बहुत सी मान्यताओं के मुताबिक, आत्मा एक चेतन ऊर्जा है, जिसका कोई भौतिक शरीर नहीं होता है, जिसका कोई भौतिक शरीर नहीं होता. चूंकि उसके पास बोलने, छूने या सीधे दिखाई देने का कोई साधन नहीं होता, इसलिए कहा जाता है कि वह ऊर्जा अवचेतन मन के जरिए संकेत देती है.
हालांकि इन बातों का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है, फिर भी लोग अपने अनुभवों को इसी दृष्टिकोण से समझने की कोशिश करते हैं. आइए इन्हें आसान भाषा में समझते हैं.
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अचानक ठंडक महसूस होना
पहला संकेत है अचानक से ठंडक महसूस होना. कुछ लोगों का मानना है कि, जब कोई आत्मा अपनी उपस्थिति दिखाने चाहे तो वह आस पास की ऊर्जा को अपनी ओर आकर्षित करती है.
इससे उस जगह का तापमान अचानक से कम होने लगता है. अगर बिना किसी कारण के आपको ठंडी हवा या सिहरन महसूस हो, तो इसे आध्यात्मिक माना जाता है. लेकिन याद रखिए, कई बार यह मौसम में बदलाव का कारण भी हो सकता है.
अंदर से खिंचाव महसूस होना
दूसरा संकेत है अंदर से अजीब सा खिंचाव महसूस होना, जैसे अचानक से नौकरी बदलने या किसी से मिलने या फिर किसी खास जगह जाने का मन होना. आपको ऐसा लग सकता है कि, कोई आपको दिशा दे रहा है.
आध्यात्मिक मान्यता के मुताबिक यह आत्मा द्वारा मार्गदर्शन हो सकता है, जब कि व्यावहारिक रूप से यह आपका अपना अवचेतन मन भी हो सकता है, जो काफी समय से इक्ट्ठा हुई भावनाओं को आपके समक्ष पेश करें.
प्रतीकात्मक सपने या दृश्य
इसका तीसरा संकेत है कि प्रतीकात्मक सपने या दृश्य देखना. जब हम सोते हैं या ध्यान करते हैं, तब हमारा अवचेतन मन अधिक सक्रिय होता है. कुछ लोग मानते हैं कि इस समय आत्माएं संदेश देती हैं. अगर आपको बार-बार कोई विशेष सपना आए या कोई खास दृश्य दिखाई दें, तो इसे संकेत समझा जाता है.
हालांकि मनोविज्ञान के मुताबिक, सपने अक्सर हमारी सोच और अनुभवों का ही परिणाम होते हैं.
इंद्रियों का तेज होना
चोथा संकेत है कि इंद्रियों का तेज होना. जैसे अचानक से किसी तेज खुशबू का आना, कोई अजीब से आवाज सुनाई देना या आसपास किसी की मौजदूगी का एहसास होना. आध्यात्मिक मान्यता कहती है कि, आत्मा पहले इंद्रियों को एक्टिव करती, लेकिन इसके पीछे मानसिक या शारीरिक कारण भी हो सकते हैं.
घड़ी बार-बार एक ही समय पर दिखना
पांचवां संकेत है कि, घड़ी बार-बार एक ही समय पर दिखाई देना. कई लोग इसे विशेष संदेश मानते हैं. उन्हें लगता है कि, उस समय का कोई महत्व है, पर कई बार यह मात्र हमारा ध्यान उसी पैटर्न पर टिक जाने की वजह से भी हो सकता है.
कुल मिलाकर ये सभी बातें आस्था और व्यक्तिगत अनुभवों पर आधारित हैं. इन्हें आंख बंदकर सच मानने के बजाए संतुलित नजरिए से देखना बेहतर है.
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