हरियाणा के करनाल के रहने वाले लवकेश ने इतिहास रच दिया है. यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा में उन्होंने 488वीं रैंक हासिल कर न सिर्फ अपने माता-पिता बल्कि अपने गांव का नाम भी रोशन किया. मुनक गांव के रहने वाले लवकेश की कहानी किसी प्रतियोगी को प्रभावित करेगी. उन्होंने दिखा दिया कि अगर उपलब्ध संसाधनों का सही इस्तेमाल और संघर्ष को ताकत बना लिया जाए तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं है.
बता दें, लवकेश एक बेहद साधारण व गरीब परिवार से आते हैं. लवकेश के पिता के दिल में छेद है, इसके बावजूद वह अपने बेटे के सपनों को पूरा करने के लिए छोटी सी दुकान चलाते हैं. वहीं लवकेश की मां अक्सर बीमार रहती हैं. लवकेश की कहानी संघर्षों से भरी हुई है. वह जिस घर में रहते हैं, उसमें पलस्तर तक नहीं हुआ है. घर चलाने का एक मात्र जरिया पिता की छोटी सी दुकान है, जिस पर खुद कभी लवकेश तो कभी उनकी बहनें बैठती हैं. लवकेश दुकान संभालने के साथ-साथ वहीं बैठकर अपनी पढ़ाई भी करते थे.
तीन बार चूके लेकिन नहीं मानी हार
लवकेश ने यह परीक्षा अपने चौथे अटेम्पट में पास की है. इससे पहले वह तीन बार इस परीक्षा में शामिल हुए, लेकिन तीनों बार उनका सेलेक्शन नहीं हुआ. इसके बावजूद लवकेश टूटे नहीं, उन्होंने अपनी गलतियों से सीखा और हर बार और ज्यादा मेहनत की. लवकेश बताते हैं कि अपने छोटे से कमरे में बैठकर उन्होंने पढ़ाई की, जिन दीवारों पर पलस्तर नहीं उस पर उन्होंने अपने लक्ष्य को लिखा, अपने विषय से जुड़ी चीजों को लिखा ताकि उन्हें हमेशा अपना लक्ष्य नजर आता रहे.
पढ़ाई के लिए ब्याज पर लिए
लवकेश के परिवार की माली हालत ठीक नहीं थी तो पिता ने लोन लेकर बेटे को पढ़ाया और उसी से घर का भी गुजारा किया. लवकेश को सिविल सेवा का पेपर दिलवाने के लिए भी फाइनेंस पर पैसे लिए पर कभी अपने बेटे को यह नहीं कहा कि तुम पढ़ना बंद कर दो, वो हमेशा अपने बेटे को आगे बढ़ाते रहे क्योंकि उन्हें अपने बेटे पर विश्वास था. लवकेश की मां बताती हैं कि मैं चाहती थी मेरा बेटा अफसर बने और उसने मेहनत की, उसकी सफलता रंग लाई.
कविताएं लिखने का है शौक
लवकेश को कविता लिखने का शौक है. वह कहते हैं कि आप संघर्ष कर रहे हैं तो करते रहें, रुके ना, आपकी जिंदगी में अच्छा जरूर होगा. लवकेश IAS बनना चाहते हैं. उनकी रैंक 488 आई है, लेकिन अभी भी वो पढ़ाई जारी रखेंगे और कोशिश रहेगी कि दोबारा एग्जाम देकर IAS बना जाए.
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