बड़ी राहत! चाहे कितना लंबा चले ईरान वॉर, नहीं पड़ेगा कच्चे तेल संकट का असर, भारत की ओर चला क्रूड ऑयल शिप

aditisingh
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Middle East Tensions: वेस्ट एशिया में बढ़ते तनाव और Strait of Hormuz के बंद होने की आशंका ने भारत के लिए नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक मिडिल ईस्ट से तेल सप्लाई में संभावित बाधा को देखते हुए भारत ने फिर से रूसी तेल की ओर रुख करना शुरू कर दिया है. भारत अपनी कुल तेल जरूरतों का लगभग 90 प्रतिशत आयात करता है और हाल के समय में उसने रूस के बजाय मिडिल ईस्ट से तेल खरीद बढ़ा दी थी. लेकिन Iran से जुड़े युद्ध जैसे हालात के कारण भारत अब जोखिम कम करने के लिए Russia से कच्चा तेल खरीदने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है.

रूस के तेल की ओर फिर बढ़ा रुख

गौरतलब है कि हाल के कुछ हफ्तों में भारतीय तेल कंपनियों ने United States के साथ चल रही संभावित ट्रेड डील को ध्यान में रखते हुए रूस से कच्चे तेल की खरीद कुछ हद तक कम कर दी थी. माना जा रहा था कि इससे व्यापारिक समझौते पर असर पड़ सकता है. भारतीय कंपनियों के इस फैसले के बाद रूस ने अतिरिक्त तेल की आपूर्ति China की ओर मोड़ दी थी. हालांकि अब हालात बदलते दिख रहे हैं. Bloomberg की रिपोर्ट के अनुसार शिप-ट्रैकिंग डेटा से पता चलता है कि पूर्वी एशिया की ओर जा रहे रूसी कच्चे तेल के कुछ शिपमेंट को अब भारत की ओर मोड़ा गया है.

वहीं जहाज निगरानी प्लेटफॉर्म Kpler और Vortexa के आंकड़ों के मुताबिक दो टैंकरों में करीब 1.4 मिलियन बैरल कच्चा तेल है, जिसे इस सप्ताह भारतीय बंदरगाहों पर उतारा जा सकता है. ऊर्जा सुरक्षा को लेकर बढ़ी चिंता ईरान पर Israel और United States की सैन्य कार्रवाई के बाद वैश्विक तेल बाजारों में अस्थिरता बढ़ गई है और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखी जा रही है.

स्ट्रैट ऑफ हॉर्मूज पर अटैक से मुसीबत

वास्तविक आपूर्ति बाधित होने से पहले ही बाजार में कीमतें बढ़ने लगी हैं, क्योंकि निवेशकों को आशंका है कि रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण Strait of Hormuz प्रभावित हो सकता है. दुनिया में होने वाले कुल तेल व्यापार का लगभग 20 प्रतिशत इसी संकरे समुद्री मार्ग से गुजरता है, जो Iran, Oman और United Arab Emirates के बीच स्थित है. एक तेल टैंकर पर हमले और समुद्री यातायात में बाधा की खबरों ने बाजार की चिंता और बढ़ा दी है.

विशेषज्ञों का कहना है कि ऊर्जा बाजार में केवल व्यवधान की आशंका भी कीमतों को ऊपर ले जाने के लिए काफी होती है. तेल केवल एक सामान्य वस्तु नहीं बल्कि वैश्विक भू-राजनीति को प्रभावित करने वाला अहम संसाधन है. इतिहास में कई बार ऊर्जा आपूर्ति को दबाव के औजार के रूप में इस्तेमाल किया गया है, चाहे 1970 के दशक का तेल प्रतिबंध हो या 2022 में रूस द्वारा यूरोप को गैस आपूर्ति में कटौती. ईरान पर हमलों के बाद वैश्विक मानक Brent Crude की कीमत लगभग 76 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है, जो कुछ सप्ताह पहले करीब 68 डॉलर के आसपास थी.

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Satish Kumar Is A Journalist With Over 10 Years Of Experience In Digital Media. He Is Currently Working As Editor At Aman Shanti, Where He Covers A Wide Variety Of Technology News From Smartphone Launches To Telecom Updates. His Expertise Also Includes In-depth Gadget Reviews, Where He Blends Analysis With Hands-on Insights.