माना जाता है कि ये दोष सामंजस्य को बिगाड़ते हैं, जिसकी वजह से स्वास्थ्य, रिश्ते, करियर और आर्थिक जैसे क्षेत्रों में चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है.
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ग्रहों के अलग-अलग तरह के दोषों को समझना और उनके असर को कम करने के तरीके जानना व्यक्तियों को बाधाओं से दूर करने के साथ संतुष्टपूर्ण जीवन जीने में मदद कर सकता है.
ग्रहीय दोष क्या होता है?
कुंडली में राहु, केतु, शनि, मंगल या अन्य ग्रहों की खास स्थिति या संयोजन होने पर ग्रहीय दोष उत्पन्न होते हैं. ये दोष असंतुलन पैदा करते हैं, जो व्यक्ति के मानसिक, भावनात्मक और शारीरिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकते हैं.
ग्रहों के दोषों के प्रकार
मंगल दोष तब लगता है , जब कुंडली में मंगल चौथे, सातवें, आठवें या बारहवें भाव में स्थित होता है.
प्रभाव- इससे वैवाहिक जीवन में चुनौतियों उत्पन्न होने के साथ गलतफहमियां दूर होती हैं. इससे आर्थिक स्थिरता भी आ सकती है.
उपाय
- मंगल शांति पाठ करें.
- नियमित रूप से हनुमान चालीसा का पाठ करना चाहिए.
- दोष को बेअसर करने के लिए किसी अन्य मांगलिक से शादी करें.
शनि दोष
शनि दोष तब लगता है, जब व्यक्ति पर उनके अशुभ प्रभाव हो. खासकर साढ़ेसाती या ढैय्या की अवधि के दौरान.
प्रभाव- शनि दोष के कारण रिश्तों में तनाव और स्वास्थ्य में समस्या आ सकती हैं.
उपाय
- शनिवार के दिन शनि मंदिर में काले तिल या सरसों का तेल अर्पण करें.
- शनि मंत्र “ओम शं शनिचराय नमः” का जाप करें.
राहु-केतु दोष
राहु-केतु दोष तब लगता है जब कुंडली में राहु और केतु प्रतिकूल स्थिति में हो या अशुभ ग्रह के साथ युति में हों.
प्रभाव- राहु-केतु दोष के कारण भ्रम, नुकसान, मानसिक तनाव और व्यक्तिगत विकास में चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है.
उपाय
- राहु-केतु शांति पूजा कराए.
- ज्योतिषी से परामर्श लेने के बाद गोमेद या केतु के लिए कैट्स आई जैसे रत्न पहनें.
नियमित रूप से राहु-केतु से जुड़े मंत्रों का जाप करें.
काल सर्प दोष
काल सर्प दोष तब लगता है, जब जन्म कुंडली में सभी ग्रह रागु-केतु के बीच में स्थिति हो.
प्रभाव- काल सर्प दोष के कारण जीवन में देरी, संघर्ष और बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है.
उपाय
- त्र्यंबकेश्वर या अन्य पवित्र मंदिरों में काल सर्प दोष निवारण की पूजा करें.
- भगवान शिव की पूजा करने के साथ शिवलिंग पर दूध अर्पित करें.
- रोजाना महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें.
पितृ दोष
यह पूर्वजों के उन कर्मों की वजह से होता है, जिसका निपटारा नहीं हुआ है.
प्रभाव- इससे करियर, वित्तीय और पारिवारिक संबंधों में समस्या का सामना करना पड़ सकता है.
उपाय
- पितृ पक्ष के दौरान पितृ दोष पूजा या श्राद्ध का अनुष्ठान करें.
- ब्राह्मणों को भोजन कराने के साथ पूर्वजों के नाम पर जरूरतमंदों को भोजन कराए.
- ओम नमो भगवते वासुदेवाय मंत्रों का जाप करें.
गुरु चांडाल दोष
यह तब होता है, जब कुंडली में बृहस्पति (गुरु) राहु या केतु के साथ युति में होता है.
प्रभाव- इससे बुद्धि क्षय होने के साथ आर्थिक अस्थिरता और फैसले लेने में मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है.
उपाय
- गुरुवार को भगवान विष्णु की पूजा करने के साथ उन्हें पीले फूल अर्पण करें.
- पीले कपड़े, हल्दी या केले का दान करें.
- गुरु मंत्र “ॐ बृं बृहस्पतये नमः” का जाप करें.
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