High Protein Diet: क्या वाकई फायदेमंद होती है हाई-प्रोटीन डाइट या ओवरहाइप्ड, जानें क्या है सच?

सतीश कुमार
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Is High Protein Diet Safe: प्रोटीन अब सिर्फ जिम तक सीमित नहीं रहा, यह रोजमर्रा की रसोई का हिस्सा बन चुका है. सोशल मीडिया खोलिए, सुपरमार्केट जाइए या किसी कैफे का मेन्यू देखिए, आपको हर जगह “हाई-प्रोटीन” लिखा नजर आता है. शेक, स्नैक बार, आटा, सीरियल… सब कुछ अतिरिक्त प्रोटीन का वादा कर रहा है. इसका मैसेज साफ है कि ज्यादा प्रोटीन खाइए, वजन घटाइए, मसल्स बनाइए और लंबे समय तक पेट भरा रखिए. लेकिन न्यूट्रिशन साइंस इतनी आसान लाइन में नहीं सिमटता.

प्रोटीन शरीर के लिए जरूरी है. यह टिश्यू की मरम्मत करता है, मांसपेशियों को मजबूत बनाता है, हार्मोन और एंजाइम बनाने में मदद करता है और इम्यून सिस्टम को सपोर्ट करता है. शरीर इसे अमीनो एसिड में तोड़ता है, जो कई अहम प्रक्रियाओं में काम आते हैं. सवाल यह है कि क्या हर थाली में दोगुना प्रोटीन जोड़ना सच में जरूरी है या यह ट्रेंड जरूरत से ज्यादा बड़ा हो गया है?. चलिए जानते हैं कि एक्सपर्ट क्या कहते हैं. 

एक्सपर्ट क्या कहते हैं?

एचओडी कल्पना गुप्ता ने TOI को बताया कि प्रोटीन की जरूरत उम्र, जेंडर, फिजिकल एक्टिविटी और मेटाबॉलिक स्थिति पर निर्भर करती है. ICMR की गाइडलाइन बताती है कि भारतीयों के आहार में प्रोटीन अक्सर कम और अनाज ज्यादा होते हैं, इसलिए संतुलित मात्रा में प्रोटीन बढ़ाना जरूरी है. दूध, दही, पनीर, अंडा, दाल, चिकन जैसे सोर्स अच्छे विकल्प हैं. कुछ रिसर्च बताती हैं कि व्यायाम के साथ ज्यादा प्रोटीन लेने से वजन घटाने और ब्लड शुगर कंट्रोल में मदद मिल सकती है, खासकर टाइप 2 डायबिटीज वाले लोगों में. वहीं दाल, बीन्स और सोया जैसे पौध-आधारित प्रोटीन हार्ट स्वास्थ्य के लिए बेहतर माने गए हैं. हालांकि, अत्यधिक प्रोटीन सेवन से चमत्कारी फायदे होने के ठोस प्रमाण सीमित हैं.

किडनी पर डाल सकता है दबाव

बहुत ज्यादा प्रोटीन किडनी पर दबाव डाल सकता है, खासकर उन लोगों में जिन्हें पहले से किडनी की समस्या हो. ज्यादा प्रोटीन लेने से फाइबर और अन्य पोषक तत्वों की कमी भी हो सकती है, जिससे पाचन संबंधी दिक्कतें बढ़ सकती हैं. बिना सलाह के सप्लीमेंट या प्रोटीन पाउडर लेना भी सही नहीं. ज्यादा प्रोटीन की जरूरत उन लोगों को हो सकती है जो नियमित रूप से तेज गति से व्यायाम करते हैं या उम्रदराज हैं. आम तौर पर 0.8 से 1.2 ग्राम प्रति किलो वजन पर्याप्त माना जाता है. कल्पना गुप्ता का सुझाव है कि हर खाने में एक प्रोटीन सोर्स जोड़ें, जैसे कि नाश्ते में दूध या अंडा, दोपहर या रात के खाने में दाल, दही या चिकन. इसके अलावा बिस्किट की जगह मेवे या भुना चना लें.

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Satish Kumar Is A Journalist With Over 10 Years Of Experience In Digital Media. He Is Currently Working As Editor At Aman Shanti, Where He Covers A Wide Variety Of Technology News From Smartphone Launches To Telecom Updates. His Expertise Also Includes In-depth Gadget Reviews, Where He Blends Analysis With Hands-on Insights.