मिडिल ईस्ट विवाद का भारतीय बाजार पर असर? ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म ने बताया किन सेक्टरों पर पड़ेगा प्रभाव; जानें डिटेल

aditisingh
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Jefferies Report Middle East Conflict Impact: मिडिल ईस्ट में चल रहे विवाद का सीधा असर भारतीय बाजार पर दिख रहा है. सोमवार के कारोबारी दिन दोनों ही प्रमुख बेंचमॉर्क इंडेक्स बीएसई सेंसेक्स और निफ्टी 50 लाल निशान पर ट्रेड करते हुए बंद हुए. व्यापार आंकड़ों की बात करें तो, भारत का पश्चिम एशिया के साथ करीब 75 अरब डॉलर का निर्यात होता है. साथ ही मिडिल ईस्ट में बहुत बड़ी संख्या में भारतीय कामगार रहते हैं और हर महीने एक बड़ी रकम भारत अपने परिवार के पास भेजते हैं.

ईरानी सरकार ने होर्मुज स्ट्रेट को बंद करने का फैसला लिया है. इस बीच ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म Jefferies की एक रिपोर्ट “Middle East Conflict – Impact Likely to Be Short-Term” जारी की है.  जिसमें फर्म ने विभिन्न सेक्टरों पर इसके प्रभाव के बारे में विस्तार से बताया है. आइए जानते हैं, इस बारे में….

ऑयल मार्केट पर क्या होगा असर?

फर्म के अनुसार, वैश्विक स्तर पर पैदा हुई इस अस्थिरता के कारण भारतीय तेल मार्केटिंग कंपनियों को सबसे ज्यादा प्रभाव पड़ने वाला हैं. BPCL, HPCL और IOCL जैसे कंपनियां को नुकसान उठानी पड़ सकती हैं.

फर्म ने कहा कि अगर कच्चे तेल की कीमत 80 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर जाती है तो सरकार को रिटेल फ्यूल की कीमतों को बढ़ाने का फैसला लेना होगा या एक्साइज ड्यूटी कम करनी पड़ सकती है. सरकार के लिए यह दोनों ही विकल्प मुश्किल भरे हो सकते हैं. अगर कीमते बढ़ती हैं तो आम लोगों को महंगाई की मार झेलनी पड़ेगी.

मिडिल ईस्ट तनाव से एविएशन कंपनियों पर दोहरा असर

ब्रोकरेज फर्म Jefferies के मुताबिक एविएशन सेक्टर पर मौजूदा हालात का दो तरफ से असर पड़ सकता है. रिपोर्ट में कहा गया है कि IndiGo की 35-40 प्रतिशत इंटरनेशनल कैपेसिटी मिडिल ईस्ट रूट्स पर निर्भर है. जो उसकी कुल कैपेसिटी का करीब 10-12 प्रतिशत हिस्सा है. अगर क्षेत्रीय तनाव के कारण यात्रा या एयरस्पेस प्रभावित होता है, तो इन रूट्स पर यात्रियों की मांग घट सकती है.

दूसरी ओर, कच्चे तेल की कीमत बढ़ने से एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) महंगा हो जाता है. डिमांड में कमी और ईंधन लागत में बढ़ोतरी होने से कंपनी के प्रॉफिट मार्जिन में कमी आ सकती है.

मिडिल ईस्ट से जुड़ी कंपनियों को हो सकता है नुकसान

ब्रोकरेज फर्म का कहना है कि, इस तनाव से भारत की उन कंपनियों को नुकसान हो सकता है, जो अपनी आमदनी के लिए मिडिल ईस्ट पर निर्भर है. उदाहरण के लिए लार्सन एंड टूब्रो (एलएडटी) कंपनी के कुल रेवेन्यू का 25 प्रतिशत हिस्सा मिडिल ईस्ट से आता है. जारी इस विवाद से एलएंडटी को भारी नुकसान होने की संभावना जताई गई है. 

डिस्क्लेमर: (यहां मुहैया जानकारी सिर्फ़ सूचना हेतु दी जा रही है. यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है. निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें. ABPLive.com की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है.)

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Satish Kumar Is A Journalist With Over 10 Years Of Experience In Digital Media. He Is Currently Working As Editor At Aman Shanti, Where He Covers A Wide Variety Of Technology News From Smartphone Launches To Telecom Updates. His Expertise Also Includes In-depth Gadget Reviews, Where He Blends Analysis With Hands-on Insights.