पेट्रोल-डीजल की नो टेंशन! इलेक्ट्रिक मिनी ट्रक से हर महीने बचेंगे हजारों, गणित समझ लीजिए

aditisingh
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भारत में छोटे व्यापारियों के लिए कमर्शियल इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) सबसे बेहतर विकल्प बन चुके हैं. खासकर छोटा हाथी यानी टाटा ऐस जैसे पिकअप के इलेक्ट्रिक वर्जन छोटे व्यापारियों, डिलीवरी सर्विस करने वालों और लास्ट-माइल लॉजिस्टिक्स में काम करने वालों के लिए गेम-चेंजर साबित हो रहे हैं.

पारंपरिक डीजल या पेट्रोल पिकअप की जगह इन EV का इस्तेमाल करके डिलीवरी खर्च को आधा या उससे भी कम किया जा सकता है. ये बदलाव न सिर्फ आर्थिक रूप से फायदेमंद है, बल्कि पर्यावरण के लिए भी बेहद जरूरी है. अगर आप आने वाले दिनों में एक पिकअप ट्रिक खरीदने का प्लान कर रहे हैं, तो जान लीजिए कि डीजल/पेट्रोल की जगह EV पिकअप खरीदना कितने फायदे का सौदा रहेगा?

‘छोटा हाथी’ का इलेक्ट्रिक अवतार

टाटा मोटर्स का टाटा ऐस भारत का सबसे पॉपुलर मिनी-ट्रक या पिकअप है, जिसे लोग छोटा हाथी भी कहते हैं. दशकों से ये ग्रामीण, शहरी और सेमी-अर्बन इलाकों में छोटे व्यापारियों का भरोसेमंद साथी रहा है. अब टाटा ने इसको इलेक्ट्रिक रूप में पेश किया है. ये वाहन 1000 किलो तक पेलोड उठा सकते हैं, सिंगल चार्ज में 150-200 किमी तक चल सकते हैं और लास्ट-माइल डिलीवरी के लिए बिल्कुल परफेक्ट हैं.

ये EV मॉडल कमर्शियल कैटेगरी में भारत का पहला फो-व्हीलर इलेक्ट्रिक कार्गो वाहन है. इसमें 21-30 kW की मोटर, 130 Nm टॉर्क और कम मेंटेनेंस की वजह से यह पारंपरिक डीजल पिकअप से काफी अलग है. छोटे व्यापारी जैसे किराना दुकानदार, सब्जी/फल विक्रेता, ई-कॉमर्स डिलीवरी पार्टनर, दूध सप्लायर, फास्ट फूड चेन और लोकल लॉजिस्टिक्स वाले अब इसे अपनाने लगे हैं.

डिलीवरी खर्च आधा कैसे होता है?

पारंपरिक डीजल पिकअप (जैसे पुराना ऐस या अन्य मिनी ट्रक) में बड़ा खर्च ईंधन पर आता है. डीजल की कीमत ₹90-100 प्रति लीटर के आसपास है और औसतन 15-20 किमी/लीटर माइलेज मिलता है. एक छोटा व्यापारी रोजाना 80-100 किमी चलाता है तो महीने में ईंधन पर 15,000-25,000 रुपये खर्च हो जाते हैं.

दूसरी ओर, इलेक्ट्रिक व्हीकल में चार्जिंग का खर्च बहुत कम है. घरेलू या कमर्शियल चार्जिंग पर बिजली ₹6-10 प्रति यूनिट मिलती है. टाटा ऐस EV जैसे वाहन में प्रति किमी खर्च मात्र ₹1-2 रह जाता है. यानी रोजाना 100 किमी चलाने पर सिर्फ 100-200 रुपये का चार्जिंग खर्च आएगा. महीने में ये 3,000-6,000 रुपये तक सिमट जाता है.

इसके अलावा अन्य भी कई फायदे हैं. इसमें कोई इंजन ऑयल, फिल्टर, क्लच, गियरबॉक्स की समस्या नहीं है. EV में मूविंग पार्ट्स 70-80% कम होते हैं, इसलिए सर्विसिंग खर्च आधे से भी कम है. टायर, ब्रेक आदि पर भी कम वियर एंड टियर जाता है. कुल मिलाकर ऑपरेटिंग कॉस्ट (फ्यूल + मेंटेनेंस) में 50-70% तक की बचत हो सकती है.

छोटे व्यापारियों के लिए फायदे

फ्लीट ऑफरेटर्स के साथ-साथ ईवी पिकअप ने सबसे ज्यादा छोटे व्यापारियों को फायदा पहुंचाया है. खरीदते समय ये थोड़े महंगे जरूर लगते हैं, लेकिन 3-5 साल में दी गई अपफ्रंट कीमत को आराम से अदा किया जा सकता है. फायदों को अलग-अलग प्वाइंट्स में समझते हैं.

  1. कम कुल खर्च (TCO): 5-7 साल में EV की बचत से निवेश रिकवर हो जाता है.
  2. पर्यावरण संरक्षण: जीरो एमिशन से शहरों की हवा साफ होती है, प्रदूषण कम होता है.
  3. सरकारी सहायता: FAME योजना, सब्सिडी, रोड टैक्स में छूट और कम ब्याज दर वाले लोन उपलब्ध हैं.
  4. जीरो नॉइज: शोर कम होने से रेसिडेंशियल एरिया में डिलीवरी आसान है.
  5. बेहतर परफॉर्मेंस: इंस्टेंट टॉर्क से शहर की ट्रैफिक में तेज एक्सीलरेशन मिलता है.

चुनौतियां क्या हैं?

कमर्शियल EV के लिए चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर अभी सीमित है, लेकिन घर पर रात में चार्जिंग और बढ़ते पब्लिक चार्जर से समस्या कम हो रही है. आने वाले समय में बैटरी कीमतें और कम हो जाएंगी, जिससे EV की कीमत और आकर्षक होने वाली है. मार्केट में फिलहाल Tata और Mahindra दो बड़े प्लेयर हैं, जो इलेक्ट्रिक पिकअप सेल कर रहे हैं.



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Satish Kumar Is A Journalist With Over 10 Years Of Experience In Digital Media. He Is Currently Working As Editor At Aman Shanti, Where He Covers A Wide Variety Of Technology News From Smartphone Launches To Telecom Updates. His Expertise Also Includes In-depth Gadget Reviews, Where He Blends Analysis With Hands-on Insights.