इंडोनेशिया से मॉरीशस तक 5 देश जहां हिंदू देवताओं की पूजा अलग तरीके से की जाती है! जानिए खासयित?

सतीश कुमार
9 Min Read


“एकं सद्विप्रा बहुधा वदन्ति” (ऋग्वेद 1.164.46)

अर्थ- सत्य एक है, बुद्धिमान लोग इसे कई तरीकों से वर्णित करते हैं. 

क्या आपने कभी सोचा है कि, आस्था का सीमाओं के पार जानें पर क्या असर पड़ता है? जब लोग प्रवास करते हैं, व्यापार करते हैं, राज्य स्थापित करते हैं या दूरदराज के द्वीपों पर जाकर बसते हैं, तो वे अपने साथ देवताओं को भी ले जाते  हैं. लेकिन इस यात्रा में एक अद्भुत बदलाव होता है.

देवता का स्वरूप तो वही रहता है, लेकिन पूजा करने का तरीका बदल जाता है. स्थानीय भाषाएं उनके नामों को आकार देने का काम करती हैं. स्वदेशी मान्यताएं अनुष्ठानों को प्रभावित करती हैं. वास्तुकला मंदिरों को नया रूप देने का काम करती है. 

हिंदू धर्म ने, शायद बाकि परंपराओं की तुलना में अपने मूल दर्शन को खोए बिना असाधारण रूप से अनुकूलन करने की क्षमता दिखाई है. दक्षिण पूर्व एशिया से लेकर हिंद महासागर के द्वीपीय देशों तक हिंदू देवी-देवताओं की पूजा बेहद श्रद्धा के साथ की जाती है. 

दुनिया के इन 10 देशों में आज भी बसता है हिंदू धर्म, जानें कहां कितनी है आबादी?

इंडोनेशिया (Indonesia)

इंडोनेशिया कई बाहरी लोगों को हैरान में डाल सकता है. यह दुनिया का सबसे बड़ा मुस्लिम बहुल देश है, फिर भी बाली द्वीप पर हिंदू धर्म एक जीवंत परंपरा के रूप में फलता-फूलता है. इंडोनेशिया में हिंदू धर्म का प्रभाव व्यापार और श्रीविजया और मजापाहित जैसे शक्तिशाली राज्यों के जरिए से 7वीं और 14वीं शताब्दी के बीच पहुंचा.

भव्य प्रंबानन मंदिर इस गहरे संबंध की याद का प्रतीक है. नौवीं शताब्दी में निर्मित यह मंदिर प्रमुख रूप से भगवान शिव को समर्पित है, साथ ही इसमें विष्णु और ब्रह्मा जी के भी मंदिर हैं.

लेकिन बाली का हिदू धर्म वाराणसी या चेन्नई देखने को मिलने वाले हिंदू धर्म से अलग है. यहां भगवान शिव को स्थानीय पूर्वजों की आत्माओं से गहरा संबंध है. रोजाना कैनंग सारी नामक प्रसाद को तैयार किया जाता है और घरों और मंदिर के बाहर रखा जाता है. फूलों, चावल और अगरबत्ती से भरी ये छोटी टोकरियां भगवान के प्रति कृतज्ञता और संतुलन का प्रतीक है.

यहां रामायण का मंचन खुले आसमान के नीचे बेहद ही नाटकीय नृत्य के रूप में किया जाता है. यहां की धार्मिक परंपराएं स्थानीय ब्रह्मांड विज्ञान से प्रभावित अद्वितीय चक्रों का अनुसरण करती हैं. बाली में हिंदू धर्म मंदिरों की दीवारों तक सीमित न रहकर रोजमर्रा के जीवन में रची-बसी एक जीवंत सांस्कृतिक लय की तरह दिखती है. 

नेपाल (Nepal)

नेपाल भारत के साथ खुली सीमा और गहरे आध्यात्मिक संबंध साझा करती हैं, फिर भी इसकी पूजा पद्धतियों से हिमालयी संस्कृति की झलक देखने को मिलती है. साल 2008 तक नेपाल ऑफिशियल तौर पर एक हिंदू राज्य था. 

सबसे अच्छी बात यह है कि, एक कुमारी की पूजा, जो दुर्गा के एक रूप तलेजू देवी का अवतार बनने के लिए चुनी गई एक युवती होती है. वह काठमांडू के एक महल में निवास करती हैं और खास त्योहारों के दौरान प्रकट होती है, जहां हजारों लोग उनका आशीर्वाद लेने के लिए आते हैं. लोग के बीच एक जीवित देवी की अवधारणा नेपाल की भक्ति और संस्कृति के अनूठे संगम का प्रतीक है. 

पवित्र पशुपतिनाथ मंदिर शिव को समर्पित सबसे पवित्र मंदिरों में से एक है, जो सभी जीवित प्राणियों के स्वामी पशुपति हैं. यहां के अनुष्ठान हिंदू और बौद्ध धर्म से प्रभावित है, जोद दिखाता है कि नेपाल में ये दोनों ही धर्म कितनी सहजता के साथ फल-फूल रहे हैं. 

