Holika Dahan 2026: होली पर भद्रा और ग्रहण का साया, होलिका दहन किस मुहूर्त में करें

सतीश कुमार
8 Min Read


Holika Dahan 2026: मार्च के पहले सप्ताह में व्रत त्योहार को लेकर कन्फ्यूजन बन गया है. मार्च महीने के दूसरे दिन फाल्गुन पूर्णिमा पर चंद्र ग्रहण लग रहा है. होली के त्यौहार को लेकर लोगों में एक तरफ खुशी झलक रही है. वही दूसरी तरफ इन सभी सभी त्योहारों पर खग्रास चंद्रग्रहण की साया से लोगो के चेहरे पर चिंता झलक रही है. इसी बीच होलिका दहन पर भद्रा की साया से लोग चिंतित है.

मान्यता के अनुसार होली का त्योहार काशी के अंतर्गत फाल्गुन शुक्लपक्ष की पूर्णिमा तिथि को मनाने की परम्परा है काशी के अलावा होली पूर्णिमा युक्त प्रतिपदा में मनाया जाता है,जिसे होलिकोत्सव या रंगोत्सव के नाम से जाना जाता है.

होली का त्यौहार लोग बहुत धूम धाम से मनाते है होली सिर्फ रंग ही नहीं बल्कि उत्साह, उमंग तथा आस्था एवं धार्मिक उत्सव के रूप में जाना जाता है. होली देश के अलग अलग क्षेत्र में अपने अपने रिवाज के अनुसार मनाते है होली शुभता का प्रतिक है होली अधर्म पर धर्म की जीत का आस्था है होली, लेकिन कोई भी त्योहार का शुभ मुहूर्त में मनाया जाए त्योहार और मनमोहक बन जाता है.

होलिका दहन का शुभ मुहूर्त

02 मार्च 2026 सोमवार रात्रि 11:43 से लेकर 04 :56 सुबह  (03 मार्च 2026 ) के अंतर्गत होलिका दहन किया जायेगा.

काशी में होली कब 

होली काशी में 03 मार्च 2026 को मनाई जाएगी. काशी के आलावा होली 04 मार्च 2026 को मनाया जायेगा.

होलिका दहन करने का नियम

  • फाल्गुन पूर्णिमा की रात्रि हो या प्रदोष काल में करे.
  • रात्रि का समय सबसे उत्तम माना जाता है.
  • होलिका दहन के दिन भद्रा नहीं होनी चाहिए.

भद्रा कब से आरम्भ होगा

भद्रा का आरम्भ 02 मार्च 2026 दिन सोमवार समय 04:19  (संध्या )से आरंभ होगा .

भद्रा का समाप्ति 03 मार्च 2026 दिन मंगलवार 04:56 मिनट (सुबह ) तक

भद्रा का निर्णय

भद्रा जब सिंह राशि में लगता है भद्रा का वास पृथ्वी लोक में होता है जो अशुभ  माना जाता है.भद्रा का मुंह सामने पड़ता है इस कल में शुभ कार्य नहीं किया जाता है.

भद्रा का अशुभ

भद्रा मुख पर 02 मार्च 2026 रात्रि 11:43 मिनट तक रहेगा. इस समय कोई शुभ कार्य नहीं किया जाएगा.

भद्रा का शुभ समय

भद्रा पुच्छ पर 02 मार्च 2026 रात्रि 11:43 से आरम्भ होगा. भद्रा पुच्छ पर 03 मार्च 2026 04 :56( सुबह) तक रहेगा,(03 मार्च 2026 )

फाल्गुन पूर्णिमा

फाल्गुन पूर्णिमा धार्मिक दृष्टी से एक अलग ही महत्व है फाल्गुन पूर्णिमा तिथि ही नहीं बल्कि अध्यात्मिक उर्जा शक्ति और उल्लास का पर्व है यह दिन अस्नान दान के अंतिम प्रतिक है फाल्गुन पूर्णिमा पंचांग के अनुसार साल के अंतिम पूर्णिमा के रूप में जाना जाता है.

इस पूर्णिमा को स्नान से निवृत्त होकर भगवान विष्णु के साथ माता लक्ष्मी का पूजा किया जाता है. यह पूर्णिमा बहुत ही शुभ मानी जाती इस चंद्रमा के दर्शन से सभी तरह के रोग दूर होते है. चंद्रमा मन तथा कला एवं भावना और सकारत्मक उर्जा को प्रबल करता है.

