युवा अब रोजाना के कामों में एआई का नियमित इस्तेमाल कर रहे हैं. यह युवा पढ़ाई, ट्रांसलेशन, लिखने और नौकरी से जुड़ी तैयारी के लिए एआई टूल्स पर निर्भर हो रहे हैं. यह खुलासा यूथ एआई एस्पिरेशंस एंड एडॉप्शन रिपोर्ट में हुआ है, जिसे हेड हेल्ड हाई फाउंडेशन की पहल JanAI के तहत तैयार किया गया है. रिपोर्ट में 3005 ग्रामीण युवाओं के रिएक्शन शामिल है. 

रोजाना के कामों में एआई का इस्तेमाल कर रहे युवा 

सर्वे के अनुसार 55 प्रतिशत ग्रामीण युवा लगभग हर दिन एआई का उपयोग करते हैं. जबकि 28 प्रतिशत लोग इसे कभी-कभी इस्तेमाल करते हैं. वहीं केवल 17 प्रतिशत युवाओं ने बताया कि वह एआई का उपयोग नहीं करते हैं. कई युवाओं के लिए एआई भाषा की समस्या को दूर करने का माध्यम बन रहा है. रिपोर्ट में बताया गया है कि 40 प्रतिशत युवा ट्रांसलेशन के लिए एआई का सहारा लेते हैं, जिससे उन्हें अंग्रेजी समझने में मदद मिलती है. वहीं 33 प्रतिशत युवा लिखने यानी स्कूल असाइनमेंट, रिज्यूमे और ऑनलाइन एप्लीकेशन के लिए एआई टूल का इस्तेमाल करते हैं. हालांकि एआई का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन फिलहाल केवल 14 प्रतिशत ग्रामीण युवा ही इससे सीधे आय अर्जित कर रहे हैं. ज्यादातर युवा इसे सीखने और तैयारी के साधन के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं. रिपोर्ट बताती है कि एआई कौशल को लेकर युवाओं में उत्साह है. वहीं 90 प्रतिशत से ज्यादा प्रतिभागियों ने कहा कि वह सरकार से प्रमाणित एआई कोर्स में एडमिशन लेना चाहेंगे. इसके अलावा 61 प्रतिशत युवाओं का मानना है कि ऐसी सर्टिफिकेशन से उनकी नौकरी की संभावनाएं और ज्यादा अच्छी होगी. 

गांव तक पहुंच रही एआई की पहल 

JanAI एआई पहल के जरिए पिछले 1 साल में 16 राज्यों के 50 जिलों में 75,000 से ज्यादा युवाओं तक एआई एजुकेशन और प्रशिक्षण पहुंचाया गया है.  स्थानीय प्रशासन और एजुकेशनल इंस्टीट्यूट के सहयोग से इस पहल को शहरों से बाहर गांव तक फैलाने की कोशिश की जा रही है. वहीं इस पहल का लक्ष्य है कि 2029 तक देश के 5 करोड़ नागरिकों को एआई साक्षर बनाया जाए और 20 लाख छात्रों को एआई कौशल से लैस किया जाए. वहीं इस रिपोर्ट में बताया गया है कि ग्रामीण भारत के लिए एआई केवल एक नई तकनीक नहीं बल्कि कॉन्फिडेंस और अवसरों का साधन बनता जा रहा है. इससे युवा बेहतर लिख पा रहे हैं, नई चीजों को सीख पा रहे हैं और नौकरी के लिए खुद को तैयार कर पा रहे हैं. हालांकि एक्सपर्ट्स मानते हैं की असली बदलाव तब होगा जब एआई केवल सीखने का माध्यम न रहकर रोजगार का स्थाई सोर्स भी बनेगा.

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Satish Kumar Is A Journalist With Over 10 Years Of Experience In Digital Media. He Is Currently Working As Editor At Aman Shanti, Where He Covers A Wide Variety Of Technology News From Smartphone Launches To Telecom Updates. His Expertise Also Includes In-depth Gadget Reviews, Where He Blends Analysis With Hands-on Insights.