हर साल लाखों बच्चे CBSE बोर्ड की परीक्षा देते हैं. लेकिन ज्यादातर छात्रों के मन में एक सवाल जरूर आता है आखिर बोर्ड के पेपर के सवाल आते कहां से हैं? क्या ये किसी एक किताब से कॉपी होते हैं या अलग से बनाए जाते हैं? सबसे पहले ये समझ लीजिए कि CBSE का हर सवाल उसी सिलेबस से आता है जो बोर्ड पहले से जारी करता है. हर क्लास और हर विषय के लिए अलग सिलेबस तय होता है. उसी में टॉपिक, चैप्टर और मार्क्स की वेटेज लिखी होती है. पेपर बनाने वाले लोग उसी सिलेबस को देखकर सवाल तैयार करते हैं.
CBSE स्कूलों में ज्यादातर पढ़ाई NCERT की किताबों से होती है. इसलिए पेपर में पूछे जाने वाले ज्यादातर सवाल इन्हीं किताबों के कॉन्सेप्ट पर आधारित होते हैं.हालांकि सवाल सीधे-सीधे किताब से उठाकर नहीं डाले जाते, लेकिन जो भी पूछा जाता है, वो NCERT में पढ़ाए गए विषयों से जुड़ा होता है. इसीलिए टीचर और एक्सपर्ट हमेशा कहते हैं कि पहले NCERT मजबूत करो.
सैंपल पेपर और ब्लूप्रिंट से तय होता है पैटर्न
CBSE हर साल सैंपल पेपर जारी करता है. इनसे छात्रों को अंदाजा हो जाता है कि पेपर का फॉर्मेट कैसा रहेगा. पेपर बनाने से पहले एक ब्लूप्रिंट तैयार किया जाता है, जिसमें तय होता है कि क्वेश्चन पेपर में कितने MCQ होंगे, कितने 2, 3 और 5 नंबर के सवाल होंगे, कितने सवाल समझ पर आधारित होंगे और कितने सवाल एप्लिकेशन या विश्लेषण वाले होंगे.
एक पूरी टीम बनाती है पेपर
रिपोर्ट्स के अनुसार बोर्ड का पेपर कोई एक व्यक्ति नहीं बनाता. इसके लिए विषय विशेषज्ञ, अनुभवी शिक्षक और परीक्षक मिलकर काम करते हैं.पहले सवाल तैयार किए जाते हैं, फिर उनकी जांच होती है. अगर कहीं गलती या अस्पष्ट भाषा हो तो उसे सुधारा जाता है. कई बार समीक्षा के बाद ही पेपर फाइनल होता है. CBSE पिछले सालों के प्रश्नपत्रों के पैटर्न को भी ध्यान में रखता है. इससे यह देखा जाता है कि छात्रों का लेवल क्या है और किस तरह के सवाल बेहतर रहते हैं. हाल के वर्षों में कॉम्पिटेंसी बेस्ड और केस स्टडी वाले सवालों की संख्या बढ़ी है.
छात्रों को क्या करना चाहिए?
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