EV को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकारें लगातार नई नीतियों पर काम कर रही हैं. हाल ही में सामने आई एक रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली सरकार ऑटोमोबाइल कंपनियों से ये कह सकती है कि वे अपने वाहन शोरूम पर EV चार्जिंग स्टेशन इंस्टॉल करें. हालांकि, अभी ये प्रस्तावित नीति है और इसे लेकर अंतिम फैसला आना बाकी है, लेकिन अगर ये लागू होती है तो EV सेक्टर में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा.
इस नई पॉलिसी को संभावित रूप से 24 मार्च 2026 को बजट सत्र के दौरान घोषित किया जा सकता है. इस प्रस्तावित दिल्ली इलेक्ट्रिक वाहन नीति के तहत शहर में संचालित सभी वाहन निर्माताओं (OEMs) से कहा जाएगा कि वे अपने प्रत्येक डीलरशिप या शोरूम पर कम से कम एक पब्लिक चार्जिंग स्टेशन इंस्टॉल करवाएं.
क्या है फ्यूचर प्लान?
इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुकाबिक ये पॉलिसी अधिसूचना जारी होने की तारीख से 31 मार्च 2030 तक प्रभावी रहेगी, जब तक कि इसे बढ़ाया या संशोधित न किया जाए. मुख्य उद्देश्य 2030 तक दिल्ली में 30 प्रतिशत इलेक्ट्रिक वाहनों की पैठ हासिल करना है. वर्तमान में चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी के कारण लोग EV खरीदने से हिचकिचा रहे हैं. ऐसे में मजबूत चार्जिंग नेटवर्क तैयार करना इस पॉलिसी का मुख्य उद्देश्य है.
रेंज एंग्जायटी सबसे बड़ा रोड़ा
दरअसल, EV अपनाने में सबसे बड़ी चुनौती चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी रही है. खासकर छोटे शहरों और हाईवे पर चार्जिंग स्टेशन कम होने की वजह से लोग इलेक्ट्रिक गाड़ियों को खरीदने से हिचकते हैं. ऐसे में अगर हर ऑटो कंपनी अपने शोरूम पर चार्जिंग सुविधा उपलब्ध कराएगी, तो ये समस्या काफी हद तक कम हो सकती है. इससे EV यूजर्स को शहर के अंदर आसानी से चार्जिंग पॉइंट मिल जाएंगे और उनकी रेंज एंग्जायटी भी घटेगी.
किसे होगा फायदा?
इस प्रस्ताव का सीधा असर आम ग्राहकों पर पड़ेगा. सबसे पहले, इलेक्ट्रिक कार या स्कूटर खरीदने वालों का भरोसा बढ़ेगा, क्योंकि उन्हें पता होगा कि चार्जिंग की सुविधा आसानी से उपलब्ध है. दूसरा, नए खरीदारों के लिए EV अपनाना ज्यादा आसान और सुविधाजनक हो जाएगा. खासतौर पर पहली बार EV लेने वाले लोग, जो चार्जिंग को लेकर चिंतित रहते हैं उनके लिए ये बड़ा राहत भरा कदम साबित हो सकता है.
ऑटो कंपनियों को मिलेगा?
ऑटो कंपनियों के लिए भी ये नई पॉलिसी चुनौती और अवसर दोनों लेकर आएगी. उन्हें अपने शोरूम पर चार्जिंग स्टेशन लगाने के लिए निवेश करना होगा, जिससे शुरुआती लागत बढ़ सकती है. हालांकि, इससे कंपनियों को ग्राहकों को आकर्षित करने में मदद मिलेगी और EV सेल्स में तेजी आ सकती है. जिन कंपनियों का चार्जिंग नेटवर्क मजबूत होगा, वे कंपटीशन में आगे निकल सकेंगी.