उधर अमेरिका ने ईरानी पर दागी मिसाइलें, इधर हांफ रहे तेल कंपनियों के शेयर; 6% तक लुढ़का OMC स्टॉक

aditisingh
4 Min Read


Share Crash: अमेरिका, ईरान और इजरायल के बीच तनाव बढ़ने का असर कुछ ऐसा रहा कि अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में क्रूड ऑयल की कीमतें 10 परसेंट तक बढ़ गई हैं. कच्चे तेल की कीमतों में इसी उछाल के बीच भारत में डाउनस्ट्रीम तेल कंपनियों हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL), भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL), और इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOC) जैसी तेल विणपन कंपनियों के शेयर ढह गए. शुरुआती कारोबारी में इनके शेयर में 6 परसेंट की गिरावट आई. इनमें BPCL के शेयरों में 6 परसेंट, HPCL के शेयरों में 5.3 परसेंट और  IOC के शेयरों में 5 परसेंट तक की गिरावट देखी गई.

अपस्ट्रीम तेल कंपनियों के शेयरों में तेजी

इस बीच, अपस्ट्रीम तेल कंपनियों के शेयरों में तेजी देखी गई. सोमवार को ONGC, ऑयल इंडिया के शेयर 5 परसेंट तक बढ़ गए. ONGC के शेयर BSE पर 5 परसेंट की बढ़त के साथ दिन के सबसे ऊंचे लेवल 293 रुपये पर पहुंच गए, जबकि ऑयल इंडिया के शेयर शुरुआती कारोबार में 4.5 परसेंट बढ़कर 505.50 रुपये पर पहुंच गए. इससे साफ है कि क्रूड ऑयल की बढ़ती कीमतें अपस्ट्रीम ऑयल और गैस कंपनियों के लिए अच्छी बात है. 

तेल और गैस सेक्टर में कंपनियों को उनके काम के आधार पर अपस्ट्रीम, डाउनस्ट्रीम और मिडस्ट्रीम इन तीन हिस्सों में बांटा गया है.

अपस्ट्रीम कंपनी- जमीन की तलहटी या समुद्र के नीचे कच्चे तेल और नैचुरल गैस के सोर्स का पता लगाना और उन्हें निकालना है.

डाउनस्ट्रीम कंपनी- इनका काम कच्चे तेल की रिफाइनिंग के जरिए उसे इस्तेमाल करने लायक बनाना और ग्राहकों को बेचना है. 

मिडस्ट्रीम कंपनी- इस श्रेणी में आने वाली कंपनियों का काम तेल और गैस को पाइपलाइन या टैंकरों के जरिए एक जगह से दूसरी जगह तक पहुंचाना और स्टोर करना है. 

अपस्ट्रीम कंपनियों के शेयरों में क्यों तेजी? 

अपस्ट्रीम कंपनियां जैसे कि ONGC या GAIL कच्चे तेल को निकालकर उसे अंतर्राष्ट्रीय बाजार के भाव पर बेचती है. जैसे कि आज ब्रेंट क्रूट 82 डॉलर प्रति बैरल के पार चला गया. यानी कि इन कंपनियों को अपने निकाले गए तेल पर अधिक पैसा मिल रहा है.  

डाउनस्ट्रीम शेयरों में क्यों गिरावट?

अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में भले ही कच्चे तेल की कीमत बढ़ जाए, लेकिन देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतों को स्थिर रखने का प्रयास किया जाता है. ऐसे में डाउनस्ट्रीम कंपनियां अपस्ट्रीम कंपनियों से ऊंची कीमत पर तेल खरीद रही हैं, लेकिन उन्हें बिक्री पर अधिक मुनाफा नहीं मिल पा रहा है. इसके चलते उन्हें नुकसान हो रहा है और इसका असर शेयरों पर साफ दिख रहा है. 

डिस्क्लेमर: (यहां मुहैया जानकारी सिर्फ़ सूचना हेतु दी जा रही है. यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है. निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें. ABPLive.com की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है.)

ये भी पढ़ें:

Iran-Israel War: तेल की बढ़ती कीमतों से भारत को कितना नुकसान? क्या रूक सकती है क्रूड की सप्लाई? 



Source link

Share This Article
Follow:
Satish Kumar Is A Journalist With Over 10 Years Of Experience In Digital Media. He Is Currently Working As Editor At Aman Shanti, Where He Covers A Wide Variety Of Technology News From Smartphone Launches To Telecom Updates. His Expertise Also Includes In-depth Gadget Reviews, Where He Blends Analysis With Hands-on Insights.