Zero Dep Car Insurance: क्या सच में क्लेम में जेब से एक भी रुपया नहीं लगता? जानें नियम और फायदे

गाड़ी का बीमा रिन्यू करते समय जीरो डेप्रिसिएशन (Zero Dep) पॉलिसी लेना आजकल बहुत से कार मालिकों के लिए एक स्मार्ट फैसला साबित हो रहा है. खासकर नई या 5 साल से कम पुरानी गाड़ियों के मालिकों के लिए ये ऐड-ऑन कवर बेहद फायदेमंद होता है. लेकिन कई लोग इसे गलत समझते हैं और सोचते हैं कि इससे एक्सीडेंट होने पर जेब से एक भी रुपया नहीं लगेगा.

हालांकि, सच्चाई कुछ और ही है. अगर आपके पास नई कार है और आप उसके लिए जीरो डेप वाला बीमा खरीदने का प्लान कर रहे हैं, तो हमारा ये लेख आपके काम का है. आइए विस्तार से समझते हैं कि जीरो डेप क्या है, इसके क्या फायदे हैं और एक्सीडेंट क्लेम में जेब से खर्च न लगने का असली नियम क्या है?

जीरो डेप्रिसिएशन कवर क्या है?

जीरो डेप्रिसिएशन (निल डेप्रिसिएशन/बंपर टू बंपर कवर) कार बीमा की कॉम्प्रिहेंसिव पॉलिसी में एक वैकल्पिक ऐड-ऑन कवर होता है. सामान्य बीमा पॉलिसी में जब एक्सीडेंट या नुकसान होता है, तो बीमा कंपनी क्लेम सेटल करते समय गाड़ी के पार्ट्स (जैसे प्लास्टिक बंपर, फाइबर बॉडी पार्ट्स, रबर के हिस्से, हेडलाइट्स, ग्लास आदि) की डेप्रिसिएशन वैल्यू काट लेती हैं.

डेप्रिसिएशन का मतलब है कि गाड़ी जितनी पुरानी होती जाती है, उसके पार्ट्स की वैल्यू उतनी ही कम होती जाती है. उदाहरण के लिए-

  1. नई गाड़ी में प्लास्टिक पार्ट्स पर 0-5% डेप्रिसिएशन.
  2. 2-3 साल पुरानी गाड़ी में 30-50% तक.
  3. 5 साल से ज्यादा में 50% या अधिक.

इस वजह से क्लेम अमाउंट कम हो जाता है और मालिक को जेब से अतिरिक्त पैसे देने पड़ते हैं. जीरो डेप कवर इसी डेप्रिसिएशन की कटौती को खत्म कर देता है. यानी बीमा कंपनी पार्ट्स की पूरी मार्केट वैल्यू (बिना कटौती के) का भुगतान करती है. आइए जीरो डिप वाले इंश्योरेंस के फायदे जानते हैं.

1. क्लेम में ज्यादा राशि मिलती है

एक्सीडेंट में अगर बंपर, डोर, हेडलाइट या विंडशील्ड बदलनी पड़े, तो सामान्य पॉलिसी में 30-50% कटौती हो सकती है. जीरो डेप में पूरी रकम मिलती है, जिससे हजारों से लाखों रुपये तक बचत हो सकती है. खासकर लग्जरी या महंगी कारों में ये बहुत बड़ा फायदा देता है.

2. जेब से खर्च कम होता है

डेप्रिसिएशन कटौती न होने से आउट-ऑफ-पॉकेट एक्सपेंस काफी कम हो जाता है. कई मामलों में सिर्फ कंपल्सरी डिडक्टिबल (जो 1000-2000 रुपये तक होता है) ही देना पड़ता है.

3. नई गाड़ियों के लिए परफेक्ट

ज्यादातर बीमा कंपनियां ये कवर 5 साल तक की गाड़ियों पर ही देती हैं. हालांकि, कुछ में 7-10 साल तक भी है. नई कार में पार्ट्स महंगे होते हैं, इसलिए ये कवर प्रीमियम के मुकाबले कई गुना फायदेमंद साबित होता है.

