Abp Ideas Of India Summit 2026: इस्कॉन गोवर्धन इकोविलेज के डायरेक्टर गौरंग दास ने एबीपी न्यूज Ideas of India Summit में शिरकत की. उन्होंने कहा, इंसान अपनी छिपी हुई ताकत को बाहर नहीं ला पाते क्योंकि वह दूसरे को ज्यादा ताकतवर समझते हैं. ऐसा करने से बचना चाहिए. उन्होंने तनाव के मूल कारण पर बात करते हुए कहा कि जब हमारी आइडेंटिटी अस्थायी वस्तुओं से जुड़ी होती है और वे चीजें बदल जाती हैं, तो लोगों में डर पैदा होता है. गीता हमें इस डर से दूर करने में मदद करती है.
अपने अंदर की ताकत पहचानना जरूरी
उन्होंने कहा कि गीता बहुत मशहूर है, लेकिन उसे समझने की कोशिश कम लोग करते हैं. गीता ऐसा ग्रंथ है, जो किसी के भी जीवन के संदेह को दूर कर सकता है. हर व्यक्ति के अंदर एक हनुमान है, लेकिन उसे एक जामवंत की जरूरत होती है, क्योंकि वह अपनी अंदर की शक्ति को पहचान नहीं पाता है, बाहर के डर की वजह से. कई बार जो काम आप कर सकते हैं, उसमें भी आपको संशय होने लगता है, क्योंकि आप खुद को पहचान नहीं पाते हैं.
अपनी ताकत नहीं पहचान पाते हैं लोग
गौरंग दास ने कहा कि दिमाग के तीन कैंसर होते हैं- कंपेयरिंग, कंपलेनिंग और क्रिटिसाइजिंग. दूसरे से तुलना की वजह से व्यक्ति अपनी क्षमता और शक्ति को भूलकर दूसरों को देखने में लगा रहता है, इससे वह अपनी छिपी हुई ताकत को पहचान नहीं पाता है. उनका कहना है कि आज के समय में मानसिक अव्यवस्था इतनी बढ़ गई है कि लोग सरल कामों में भी निर्णय लेने में कमजोर होते जा रहे हैं. देश का विकास हो रहा है, लेकिन यह चिंता का विषय है कि अगर ह्यूमन रिसोर्स आगे नहीं बढ़ेगा तो आर्थिक विकास कब तक टिकेगा.
मानसिक चिंता एक बड़ा रोग
गौरंग दास का कहना था मानसिक चिंता आज एक बड़ा रोग बन चुकी है. मानसिक असंतुलन की वजह से बड़ी संख्या में लोग गंभीर बीमारियों से प्रभावित हो रहे हैं. मानसिक संतुलन न होने की वजह से आज के समय में दिल की बीमारियों से 20 मिलियन लोग, 10 मिलियन लोग कैंसर से जूझ रहे हैं. उन्होंने कहा कि गीता व्यक्ति को डिप्रेशन से भी बचाने में मदद करती है.
कितनी महत्वपूर्णं है गीता?
इस्कॉन गोवर्धन इकोविलेज के डायरेक्टर ने बताया कि गीता सही उद्देश्य की खोज, सही सिद्धांतों पर चलने और सही दृष्टिकोण अपनाने में सहायक है. हमारे पास सीमित समय और सीमित ऊर्जा है, इसलिए हम हर युद्ध नहीं लड़ सकते हैं. हमें यह तय करना होगा कि किसे ज्यादा महत्व देना है और किसे नहीं. गीता हमें यह सिखाती है कि जो करना है, उसे सही और सही तरीके से करना है.
मन पर नियंत्रण जरूरी
गौरंग दास ने कहा कि जीवन में आगे बढ़ने और करियर में अच्छा प्रदर्शन करने के लिए सबसे जरूरी है दृढ़ विश्वास. दूसरी जरूरी चीज होती है फोकस. जब तक मन पर नियंत्रण नहीं होगा, तब तक मन व्यक्ति को इधर-उधर भटकाता रहेगा. मन सही और गलत की समझ को भी बदल सकता है और व्यक्ति को परेशान भी कर सकता है. इसलिए फोकस जरूरी है. तीसरा महत्वपूर्ण बिंदु साहस है. जब तक अंदर कुछ नया करने का साहस नहीं होगा, तब तक कोई बड़ा काम नहीं किया जा सकता है.
सोशल मीडिया के बारे में क्या बोले गौरांग दास?
उन्होंने सोशल मीडिया पर भी बात की और कहा कि दुनिया में लगभग 230 मिलियन लोग इसके आदी हैं, जिनमें से 70 मिलियन भारत में हैं. सोशल मीडिया के अपने फायदे हैं, यह एक टूल है. टेक्नोलॉजी को बढ़ावा देना गलत नहीं है, लेकिन उसका सही तरीके से इस्तेमाल करना जरूरी है.
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