कुकिंग ऑयल से लेकर केसर-पिस्ता तक… ईरान में छिड़े जंग से भारत में महंगी हुई चीजें, आम आदमी की बढ़ी मुश्किलें

aditisingh
5 Min Read


Iran-Israel War: ईरान पर इजरायल और अमेरिका के हमले और तेहरान की जवाबी कार्रवाई से माहौल सिर्फ मिडिल ईस्ट में ही गर्म नहीं है. इसका असर पूरी दुनिया में पड़ा है. भारत भी इससे अछूता नहीं रहा है. ग्लोबलाइजेशन के इस दौर में सारे देश एक-दूसरे से आपस में कनेक्टेड है. ऐसे में एक पर किसी अच्छाई या बुराई का असर दूसरे पर भी पड़ता है. इसी क्रम में ईरान पर छिड़े जंग से भारत में भी कई चीजें महंगी हुई हैं, जिनका असर आपकी जेबों पर पड़ने वाला है.  

सोने-चांदी की कीमतें बढ़ीं

जंग के इस माहौल में सोने-चांदी की कीमतों में तो उछाल आया ही है. बीते 1 मार्च, 2026 को घरेलू बाजारों में सोना 1.73 लाख प्रति 10 ग्राम के रिकॉर्ड लेवल पर पहुंच गया था. चांदी की कीमतें भी 2.90 लाख प्रति किलो के करीब पहुंच गई थी. हालांकि, पिछले चार सेशन से कीमतों में कुछ नरमी देखी जा रही है. 

सिरेमिक इंडस्ट्री पर असर

जंग का असर देश की सिरेमिक इंडस्ट्री पर भी पड़ा है. आलम यह है कि गुजरात के मोरबी में सिरेमिक इंडस्ट्री अगले कुछ दिनों में बंद होने की कगार पर पहुंच गई है क्योंकि खाड़ी देशों में युद्ध जैसे हालात से गैस की सप्लाई में रुकावट आ रही है. सिरेमिक इंडस्ट्री में भट्टियां जलाने से लेकर मिट्टी को सुखाने तक के काम में प्रोपेन या नेचुरल गैस की बहुत ज्यादा जरूरत पड़ती है.

उधर बीते शनिवार को ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत और लगातार अमेरिकी हमलों के बाद से जंग और तेज हो गई है. इसी उथल-पुथल के बीच ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को बंद कर दिया है. इससे गैस की सप्लाई में रूकावट आ रही है. 

खाने पकाने का तेल महंगा

ईरान पर छिड़े जंग से कुकिंग ऑयल की भी कीमतें बढ़ी हैं क्योंकि बेशक भारत ईरान से Edible Oil नहीं मंगाता है, लेकिन भारत अपनी जरूरत का 60 परसेंट कुकिंग ऑरूल दूसरे देशों से मंगाता है जैसे कि इंडोनेशिया और मलेशिया से पॉम ऑयल, अर्जेंटीना और ब्राजील से सोयाबीन ऑयल, रूस और यूक्रेन से सूरजमुखी का तेल. अब सवाल आता है कि फिर ईरान में संघर्ष से तेल क्यों महंगा हो रहा है?

दरअसल, ईरान-इजरायल में तनाव से क्रूड महंगा होने से पॉम और सोया ऑयल का इस्तेमाल ज्यादा से ज्यादा बायो-फ्यूल बनाने में किया जाता है. इससे कुकिंग ऑयल की सप्लाई में कमी आती है और कीमतें बढ़ने लगती हैं.  इसके अलावा, युद्ध जैसी स्थिति में शिपिंग और कमोडिटी मार्केट में अस्थिरता बढ़ जाने से अंतर्राष्ट्रीय व्यापार धीमा पड़ जाता है, जिससे स्टॉक की कमी होने लगती है.

इंडियन वेजिटेबल ऑयल प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन के चेयरमैन सुधाकर देसाई का कहना है, ”अमेरिका और ईरान के बीच किसी भी तरह के तनाव या उसके बढ़ने का भारत क्रूड ऑयल और कुकिंग ऑयल के बाजारों पर सीधा प्रभाव पड़ता है. क्रूड ऑयल की कीमत बढ़ने से पेट्रोल-डीजल और तमाम फॉसिल फ्यूल महंगा होता है, जिससे सभी चीजों की लॉजिस्टिक्स कॉस्ट बढ़ जाती है. इसके अलावा, इससे समुद्री जहाजों के बीमा जोखिम भी बढ़ सकते हैं.”

बता दें कि बीते 5 मार्च से कई समुद्री बीमा कंपनियों ने इस रीजन के लिए वॉर रिस्क कवरेज देना बंद कर दिया है. ऐसे में जहाजों के लिए यहां से गुजरना न केवल महंगा, बल्कि जोखिम भरा भी है. 

ड्राई फ्रूट्स हुआ महंगा

युद्ध के इस माहौल में ईरान और अफगानिस्तान से आने वाले पिस्ता, केसर, अंजीर, खुबानी जैसे सूखे मेवों की सप्लाई ठप होने की कगार पर है. इससे इनकी भी कीमतें बढ़ने लगी हैं. 

दालें और प्याज की कीमत में इजाफा

भारत अरहर, उड़द और मसूर का आयात म्यांमार, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों से करता है. हालांकि, होर्मूज की नाकाबंदी के चलते पश्चिम एशिया में फंसे जहाजों और कंटेनर्स को लंबा रास्ता तय करना पड़ रहा है. इससे शिपिंग कंपनियों ने भी ‘वॉर रिस्क सरचार्ज’ लगा दिया है. इससे दालों को भारत लाने में अधिक खर्च उठाना पड़ रहा है. भारत प्याज का भी बहुत बड़ा आयातक है. युद्ध की स्थिति में स्टॉक जमा करने की होड़ में प्याज की डिमांड अचानक से बढ़ गई है. सप्लाई चेन में रुकावट की डर से प्याज की भी कीमतें बढ़ी हैं.  

ये भी पढ़ें:

Indian Currency: ईरान वॉर के बीच कराहते रुपये को सहारा, ऑल टाइम लो से ऊपर उछला, कड़े मुकाबले में डॉलर को पछाड़ा 



Source link

Share This Article
Follow:
Satish Kumar Is A Journalist With Over 10 Years Of Experience In Digital Media. He Is Currently Working As Editor At Aman Shanti, Where He Covers A Wide Variety Of Technology News From Smartphone Launches To Telecom Updates. His Expertise Also Includes In-depth Gadget Reviews, Where He Blends Analysis With Hands-on Insights.