जब ईरान में गूंजी थी ब्राह्मण कवि की आवाज, खामेनेई के सामने हजरत अली की शान में पढ़ी थी मनकबत, रोने लगे थे लोग, वीडियो वायरल

aditisingh
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भारत की सांस्कृतिक परंपरा और फारसी अदब का संगम उस वक्त देखने को मिला, जब भारतीय विद्वान और कवि डॉ. बलराम शुक्ला ने ईरान में एक प्रतिष्ठित कार्यक्रम के दौरान हजरत अली (अ.स.) की शान में फारसी कविता पेश की. खास बात यह रही कि यह काव्य प्रस्तुति ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौजूदगी में हुई, जिसने इस आयोजन को और भी अहम बना दिया. अब इस कार्यक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है.

भारतीय कवि ने अयातुल्ला खामेनेई के सामने पेश की हजरत अली की शान में कविता

दरअसल, सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है जिसमें भारत के मशहूर कवि बलराम शुक्ला ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के सामने हजरत अली की शान में मनकबत पढ़ते दिखाई दे रहे हैं. वो कविता पढ़ते हुए फारसी में कहते हैं कि “इस शानदार सुबह ने मुझ तक अली का पैगाम पहुंचाया है, मैं ब्राह्मण हूं कि अजम की तरह अली का गुलाम बन गया. मैं ऐसा कमजोर शायर कि ऐसा कहने की जरूरत कैसे करूं, जब सामने अली की कलम का कमाल मोजेजा यानी चमत्कार मौजूद हो.” ये लाइनें उस फारसी मनकबत का तर्जुमा यानी ट्रांस्लेशन है जो बलराम शुक्ला ने हजरत अली की शान में कही. वीडियो में खामेनेई बलराम शुक्ल को बड़े आराम और ध्यान से सुनते दिखाई दे रहे हैं, और उनकी लाइनों पर दाद भी दे रहे हैं.

विद्वानों और कवियों के बीच फारसी में कलाम पढ़ खींचा था लोगों का ध्यान

जानकारी के मुताबिक यह एक सांस्कृतिक और साहित्यिक आयोजन था, जिसमें कई विद्वान और कवि शामिल हुए थे. डॉ. शुक्ला ने बेहद सादगी और प्रभावशाली अंदाज में हजरत अली की शख्सियत, उनके ज्ञान, इंसाफ और इंसानियत पर कविता पेश की. उनकी साफ उच्चारण और भावपूर्ण प्रस्तुति ने मौजूद लोगों का ध्यान खींच लिया. जब उन्होंने मनकबत के अंदाज में हजरत अली की शान बयान की तो पूरा हॉल शांत हो गया. उनकी कविता में न्याय, सच्चाई और मानवता जैसे मूल्यों पर जोर था, जो हजरत अली की पहचान माने जाते हैं.

कौन हैं बलराम शुक्ला

डॉ. बलराम शुक्ला संस्कृत और फारसी भाषा के जानकार माने जाते हैं. वे तेहरान स्थित स्वामी विवेकानंद सांस्कृतिक केंद्र से भी जुड़े रहे हैं. भारत और ईरान के बीच सांस्कृतिक रिश्तों को मजबूत करने में उनका योगदान अहम रहा है. सोशल मीडिया पर इस कार्यक्रम के वीडियो भी सामने आए, जिनमें एक भारतीय कवि को फारसी में हजरत अली की तारीफ करते देख लोग हैरान और खुश नजर आए. कई लोगों ने इसे भारत और ईरान के रिश्तों की खूबसूरत मिसाल बताया.

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यूजर्स ने बहाए आंसू

वीडियो को  Iran Culture House – New Delhi के यूट्यूब चैनल से शेयर किया गया है जिसे अब तक लाखों लोगों ने देखा है तो वहीं कई लोगों ने वीडियो को लाइक भी किया है. ऐसे में सोशल मीडिया यूजर्स वीडियो को लेकर तरह तरह के रिएक्शन दे रहे हैं. एक यूजर ने लिखा…खामेनेई की मौत ने उनके चाहने वालों को रुला दिया है. एक और यूजर ने लिखा…क्या खूबसूरत कलाम कहा है बलराम जी ने. तो वहीं एक और यूजर ने लिखा…आज खामेनेई बहुत याद आ रहे हैं.

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Satish Kumar Is A Journalist With Over 10 Years Of Experience In Digital Media. He Is Currently Working As Editor At Aman Shanti, Where He Covers A Wide Variety Of Technology News From Smartphone Launches To Telecom Updates. His Expertise Also Includes In-depth Gadget Reviews, Where He Blends Analysis With Hands-on Insights.