घर खरीदें या किराए पर रहें? बढ़ती प्रॉपर्टी कीमतों के बीच समझें आपके लिए कौन सा विकल्प बेहतर, जानिए डिटेल

सतीश कुमार
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Renting vs Buying Home: खुद का घर खरीदना लगभग हर व्यक्ति का सपना होता है और ज्यादातर लोग चाहते हैं कि उनके पास अपनी छत हो, जहां वे बिना किसी टेंशन के रह सकें. भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा पिछले एक साल में ब्याज दरों में 1.25 प्रतिशत की कटौती की गई है. जिसके बाद बैंकों ने होम लोन सस्ता किया है. जिससे घर खरीदने की इच्छा रखने वालों की दिलचस्पी में इजाफा देखने को मिला है. 

हालांकि बीते कुछ सालों में बड़े शहरों में प्रॉपर्टी की कीमतें आसमान छू रही है. कई इलाकों में मकान आम आदमी की पहुंच से बाहर हो गए हैं. ऐसे में लोगों के मन में यह सवाल आता है कि मौजूदा हालात में घर खरीदना ज्यादा फायदेमंद रहेगा या किराए पर रहना बेहतर विकल्प हो सकता है. आइए जानते हैं, इसके बारे में….

होम लोन के साथ घर खरीदने के फायदे

जब कोई व्यक्ति होम लोन के जरिए घर खरीदता है तो उसे लंबे समय तक नियमित किस्त यानी EMI चुकानी होती है. आमतौर पर लोग 15 से 20 साल की अवधि के लिए लोन लेते हैं और इसी दौरान धीरे-धीरे पूरा कर्ज चुकाते हैं. जिसके बाद घर पूरी तरह उनका हो जाता है. इस बीच समय के साथ संपत्ति की कीमतों में भी बढ़ोतरी होती रहती है. जिससे घर सिर्फ रहने की जगह नहीं बल्कि एक महत्वपूर्ण एसेट बन जाता है.

ऐसी संपत्ति का फायदा यह भी है कि जरूरत पड़ने पर उसे बेचा जा सकता है या फिर किराए पर दिया जा सकता है. विशेषज्ञों के अनुसार, खुद का घर होने से रहने की स्वतंत्रता मिलती है और लोग अपनी पसंद के अनुसार घर में बदलाव या सजावट कर सकते हैं. हालांकि, एक लंबे समय तक आपको ईएमआई का भुगतान करना पड़ता है.

किराए पर रहने से मिलती है लचीलापन और कम जिम्मेदारी

किराए के घर में रहने वाले लोगों को लंबे समय तक चलने वाली EMI जैसी वित्तीय जिम्मेदारी का बोझ नहीं उठाना पड़ता. जिससे मासिक बजट पर दबाव कम रहता है. साथ ही प्रॉपर्टी के रखरखाव से जुड़ी परेशानियां भी आम तौर पर मकान मालिक की जिम्मेदारी होती हैं. इसलिए किराएदार को इस बारे में ज्यादा सोचने की जरूरत नहीं पड़ती. 

जिन लोगों की नौकरी में बार-बार शहर बदलने की स्थिति बनती है, उनके लिए किराए का विकल्प अधिक सही माना जाता है, क्योंकि हर शहर में घर खरीदना संभव नहीं होता. ऐसे में ट्रांसफर होने पर आसानी से नए स्थान पर किराए का घर लिया जा सकता है. साथ ही प्रॉपर्टी की EMI चुकाने की चिंता भी नहीं रहती.

यानी की घर खरीदने या किराए पर रहने का फैसला आपकी सहूलियत, नौकरी के प्रकार, आमदनी इत्यादि चीजों पर निर्भर करती है. इसलिए फैसला भी पूरी तरह से आपको उपर ही निर्भर करता हैं. 

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Satish Kumar Is A Journalist With Over 10 Years Of Experience In Digital Media. He Is Currently Working As Editor At Aman Shanti, Where He Covers A Wide Variety Of Technology News From Smartphone Launches To Telecom Updates. His Expertise Also Includes In-depth Gadget Reviews, Where He Blends Analysis With Hands-on Insights.