थाईलैंड (Thailand)

थाईलैंड में मुख्य रूप से बौद्ध धर्म प्रचलित है, फिर भी यहां पर हिंदू देवी-देवताओं का गहरा सम्मान किया जाता है और उनकी व्यापक रूप से पूजा की जाती है. थाईलैंड में हिंदू धर्म का विस्तार आज से नहीं बल्कि सदियों से व्यापार और खमेर साम्राज्य के जरिए पहुंचे थे. 

बैंकॉक के बीच में स्थित ब्रह्मा जी को समर्पित प्रसिद्ध एरावन मंदिर, जिसे स्थानीय लोग फ्रा प्रोम के नाम से बुलाते हैं. बिजनेसमैन, छात्र और पर्यटक रोजाना सफलता और समृद्धि के लिए प्रार्थना करते हैं.

थाईलैंड में गणेश जी कलाकारों और उद्यमियों के बीच काफी लोकप्रिय हैं. उनकी प्रतिमाएं कॉलेज और रचनात्मक क्षेत्रों में दिखाई देती हैं. विष्णु और शिव को भी शाही समारोहों में सम्मानित किया जाता है, जिनमें प्राचीन ब्राह्माणवादी अनुष्ठान भी शामिल है. 

थाईलैंड का राष्ट्रीय महाकाव्य रामाकिएन, रामायण से प्रेरित है. हालांकि इसकी कहानी मूल रामायण से मिलती-जुलती है, लेकिन पात्रों के नाम थाई शैली और सांस्कृति पर आधारित हैं. 

थाईलैंड में हिंदू देवताओं को बौद्ध देवताओं से अलग नहीं माना जाता है. उन्हें शक्तिशाली ब्रह्मांडीय प्राणियों के रूप में देखा जाता है, जो भक्तों को सांसारिक और आध्यात्मिक मामलों में समान रूप से मदद करते हैं. 

भारत के 6 मंदिर जहां पुरुषों का प्रवेश वर्जित है! जानें इसके पीछे का रहस्य?

कंबोडिया (Cambodia)

कंबोडिया के प्राचीन खमेर साम्राज्य ने सालों पहले हिंदू धर्म को अपनाया था, जिसे बाद धीरे-धीरे बौद्ध धर्म की ओर रूचि बढ़ी. यहां की स्थापत्य कला आज भी लोगों का मन मोह लेती है. 

कंबोडिया का भव्य अंगकोरवाट मंदिर जिसका निर्माण मूल रूप से 12वीं शताब्दी में विष्णु मंदिर के रूप में किया गया था. यहां आज भी दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक स्मारकों में से एक है. इससे पहले के मंदिर आमतौर पर शिव को समर्पित थे. 

खमेर राजाओं ने देवराज की अवधारणा को जीवत रखा, जिसका मतलब है कि, ईश्वर राजा, जहां शास्कों को प्रतीकात्मक रूप से शिव या विष्णु से जोड़ा जाता था. धर्म और शासन आपस में काफी गहराई से जुड़े थे. 

मंदिरों की दीवारों पर महाभारत और रामायण से जुड़े दृश्य की नक्काशी देखने को मिलती थी. ये कथाएं केवल धार्मिक ग्रंथ ही नहीं थे, बल्कि राजीतिक और सांस्कृतिक आधार भी थी. 

हालांकि आज कंबोडिया में बौद्ध धर्म प्रमुख है, फिर भी हिंदू धर्म प्रतीकवाद इसकी कला, वास्तुकला और राष्ट्रीय पहचान में शामिल है. 

मॉरीशस (Mauritius)

मॉरीशस की कहानी थोड़ी अलग है. हिंदू धर्म यहां 19वीं शताब्दी में ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के दौरान लाए गए भारतीय अनुबंधित मजदूरों के साथ पहुंचा था. कई प्रवासियों के लिए आस्था एक विदेशी भूमि में अपनी पहचान बनाए रखने का तरीका बन गई. 

सबसे पवित्र स्थानों में से एक गंगा तलाओ है, जो एक गड्ढा झील है और मान्यता है कि, इसका गंगा नदी से आध्यात्मिक संबंध है. महाशिवरात्रि के दौरान हजारों भक्त शिव को प्रार्थना अर्पित करने के लिए तीर्थयात्रा करते हैं. 

ये रीति-रिवाज उत्तर भारतीय परंपराओं से काफी मिलती जुलती है, लेकिन समय के साथ इनमें क्रेओल संस्कृति और द्वीपीय प्रभाव भी समाहित हो गए हैं. भजन भोजपुरी, हिंदी और स्थानीय भाषाओं में गाए जाते हैं.

दिवाली को नेशनल हॉलिडे के रूप में मनाया जाता है. मॉरीशस में हिंदू देवता निरंतरता, लचीलेपन और सामुदायिक गौरव का प्रतीक हैं.

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.



Source link

Share This Article
Satish Kumar Is A Journalist With Over 10 Years Of Experience In Digital Media. He Is Currently Working As Editor At Aman Shanti, Where He Covers A Wide Variety Of Technology News From Smartphone Launches To Telecom Updates. His Expertise Also Includes In-depth Gadget Reviews, Where He Blends Analysis With Hands-on Insights.