High Cholesterol: इस बीमारी में भी राहत देती है कोलेस्ट्रॉल की यह दवा, नई स्टडी में सामने आई चौंकाने वाली बात

aditisingh
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How PCSK9 Inhibitors Lower Cholesterol: कोलेस्ट्रॉल एक तरह का फैटी पदार्थ है जो हमारे खून में मौजूद रहता है. अक्सर लोग इसे सिर्फ नुकसानदायक मानते हैं, लेकिन सच्चाई यह है कि शरीर के लिए इसकी एक जरूरी भूमिका भी होती है. कोलेस्ट्रॉल सेल्स की बाहरी परत बनाने में मदद करता है और कई महत्वपूर्ण हार्मोन तथा विटामिन-डी के निर्माण में भी इसकी जरूरत पड़ती है. इसके अलावा शरीर इसका इस्तेमाल बाइल एसिड बनाने के लिए करता है, जो खाने में मौजूद फैट को पचाने में मदद करते हैं. समस्या तब शुरू होती है जब खून में कोलेस्ट्रॉल का स्तर जरूरत से ज्यादा बढ़ जाता है.

कोलेस्ट्रॉल का लेवल बढ़ने से क्या होता है नुकसान?

जब ब्लड में खराब कोलेस्ट्रॉल अधिक मात्रा में जमा हो जाता है, तो यह धीरे-धीरे ब्लड वेसल्स की अंदरूनी दीवारों पर चिपकने लगता है. समय के साथ यह जमा होकर एक मोटी और चिपचिपी परत बना लेता है, जिसे प्लाक कहा जाता है. इस प्रक्रिया को एथेरोस्क्लेरोसिस कहा जाता है. प्लाक बढ़ने ब्लड वेसल्स संकरी हो जाती हैं और ब्लड का फ्लो प्रभावित होने लगता है. गंभीर स्थिति में यह पूरी तरह ब्लॉकेज या खून के थक्के का कारण बन सकता है, जिससे हार्ट अटैक या स्ट्रोक जैसी जानलेवा स्थितियां पैदा हो सकती हैं.

क्यों दी जाती है दवा लेने की सलाह?

डॉक्टर अक्सर कोलेस्ट्रॉल कम करने के लिए दवाइयों की सलाह देते हैं. इन दवाओं का मकसद खून में हानिकारक कोलेस्ट्रॉल को कम करना और ब्लड बेसल्स में प्लाक बनने से रोकना होता है. सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाली दवाओं में स्टैटिन शामिल हैं. इसके अलावा हाल के वर्षों में एक नई दवा कैटेगरी PCSK9 inhibitors भी सामने आई है, जो उन लोगों के लिए दी जाती है जिनमें कोलेस्ट्रॉल का स्तर बहुत ज्यादा होता है या जिन्हें स्टैटिन से पर्याप्त फायदा नहीं मिलता,

क्या निकला रिसर्च में?

ऑस्ट्रेलिया की यूनिवर्सिटी ऑफ साउथ ऑस्ट्रेलिया के रिसर्चर ने हाल ही में एक स्टडी किया, जिसमें यह समझने की कोशिश की गई कि ये दवाएं शरीर पर किस तरह असर डालती हैं. रिसर्च में पाया गया कि स्टैटिन और PCSK9 inhibitors दोनों ही कोलेस्ट्रॉल को कम करने में काफी प्रभावी हैं और हार्ट की बीमारियों के खतरे को कम करने में मदद करते हैं.

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हालांकि रिसर्चर को कुछ दिलचस्प बातें भी पता चलीं. स्टैटिन लेने वाले कुछ लोगों में दिमाग के एक हिस्से, जिसे हिप्पोकैम्पस कहा जाता है, में हल्का बदलाव देखा गया. हिप्पोकैम्पस याद रखने और सीखने की क्षमता से जुड़ा हिस्सा होता है. कुछ मामलों में यह हिस्सा थोड़ा बड़ा पाया गया, जिससे संकेत मिलता है कि स्टैटिन का असर ब्रेन वाले पर भी पड़ सकता है. हालांकि इस संबंध को पूरी तरह समझने के लिए अभी और रिसर्च की जरूरत है.

वजन और शरीर में फैट की मात्रा बढ़ सकती है

स्टडी में यह भी देखा गया कि कुछ लोगों में स्टैटिन लेने के बाद वजन और शरीर में फैट की मात्रा बढ़ सकती है. इसके अलावा कुछ पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन हार्मोन का स्तर थोड़ा कम पाया गया. टेस्टोस्टेरोन ऊर्जा, मांसपेशियों की ताकत और मूड से जुड़ा महत्वपूर्ण हार्मोन है, इसलिए इसके स्तर में बदलाव को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. वहीं PCSK9 inhibitors से जुड़े स्टडी में फेफड़ों के कामकाज से संबंधित कुछ बदलावों के संकेत भी मिले. हालांकि वैज्ञानिकों का कहना है कि अभी यह साफ नहीं है कि ये दवाएं सीधे तौर पर इन बदलावों की वजह हैं या नहीं, इसलिए इस पर और रिसर्च की जरूरत है.

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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Satish Kumar Is A Journalist With Over 10 Years Of Experience In Digital Media. He Is Currently Working As Editor At Aman Shanti, Where He Covers A Wide Variety Of Technology News From Smartphone Launches To Telecom Updates. His Expertise Also Includes In-depth Gadget Reviews, Where He Blends Analysis With Hands-on Insights.