भारत में सरकारी नौकरियों की बात होती है तो आईपीएस का नाम सबसे ऊपर आता है. यह सिर्फ एक नौकरी नहीं, बल्कि जिम्मेदारी और सम्मान से जुड़ा पद है. कई युवा सालों तक मेहनत करते हैं ताकि वे यूपीएससी पास कर आईपीएस अधिकारी बन सकें,अक्सर लोगों के मन में सवाल होता है आईपीएस की शुरुआती सैलरी कितनी होती है? क्या-क्या सुविधाएं मिलती हैं? अगर आपके मन में भी यही सवाल है तो यहां आपको पूरी जानकारी मिल जाएगी.
आईपीएस की शुरुआती सैलरी कितनी होती है?
अधिकारी की शुरुआती बेसिक सैलरी 56,100 रुपये प्रति माह होती है.यह वेतन 7th Central Pay Commission के तहत तय किया गया है. शुरुआत में अधिकारी की नियुक्ति आमतौर पर डिप्टी सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस या असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस के पद पर होती है. हालांकि 56,100 रुपये केवल बेसिक पे है. इसके अलावा अधिकारी को महंगाई भत्ता (DA), हाउस रेंट अलाउंस (HRA), यात्रा भत्ता और अन्य सुविधाएं भी मिलती हैं, जिससे उनकी कुल इन-हैंड सैलरी इससे काफी अधिक हो जाती है.
प्रमोशन के बाद कितनी बढ़ती है सैलरी?
जैसे-जैसे भारतीय पुलिस सेवा में अधिकारी को अनुभव और प्रमोशन मिलता है, वैसे-वैसे उनकी सैलरी भी बढ़ती जाती है. 7th वेतन आयोग के अनुसार शुरुआत में डीएसपी के पद पर करीब 56,100 रुपये प्रति माह वेतन मिलता है, जो एडिशनल एसपी बनने पर लगभग 67,700 रुपये और एसपी बनने पर 78,800 रुपये हो जाता है. इसके बाद डीआईजी को करीब 1,31,000, रुपये आईजी को 1,44,200 रुपये एडीजी को 2,05,000 रुपये और सबसे ऊंचे पद डीजीपी पर लगभग 2,25,000 रुपये प्रति माह सैलरी मिलती है. यानी साफ है कि प्रमोशन के साथ आईपीएस अधिकारी की कमाई दो लाख रुपये से भी ज्यादा तक पहुंच सकती है.
IPS को मिलने वाली सुविधाएं
अधिकारी को सिर्फ सैलरी ही नहीं मिलती, बल्कि कई अहम सरकारी सुविधाएं भी दी जाती हैं, जिसकी वजह से यह नौकरी काफी आकर्षक मानी जाती है. पोस्टिंग के अनुसार उन्हें सरकारी आवास या बंगला मिलता है, जो अक्सर सुरक्षित और अच्छे इलाके में होता है. अगर सरकारी घर उपलब्ध नहीं है तो हाउस रेंट अलाउंस (HRA) दिया जाता है. महंगाई के असर को संतुलित करने के लिए महंगाई भत्ता (DA) भी मिलता है, जो समय-समय पर बढ़ता रहता है. वरिष्ठ अधिकारियों को ड्राइवर सहित सरकारी गाड़ी दी जाती है.
इसके अलावा अधिकारी और उनके परिवार को मेडिकल सुविधा मिलती है, जिसमें इलाज का खर्च सरकार उठाती है. ड्यूटी के दौरान यात्रा का पूरा खर्च यात्रा भत्ते के रूप में दिया जाता है. ऊंचे पदों पर सुरक्षा गार्ड और पर्सनल स्टाफ भी उपलब्ध कराया जाता है, जिससे वे अपने काम को बेहतर तरीके से संभाल सकें.
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