नया फोन खरीदना पड़ेगा महंगा! इस वजह से बढ़ेगी कीमत, RAM भी हो जाएगी कम

aditisingh
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Smartphone Price Hike: आजकल नया स्मार्टफोन खरीदना पहले की तुलना में महंगा पड़ सकता है. इसकी बड़ी वजह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी तकनीक को माना जा रहा है. AI के तेजी से बढ़ते इस्तेमाल के कारण चिप और मेमोरी जैसे जरूरी कंपोनेंट्स की कीमतें काफी बढ़ गई हैं. यही कारण है कि कई बड़ी टेक कंपनियां अपने नए डिवाइस पुराने मॉडल से थोड़े ज्यादा दाम पर लॉन्च कर रही हैं.

मेमोरी महंगी होने से बढ़ा दबाव

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, टेक इंडस्ट्री के विशेषज्ञों का मानना है कि पिछले कुछ महीनों में मेमोरी चिप्स की कीमतों में भारी उछाल आया है. कुछ मामलों में इनकी कीमत 200 से 300 प्रतिशत तक बढ़ चुकी है. स्मार्टफोन कंपनियां खासकर मिड-रेंज और बजट सेगमेंट में बहुत कम मुनाफे पर काम करती हैं. ऐसे में जब कंपोनेंट महंगे हो जाते हैं तो कंपनियों के पास कीमत बढ़ाने के अलावा ज्यादा विकल्प नहीं बचता.

AI को चाहिए ज्यादा ताकतवर चिप्स

AI तकनीक को चलाने के लिए बेहद शक्तिशाली सर्वर और बड़ी मात्रा में मेमोरी की जरूरत होती है. दुनिया की कई बड़ी AI कंपनियां अपने डेटा सेंटर के लिए भारी मात्रा में मेमोरी चिप्स खरीद रही हैं. यही चिप्स स्मार्टफोन और लैपटॉप में भी इस्तेमाल होते हैं.

RAM को किसी भी कंप्यूटिंग डिवाइस की शॉर्ट-टर्म मेमोरी माना जाता है जिसकी मदद से एक साथ कई ऐप्स चल पाते हैं. स्मार्टफोन, टैबलेट, लैपटॉप से लेकर कार के इंफोटेनमेंट सिस्टम तक लगभग हर डिजिटल डिवाइस में RAM का इस्तेमाल होता है. लेकिन AI सर्वर को साधारण डिवाइस की तुलना में कहीं ज्यादा हाई-स्पीड मेमोरी चाहिए होती है जिससे मांग अचानक बढ़ गई है.

सीमित कंपनियां बनाती हैं RAM

दुनिया में RAM बनाने वाली कंपनियां बहुत कम हैं. मुख्य रूप से सैमसंग, एसके हाइनिक्स और माइक्रोन ही इस बाजार पर कब्जा किए हुए हैं. जब AI कंपनियां बड़ी मात्रा में मेमोरी खरीदने लगती हैं तो बाकी इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियों के लिए सप्लाई कम पड़ जाती है. ऐसे में कीमतें तेजी से ऊपर चली जाती हैं.

स्मार्टफोन कंपनियों पर बढ़ा असर

RAM की कमी का असर लगभग सभी फोन ब्रांड्स पर पड़ रहा है हालांकि बड़ी कंपनियां इस दबाव को कुछ हद तक संभाल सकती हैं. प्रीमियम सेगमेंट में काम करने वाली कंपनियों के पास ज्यादा मुनाफा और मजबूत सप्लाई चेन होती है. लेकिन छोटे ब्रांड या कम कीमत वाले फोन बनाने वाली कंपनियों के लिए यह स्थिति ज्यादा मुश्किल बन जाती है.

हाल ही में कई कंपनियों ने अपने नए स्मार्टफोन की कीमतें बढ़ाई हैं. मिड-रेंज सेगमेंट में भी नए मॉडल पुराने फोन की तुलना में महंगे देखने को मिल रहे हैं. इससे साफ संकेत मिलता है कि मेमोरी की बढ़ती कीमतें पूरे बाजार को प्रभावित कर रही हैं.

सबसे ज्यादा असर मिड-रेंज और बजट फोन पर

भारत में 20 हजार से 50 हजार रुपये के बीच आने वाले फोन सबसे ज्यादा बिकते हैं. लेकिन यही सेगमेंट इस समय सबसे ज्यादा दबाव में है. बजट स्मार्टफोन बनाने वाली कंपनियों को या तो कीमत बढ़ानी पड़ सकती है या फिर फीचर्स में कटौती करनी पड़ सकती है. कुछ मामलों में कंपनियां RAM कम देकर या पुराने प्रोसेसर का इस्तेमाल करके कीमत नियंत्रित रखने की कोशिश कर सकती हैं.

भविष्य में क्या होगा

विशेषज्ञों का मानना है कि मेमोरी की कमी जल्दी खत्म होने वाली नहीं है. नई चिप फैक्ट्री तैयार होने में दो से तीन साल तक का समय लग जाता है. इसलिए RAM की कीमतें आने वाले समय में भी ऊंची रह सकती हैं. ऐसे में संभव है कि आने वाले वर्षों में स्मार्टफोन और लैपटॉप दोनों ही महंगे होते जाएं. AI तकनीक जितनी तेजी से आगे बढ़ेगी उतना ही ज्यादा दबाव हार्डवेयर पर भी देखने को मिल सकता है.

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Satish Kumar Is A Journalist With Over 10 Years Of Experience In Digital Media. He Is Currently Working As Editor At Aman Shanti, Where He Covers A Wide Variety Of Technology News From Smartphone Launches To Telecom Updates. His Expertise Also Includes In-depth Gadget Reviews, Where He Blends Analysis With Hands-on Insights.