आज के दौर में फैशन इंडस्ट्री तेजी से आगे बढ़ रही है. पहले जहां फैशन को सिर्फ शौक समझा जाता था, वहीं अब यह एक प्रोफेशनल और ग्लैमरस करियर विकल्प बन चुका है. अगर आप 12वीं के बाद कुछ क्रिएटिव करना चाहते हैं, डिजाइनिंग में रुचि रखते हैं और नए ट्रेंड्स के साथ काम करना पसंद करते हैं, तो फैशन डिजाइनिंग आपके लिए बेहतरीन क्षेत्र हो सकता है. सही पढ़ाई, सही संस्थान और सही दिशा मिलने पर इस क्षेत्र में बड़ा नाम कमाया जा सकता है.
12वीं के बाद कौन-से कोर्स करें?
फैशन डिजाइनर बनने के लिए 12वीं पास करना अनिवार्य है.इसके बाद छात्र डिजाइन क्षेत्र में डिग्री कोर्स कर सकते हैं. सबसे लोकप्रिय कोर्स बी.डिज़ाइन इन फैशन डिजाइन है, जिसकी अवधि आमतौर पर चार साल होती है. इसके अलावा कुछ संस्थान बी.एफटेक जैसे कोर्स भी उपलब्ध कराते हैं. ग्रेजुएशन के बाद छात्र एम.डिज़ाइन या अन्य पोस्टग्रेजुएट कोर्स करके अपने ज्ञान और स्किल को और बेहतर बना सकते हैं.
एडमिशन प्रक्रिया कैसी होती है?
देश के प्रमुख डिजाइन संस्थानों में प्रवेश के लिए एंट्रेंस एग्जाम देना पड़ता है। जैसे National Institute of Fashion Technology (NIFT) अपना प्रवेश परीक्षा आयोजित करता है। वहीं National Institute of Design (NID) में दाखिले के लिए NID DAT परीक्षा देनी होती है। कुछ Indian Institute of Technology (IITs) में भी डिजाइन से जुड़े कोर्स उपलब्ध हैं, जिनमें प्रवेश के लिए UCEED जैसी परीक्षा देनी होती है। इन परीक्षाओं में छात्रों की रचनात्मक सोच, ड्राइंग स्किल, सामान्य ज्ञान और डिजाइन समझ का मूल्यांकन किया जाता है।
योग्यता
फैशन डिजाइनिंग कोर्स के लिए छात्र का किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से 12वीं पास होना जरूरी है. किसी भी स्ट्रीम आर्ट्स, कॉमर्स या साइंस के छात्र आवेदन कर सकते हैं.
कोर्स फीस कितनी होती है?
फैशन डिजाइनिंग की फीस संस्थान के प्रकार पर निर्भर करती है. सरकारी संस्थानों में सालाना फीस लगभग 1 से 3 लाख रुपये के बीच हो सकती है. वहीं निजी संस्थानों में यह फीस 3 से 6 लाख रुपये प्रति वर्ष तक पहुंच सकती है. पूरे चार साल के कोर्स में कुल खर्च 5 से 20 लाख रुपये तक हो सकता है. कई संस्थान मेधावी छात्रों को छात्रवृत्ति भी प्रदान करते हैं, जिससे आर्थिक बोझ कम हो सकता है.
कैसा होता है पढाई का पैटर्न ?
फैशन डिजाइनिंग कोर्स में सिर्फ कपड़ों की डिजाइनिंग ही नहीं सिखाई जाती, बल्कि डिजाइन के तकनीकी और व्यावसायिक पहलुओं पर भी ध्यान दिया जाता है.छात्रों को फैशन इलस्ट्रेशन, पैटर्न मेकिंग, गारमेंट कंस्ट्रक्शन, टेक्सटाइल्स, कंप्यूटर एडेड डिजाइन , फैशन हिस्ट्री, ट्रेंड एनालिसिस और पोर्टफोलियो डेवलपमेंट जैसे विषय पढ़ाए जाते हैं. इसके साथ ही इंडस्ट्री एक्सपोजर और प्रोजेक्ट वर्क भी कराया जाता है.
करियर की शुरुआत कैसे करें?
डिग्री पूरी करने के बाद अधिकतर छात्र इंटर्नशिप के जरिए अपने करियर की शुरुआत करते हैं. फैशन डिजाइनर के रूप में नौकरी के अवसर गारमेंट कंपनियों, फैशन ब्रांड्स, टेक्सटाइल इंडस्ट्री, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म और फिल्म इंडस्ट्री में मिल सकते हैं. कई छात्र अपना खुद का फैशन लेबल भी शुरू करते हैं. बड़े ब्रांड्स जैसे Zara और H&M में भी रोजगार के अवसर मिल सकते हैं. इसके अलावा प्रसिद्ध डिजाइनरों जैसे मनीष मल्होत्रा के साथ काम करने का मौका भी मिल सकता है, जिससे अनुभव और पहचान दोनों मिलती हैं.
सैलरी कितनी मिलती है ?
फैशन डिजाइनिंग में शुरुआती सैलरी 2.5 से 5 लाख रुपये प्रतिवर्ष के बीच होती है. अनुभव और स्किल के आधार पर यह वेतन 8 से 10 लाख रुपये या उससे अधिक तक पहुंच सकता है.अगर कोई डिजाइनर अपना ब्रांड स्थापित कर लेता है या बड़े फैशन हाउस के साथ काम करता है, तो आय की कोई सीमा नहीं रहती. फैशन इंडस्ट्री में हर साल नए ट्रेंड्स आते हैं, जिससे इस क्षेत्र में हमेशा अवसर बने रहते हैं.
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