4. प्लास्टिक, रबर, फाइबर पार्ट्स की पूरी सुरक्षा

ये पार्ट्स सबसे ज्यादा डेप्रिसिएट होते हैं और जीरो डेप इन्हें पूरी तरह कवर करता है.

5. मानसिक सुकून

शहरों में ट्रैफिक ज्यादा है, छोटे-मोटे स्क्रैच या एक्सीडेंट आम हैं. जीरो डेप से क्लेम प्रोसेस आसान और कम खर्चीला हो जाता है.

जेब से एक भी रुपया न लगने का नियम: सच्चाई क्या है?

बहुत से लोग गलतफहमी में रहते हैं कि जीरो डेप लेने से 100% सब कुछ फ्री हो जाता है और जेब से एक भी रुपया नहीं लगेगा. लेकिन ये पूरी तरह सच नहीं है. जीरो डेप सिर्फ डेप्रिसिएशन कटौती को हटाता है, लेकिन कुछ खर्च अभी भी आपको देने पड़ सकते हैं. आइए, इन पर एक नज़र डालते हैं.

  • कंपल्सरी डिडक्टिबल: हर पॉलिसी में ये तय होता है, जो कार की वैल्यू के आधार पर 1000-5000 रुपये तक हो सकता है. ये अमाउंट बीमा कंपनी नहीं देती, आपको देना पड़ता है.
  • वॉलंटरी डिडक्टिबल: अगर आपने पॉलिसी में अतिरिक्त डिडक्टिबल चुना है, तो वह भी जेब से जाता है.
  • कंज्यूमेबल आइटम्स: ऑयल, ब्रेक फ्लूइड, गैस्केट, नट-बोल्ट जैसे आइटम आमतौर पर कवर नहीं होते, जब तक अलग से कंज्यूमेबल कवर न लिया हो.
  • टायर, बैटरी, इंजन पार्ट्स: ये अलग से कवर नहीं होते. इसके लिए आपको इंजन प्रोटेक्शन कवर अलग ऐड-ऑन कराना होगा.
  • नॉन-एक्सीडेंटल डैमेज: वियर एंड टियर या सामान्य घिसावट(स्क्रैच) इसमें कवर नहीं होती है.
  • थर्ड पार्टी क्लेम: अगर आपकी गलती से किसी और को नुकसान हुआ, तो थर्ड पार्टी लायबिलिटी अलग से कवर होती है. ऐसे में जीरो डेप काम नहीं आएगा.

उदाहरण: मान लीजिए एक्सीडेंट में 50,000 रुपये का बिल आया. सामान्य पॉलिसी में 20,000 रुपये डेप्रिसिएशन कटौती हो सकती है, तो कंपनी 30,000 देगी और आपको 20,000 से ज्यादा डिडक्टिबल देना पड़ेगा. जीरो डेप में कंपनी पूरे 50,000 (डिडक्टिबल घटाकर) देगी, यानी आपका खर्च सिर्फ डिडक्टिबल तक सीमित रहेगा.

इसलिए सही कहें तो जीरो डेप से जेब से बहुत कम खर्च हो सकता है, लेकिन पूरी तरह शून्य नहीं होता. अगर आप कंज्यूमेबल कवर, रोडसाइड असिस्टेंस आदि अन्य ऐड-ऑन भी ले लें, तो खर्च और भी कम हो सकता है, लेकिन इंश्योरेंस का प्रीमियम काफी बढ़ जाएगा.

हमारी सलाह: गाड़ी का बीमा रिन्यू करते समय जीरो डेप्रिसिएशन कवर जरूर चुनें. खासकर अगर आपकी गाड़ी नई है, शहर में ज्यादा चलती है या महंगी है, तो ये ज्यादा जरूरी हो जाता है. इसका प्रीमियम थोड़ा ज्यादा (लगभग 20-30% अतिरिक्त) लगता है, लेकिन एक बार क्लेम आने पर ये कई गुना बचत करा देता है. हमेशा पॉलिसी डॉक्यूमेंट अच्छे से पढ़ें और बीमा कंपनी से स्पष्ट पूछें कि क्या-क्या कवर है और क्या नहीं.