Holika Dahan Puja 2026: राशि अनुसार करें होलिका दहन पूजा, जीवन में आएगी सुख-समृद्धि और खुशहाली

aditisingh
8 Min Read


Holika Dahan Puja 2026: हिंदू धर्म में होली का त्योहार दो दिवसीय होता है, जिसकी शुरुआत होलिका दहन से होती है. होलिका दहन फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है. पुराणों में होलिका दहन और पूजा का विशेष महत्व बताया गया है. माना जाता है कि होलिका दहन के दिन होली की पूजा करने से महालक्ष्मी प्रसन्न होती हैं.

पाल बालाजी ज्योतिष संस्थान जयपुर जोधपुर के निदेशक ज्योतिषाचार्य डा. अनीष व्यास ने बताया कि रंगों का त्योहार होली इस बार 4 मार्च को मनेगा. इससे एक दिन पहले 2  मार्च को होली जलाई जाएगी. इस बार भद्रा दोष रहेगा. हालांकि इस बार होलिका दहन का समय 2 मार्च की शाम और अर्द्ध रात्रि में किया जाएगा, जिसमें भी 2 मार्च की शाम को सिर्फ 12 मिनट का ही समय मिलेगा, जबकि अर्द्ध रात्रि में 1 घंटे 10 मिनट का समय होलिका दहन के लिए मिल रहा है.

होलिका दहन पर भद्रा का साया

2 मार्च को शाम 5:56 बजे भद्रा काल प्रारंभ होगा, जो 3 मार्च सुबह 5:28 बजे तक रहेगा. इस वर्ष भद्रा भूलोक में और सिंह राशि में मानी जा रही है, इसलिए प्रदोष काल में होलिका पूजन और दहन शास्त्रसम्मत और श्रेष्ठ रहेगा. फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की पूर्णिमा तिथि पर होलिका पूजन का विशेष महत्व होता है. भद्रा काल में दान-पुण्य भी किया जा सकता है. इस बार होली चंद्र ग्रहण के साये में मनाई जाएगी. 3 मार्च को दोपहर 3:20 बजे चंद्र ग्रहण शुरू होगा और शाम 6:48 बजे समाप्त होगा. जयपुर में चंद्र उदय शाम 6:29 बजे और ग्रहण का समापन 6:48 बजे होगा, जिससे ग्रहण काल मात्र 18 मिनट का रहेगा. ग्रहण का सूतक मंगलवार सुबह 6:20 बजे से लागू होगा. ग्रहण पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र और सिंह राशि में बनेगा और भारत में दिखाई देगा. चंद्र ग्रहण होने से होलिका दहन 2 मार्च को एक दिन पहले ही करना शुभ रहेगा. इस प्रकार, रंगों का त्योहार 3 मार्च को मनाया जाएगा.

होलिका दहन

फाल्गुनशुक्ल की प्रदोषव्यापिनी पूर्णिमा को भद्रा रहित में करना शास्त्रसम्मत बताया गया है. फाल्गुन पूर्णिमा तिथि  2 मार्च 2026 को शाम 5:56 बजे शुरू होकर 3 मार्च 2026 को शाम 5:07 बजे तक समाप्त होगी. प्रदोषकाल में पूर्णिमा होने से दिनांक 02 मार्च 2026 (सोमवार) को ही होलिका दहन होगा. इस दिन भद्रा सायं 05:56 से अन्तरात्रि 05:28 तक भूमिलोक (नैऋत्यकोण अशुभ) की रहेगी, जो कि सर्वथा त्याज्य है.

यथा :- भद्रायां द्वे न कर्तव्ये श्रावणी (रक्षाबंधन) फाल्गुनी ऐलिकादहन) तथा। श्रावणी नृपतिं हन्ति ग्रामं दहति फाल्गुनी ॥ – मुहूर्तचिन्तामणि

श्रेष्ठ मुहूर्त (प्रदोषकाल)

धर्मसिन्धु के प्रमाणानुसार दिनांक 02 मार्च 2026 सोमवार को सायं 06:24 से सायं 06:36 के मध्य प्रदोषकाल में होलिका दहन श्रेष्ठ होगा।

अन्य मुहूर्त :- भद्रा पुच्छ मध्यरात्रि 01:23 से 02:34 तक रहेगी, जिसमें परम्परा के अनुसार होलिका दहन किया जा सकता है, परन्तु भद्रा समाप्ति के बाद कदापि नहीं करें।

