नाखून बता सकते हैं सेहत का राज: आयरन की कमी से लेकर फेफड़ों की बीमारी तक देते हैं ये संकेत

aditisingh
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हाथ और नाखून न सिर्फ हमारी पर्सनैलिटी और मैनर्स  का प्रतीक हैं, बल्कि हमारे स्वास्थ्य के बारे में भी कई अहम बातें बताते हैं.अक्सर लोग नाखूनों को सिर्फ सुंदरता के लिए देखते हैं, लेकिन विशेषज्ञ कहते हैं कि नाखून शरीर की अंदरूनी स्थिति के संकेत देने वाले छोटे मेसेंजर होते हैं. नाखून लगभग 3 मिलीमीटर प्रति माह की धीमी दर से बढ़ते हैं. इस धीमी वृद्धि के कारण, नाखून समय के साथ शरीर में हो रहे सूक्ष्म बदलावों को रिकॉर्ड करते हैं. अगर नाखूनों का रंग, आकार, मोटाई या बनावट बदलती है, तो यह कभी-कभी किसी स्वास्थ्य समस्या का संकेत भी हो सकता है.

नाखूनों पर ध्यान क्यों जरूरी है?

स्किन विशेषज्ञ बताते हैं कि नाखूनों में होने वाले बदलावों को नजरअंदाज करना सही नहीं है. उनके अनुसार, नाखूनों का रंग, बनावट और आकार कई बार शरीर की गंभीर बीमारियों के संकेत दे सकते हैं. जैसे पीले या चम्मच जैसे नाखून आयरन की कमी से होने वाले एनीमिया का संकेत हो सकते हैं, पीले और मोटे नाखून  फंगल संक्रमण या फेफड़ों से जुड़ी समस्याओं की ओर इशारा कर सकते हैं. नाखूनों पर गहरे धब्बे या रंग बदलना  कुछ मामलों में यह स्किन कैंसर जैसे गंभीर रोग का संकेत भी हो सकता है. अमेरिकी राष्ट्रीय स्वास्थ्य संस्थान (NIH) के अनुसार, नाखूनों में बदलाव पोषण की कमी,  हार्ट डिजीज, फेफड़ों की बीमारियां और मेटाबॉलिक से जुड़ी स्थितियों को दर्शा सकते हैं. 

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आयरन की कमी से लेकर फेफड़ों की बीमारी तक देते हैं ये संकेत

1. आयरन की कमी का संकेत – आयरन शरीर में ऑक्सीजन पहुंचाने में मदद करता है. जब आयरन की कमी होती है, तो शरीर एनर्जी बचाने लगता है. नाखून जो केराटिन से बने होते हैं और अच्छे ब्लड फ्लो पर निर्भर करते हैं, वे सबसे पहले इस कमी का संकेत दिखाते हैं. आयरन की कमी के कारण नाखून पीले रंग के हो सकते हैं, पतले या कमजोर हो सकते हैं, कभी-कभी अंदर की ओर मुड़कर चम्मच जैसा आकार ले सकते हैं. आयरन की कमी पूरी करने से नाखून धीरे-धीरे सामान्य आकार और मजबूती में लौट आते हैं. 

2. फेफड़ों और संक्रमण से जुड़े संकेत – नाखून का पीला और मोटा होना अक्सर फंगल संक्रमण की ओर इशारा करता है. अगर पीले नाखून लंबे समय तक रहते हैं और सांस लेने में समस्या या सूजन भी हो, तो यह येलो नेल सिंड्रोम जैसी दुर्लभ स्थिति की ओर संकेत कर सकता है.  येलो नेल सिंड्रोम फेफड़ों की पुरानी समस्याओं जैसे ब्रोंकिएक्टेसिस या प्लूरल रोग से जुड़ा हो सकता है. इसका मतलब यह नहीं कि हर पीला नाखून फेफड़ों की बीमारी का संकेत है, लेकिन लगातार बदलाव होने पर डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है. 

3.  नाखून पर गहरे धब्बे या रंग बदलना – कभी-कभी नाखून पर दिखाई देने वाली पतली या गहरी रेखाएं हानिरहित होती हैं, लेकिन कुछ रेखाएं मेलानोन किया या नाखून के नीचे के कैंसर (subungual melanoma) का संकेत भी हो सकती हैं.

4. नाखून का आकार बदलना – नाखूनों का गोल या गुंबद जैसा आकार लेना (क्लबिंग) अक्सर लंबे समय तक रक्त में ऑक्सीजन की कमी का संकेत देता है. यह जन्मजात हार्ट डिजीज, क्रॉनिक फेफड़ों की बीमारियों या सूजन आंत्र रोग से जुड़ा हो सकता है. 

5. कमजोर या धारीदार नाखून – नाखूनों पर खड़ी धारियां, कमजोरी या आसानी से टूटना अक्सर पोषण की कमी, थायराइड विकार या लंबे समय के तनाव का संकेत दे सकते हैं. बायोटिन, जिंक, आयरन और प्रोटीन की कमी से नाखून कमजोर हो सकते हैं. 

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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Satish Kumar Is A Journalist With Over 10 Years Of Experience In Digital Media. He Is Currently Working As Editor At Aman Shanti, Where He Covers A Wide Variety Of Technology News From Smartphone Launches To Telecom Updates. His Expertise Also Includes In-depth Gadget Reviews, Where He Blends Analysis With Hands-on Insights.