कब है पूर्णिमा

पूर्णिमा तिथि का आरम्भ 02 मार्च 2026 संध्या 05:18 मिनट से आरम्भ होगा

पूर्णिमा तिथि का समाप्ति 03 मार्च 2026 संध्या 04:33 मिनट तक

  • फाल्गुन पूर्णिमा व्रत- व्रत की पूर्णिमा करने वाले 02 मार्च 2026 को मनाया जायेगा.
  • स्नान दान पूर्णिमा – स्नान दान की पूर्णिमा 03 मार्च 2026 को किया जायेगा.

होलिका दहन

होलिका दहन का त्यौहार बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतिक है यह त्योहार सामाजिक सांस्कृतिक और धार्मिक त्योहार के रूप में इसे मनाते है. होलिका दहन का कथा सबसे प्रमुख है हिरण्यकश्य नाम के राक्षस था जो स्वयं को भगवान का रूप मानता था,बहुत ही अहंकारी था उनकी सोच थी मेरे अलावा इस दुनिया में कोई शक्तिशाली नहीं है. वह चाहता था  सभी लोग उसे पूजा करे, मगर उन्ही के पुत्र प्रह्लाद भगवान विष्णु का परम भक्त था भगवान के प्रति आस्था को देखकर हिरण्यकश्य ने अपनी बहन होलिका को बोला तुम अपनी गोद में प्रह्लाद को बैठाकर धधकती आग में लेकर बैठ जाओ. 

जिसे प्रह्लाद जलकर भस्म हो जाए, क्योंकि होलिका को अग्नि से नहीं जलने का वरदान प्राप्त था.  ऐसा करने के बावजूद ले प्रह्लाद बच गया और होलिका अग्नि में जल गई. इसी घटना की स्मृति में प्रतिवर्ष होली के पहले होलिका दहन  किया जाता है. होलिका दहन की अग्नि से नकारत्मक उर्जा समाप्त होती है, इसलिए होलिका दहन शुभ मुहूर्त में करना समाज तथा देश के लिए कल्याणकारी होता है.

खग्रास चंद्रग्रहण

चंद्र ग्रहण एक खगोलीय घटना है जब चंद्रमा पृथ्वी की छाया में प्रवेश करता है, जिससे चंद्रमा पूरा अंधकारमय हो जाता है तब पूर्ण चंद्रग्रहण का प्रभाव होता है. ज्योतिषशास्त्र में ग्रहण को बहुत ही अशुभ समय माना जाता जाता है. 03 मार्च 2026 को लगने वाला चंद्रग्रहण भारत में ग्रस्तोदित खंडग्रास चंद्रग्रहण के रूप में दिखाई देगा अर्थात भारत में जिस समय ग्रहण लगा हुआ रहेगा.

मोक्ष होते समय भारत के कुछ राज्यों में दिखाई देगा.चंद्रग्रहण का स्पर्श भारत में कही दिखाई नहीं देगा,ग्रहण काल की समाप्ति भारत के पूर्वी राज्यों में कुछ स्थानों पर दिखाई देगा बाकि की स्थानों पर खण्ड चंद्रग्रहण का मोक्ष दिखाई देगा. साल 2026 का पहला खग्रास चंद्रग्रहण सिंह राशि पर लग रहा है सिंह राशि के स्वामी सूर्य है जिसे जन्मकुंडली के बारह राशियों पर इसका भरपूर प्रभाव दिखाई देगा.

  • पंचांग के अनुसार खग्रास चंद्रग्रहण का प्रभाव 03 मार्च 2026 दिन मंगलवार दृश्य समय 06:00 संध्या
  • खग्रास चंद्रग्रहण का मोक्ष 03 मार्च 2026 दिन मंगलवार मोक्ष समय 06:48 संध्या.
  • चंद्रग्रहण का सूतक समय 09:48 सुबह से आरम्भ होगा.
  • लेकिन भारत में सूतक के समय सूर्य का प्रभाव रहेगा जिसे मान्य नहीं रहेगा.

Mahakal Mandir: महाकाल मंदिर में होलिका दहन कब ? चंद्र ग्रहण के कारण धुलेंडी पर बदलेगी पूजा पद्दति

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. 



Source link

Share This Article
Satish Kumar Is A Journalist With Over 10 Years Of Experience In Digital Media. He Is Currently Working As Editor At Aman Shanti, Where He Covers A Wide Variety Of Technology News From Smartphone Launches To Telecom Updates. His Expertise Also Includes In-depth Gadget Reviews, Where He Blends Analysis With Hands-on Insights.