निष्कर्ष :- यदि भद्रा निशीथकाल से आगे तक रहे तो (भद्रा मुख को छोड़कर) होलिका दहन भद्रकाल (भद्रा पुच्छ या प्रदोष) में किया जाना चाहिए। 2 मार्च 2026 को, भद्रा और भद्रा पुच्छ ही निशीथकाल से आगे तक व्याप्त हैं। प्रदोष काल ही होलिका दहन हेतु श्रेष्ठ हैं। 

होलिका दहन के दिन क्या नहीं करना चाहिए

होलिका दहन के दिन सफेद खाद्य पदार्थ  ग्रहण नहीं करना चाहिए. होलिका दहन के समय सिर ढंककर ही पूजा करनी चाहिए. नवविवाहित महिलाओं को होलिका दहन नहीं देखना चाहिए. सास-बहू को एक साथ मिलकर होलिका दहन नहीं देखना चाहिए. इस दिन को भी शुभ या मांगलिक कार्य नहीं करना चाहिए.

होलिका दहन की रात भी महारात्रि की श्रेणी में शामिल

होलिका दहन की रात को भी दीपावली और शिवरात्रि की भांति ही महारात्रि की श्रेणी में शामिल किया गया है. होलिका की राख को मस्तक पर लगाने का भी विधान है. ऐसा करने से शारीरिक कष्ट दूर होते हैं. इस रात मंत्र जाप करने से वे मंत्र सिद्धि प्राप्त होती है. जीवन सुखमय बनता है, जीवन में आने वाली सभी परेशानियों का अपने आप निराकरण हो जाता है.

राशि अनुसार करें होलिका की पूजा (Rashi Anusar Holika Dahan Puja)

मेष राशि- मेष राशि के लोग गुड़ की आहुति दें.

वृषभ राशि- वृषभ राशि वाले चीनी की आहुति दें.

मिथुन राशि- मिथुन राशि के लोग कपूर की आहुति दें.

कर्क राशि- कर्क राशि के लोग लोहबान की आहुति दें.

सिंह राशि- सिंह राशि के लोग गुड़ की आहुति दें.

कन्या राशि- कन्या राशि के लोग कपूर की आहुति दें.

तुला राशि-  तुला राशि वाले कपूर की आहुति दें.

वृश्चिक राशि- वृश्चिक राशि के लोग गुड़ की आहुति दें.

धनु राशि- धनु राशि के लोग जौ और चना की आहुति दें.

मकर राशि- मकर राशि वाले तिल को होलिका दहन में डालें.

कुंभ राशि- कुंभ राशि वाले तिल को होलिका दहन में डालें.

मीन राशि- मीन राशि के लोग जौ और चना की आहुति दें.

शनि-राहु-केतु और नजर दोष से मुक्ति के उपाय

होलिका दहन करने या फिर उसके दर्शन मात्र से भी व्यक्ति को शनि-राहु-केतु के साथ नजर दोष से मुक्ति मिलती है. माना जाता है कि होली की भस्म का टीका लगाने से नजर दोष तथा प्रेतबाधा से मुक्ति मिलती है. किसी मनोकामना को पूरा करना चाहते हैं तो जलती होली में 3 गोमती चक्र हाथ में लेकर अपनी इच्छा को 21 बार मन में बोलकर तीनों गोमती चक्र को अग्नि में डालकर अग्नि को प्रणाम करके वापस आ जाएं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यदि कोई व्यक्ति घर में भस्म चांदी की डिब्बी में रखता है तो उसकी कई बाधाएं अपने आप ही दूर हो जाती हैं. अपने कार्यों में आने वाली बाधा को दूर करने के लिए आटे का चौमुखा दीपक सरसों के तेल से भरकर उसमें कुछ दाने काले तिल,एक बताशा, सिन्दूर और एक तांबे का सिक्का डालकर उसे होली की अग्नि से जलाएं. अब इस दीपक को घर के पीड़ित व्यक्ति के सिर से उतारकर किसी सुनसान चौराहे पर रखकर बगैर पीछे मुड़े वापस आकर अपने हाथ-पैर धोकर घर में प्रवेश कर लें.

ये भी पढ़ें: Holi 2026 Lucky Colours: राशि अनुसार खेलें होली तो होगा बेहतर, जानें किसके लिए कौन सा रंग-गुलाल शुभ


Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें



Source link

Share This Article
Follow:
Satish Kumar Is A Journalist With Over 10 Years Of Experience In Digital Media. He Is Currently Working As Editor At Aman Shanti, Where He Covers A Wide Variety Of Technology News From Smartphone Launches To Telecom Updates. His Expertise Also Includes In-depth Gadget Reviews, Where He Blends Analysis With Hands-on Insights.