Normal Petrol vs XP95: भारत में पेट्रोल पंप पर दो मुख्य प्रकार के पेट्रोल मिलते हैं. इसमें नॉर्मल (रेगुलर) पेट्रोल और प्रीमियम (हाई-ऑक्टेन या ब्रांडेड) पेट्रोल शामिल है. प्रीमियम पेट्रोल को अक्सर एक्सपी95, पावर या स्पीड आदि नामों से जाना जाता है. अगर नॉर्मल और इस तरह के पेट्रोल की बात करें, तो इन दोनों में मुख्य अंतर ऑक्टेन रेटिंग (Octane Number) का होता है.
नॉर्मल पेट्रोल की ऑक्टेन रेटिंग आमतौर पर 91 RON के आसपास होती है. E20 ब्लेंड के साथ अब यह लगभग 95 तक पहुंच जाती है. वहीं, प्रीमियम पेट्रोल में ये 95 से 100 RON तक होती है. ऑक्टेन नंबर जितना ज्यादा होता है, पेट्रोल उतना ही बेहतर तरीके से हाई प्रेशर और तापमान में बर्न होता है, जिससे इंजन नॉकिंग (knocking) की समस्या कम होती है.
नॉर्मल से महंगा क्यों है प्रीमियम पेट्रोल?
प्रीमियम पेट्रोल में अतिरिक्त एडिटिव्स (additives) और डिटर्जेंट्स भी मिलाए जाते हैं, जो इंजन को साफ रखते हैं, कार्बन डिपॉजिट कम करते हैं और लंबे समय में बेहतर परफॉर्मेंस देते हैं. ये एडिटिव्स उत्पादन लागत बढ़ाते हैं. इसलिए प्रीमियम पेट्रोल नॉर्मल से 10-60 रुपये प्रति लीटर तक महंगा होता है.
हालांकि, प्रीमियम फ्यूल गाड़ी के नॉर्मल इंजन को नुकसान पहुंचा सकता है और परफॉर्मेंस भी घटा सकता है. सामान्य कारों या बाइक्स में प्रीमियम पेट्रोल डालने से ज्यादा फायदा नहीं मिलता, क्योंकि उनका इंजन 91 RON के लिए ही ट्यून होता है.
प्रीमियम पेट्रोल की कीमत क्यों बढ़ी?
20 मार्च 2026 को तेल विपणन कंपनियों (IOCL, HPCL, BPCL) ने प्रीमियम पेट्रोल (XP95, Power, Speed) की कीमतों में 2 से 2.35 रुपये प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी कर दी. ये बढ़ोतरी तुरंत प्रभाव से लागू हुई, जबकि नॉर्मल पेट्रोल के दाम अभी भी स्थिर हैं. इसका सबसे बड़ा कारण है कि प्रीमियम फ्यूल में किसी भी तरह की ब्लेंडिंग नहीं होती है. वहीं, नॉर्मल पेट्रोल को 20 प्रतिशत इथेनॉल मिलाकर बेचा जा रहा है.
प्रीमियम पेट्रोल की उत्पादन और रिफाइनिंग लागत ज्यादा होने से कंपनियां इसे पहले प्रभावित करती हैं, जबकि आम उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए नॉर्मल पेट्रोल के दाम नहीं बढ़ाए गए हैं. एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर कच्चा तेल $130 तक पहुंचा तो नॉर्मल पेट्रोल-डीजल भी महंगा हो सकता है, लेकिन फिलहाल सरकार और OMCs ने आम जनता को शॉक से बचाने की कोशिश की है.