क्या भारत में आप नहीं खरीद पाएंगे विंटेज गाड़ियां, स्क्रैप पॉलिसी खत्म कर देगी यह कल्चर?


नई दिल्ली. आज से 15-20 साल बाद जिन गाड़ियों को स्क्रैप करना है, उनके लिए अभी से कंपनियों को फंड साइड रखना होगा. स्क्रैप पॉलिसी में सरकार ने इसका प्रावधान कर दिया है. खबरों के अनुसार, इससे कंपनियों पर 25000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त दबाव पड़ने वाला है. ऐसा इसलिए क्योंकि स्क्रैप में कंपनी को जो खर्च 20 साल बाद आने वाला है उसके लिए फंड अभी से रिजर्व करना होगा. स्क्रैप पॉलिसी से कंपनियों पर जो असर होगा वो तो है ही, लेकिन आम खरीदारों के लिए भी एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया. क्या स्क्रैप पॉलिसी विंटेज कारों का कल्चर खत्म कर देगी.

विंटेज कारों को पसंद करने वालों की संख्या करोड़ों में है. विंटेज कारों को पसंद करने वाली जमात इनके लिए नई गाड़ी से भी ज्यादा कीमत देने को तैयार होती है. लेकिन जब 20 साल में ही गाड़ियों को स्क्रैप कर दिया जाएगा तो एक टाइम ऐसा भी होगा जब पुरानी गाड़ियां जिन्हें विंटेज कहा जा सके, वे बचेंगी ही नहीं. यह डर काफी हद तक सही है लेकिन पूरी तरह नहीं. आइए समझते हैं कि विंटेज गाड़ियां होती क्या हैं और भारत में इनका भविष्य क्या है?

विंटेज कारें क्या सच में खत्म हो जाएंगी

भारत में स्क्रैप पॉलिसी को लेकर सबसे बड़ा डर यही है कि पुरानी गाड़ियां खत्म हो जाएंगी. लेकिन असल में सरकार ने विंटेज गाड़ियों के लिए अलग नियम बनाए हैं. भारत में 50 साल से ज्यादा पुरानी गाड़ियों को विंटेज कैटेगरी में रखा जाता है. ऐसी गाड़ियों के लिए अलग रजिस्ट्रेशन सिस्टम है. अगर कोई मालिक अपनी गाड़ी को अच्छी हालत में रखता है तो उसे स्क्रैप करने की जरूरत नहीं होती.

हालांकि, इन गाड़ियों के इस्तेमाल पर पाबंदी है. इन्हें रोजाना सड़कों पर नहीं चलाया जा सकता. लेकिन रैली, शो या खास मौकों पर इन्हें चलाने की अनुमति मिलती है. यानी विंटेज कारों का कल्चर खत्म नहीं होगा, लेकिन उनका इस्तेमाल सीमित जरूर रहेगा.

असली संकट 20 से 45 साल पुरानी गाड़ियों पर

सबसे बड़ी दिक्कत उन गाड़ियों के लिए है जो 20 से 45 साल के बीच हैं. ये गाड़ियां न तो नई हैं और न ही विंटेज बनी हैं. इसी वजह से इन्हें स्क्रैप पॉलिसी का सबसे ज्यादा असर झेलना पड़ सकता है. अगर ये गाड़ियां बीच में ही खत्म हो गईं, तो भविष्य में नई विंटेज कारों की संख्या कम हो सकती है.

स्क्रैप पॉलिसी में सबसे बड़ी गलतफहमी

लोगों को लगता है कि 15 या 20 साल पूरे होते ही गाड़ी को जबरदस्ती उठा लिया जाएगा. ऐसा नहीं है. नियम यह कहता है कि 15 साल बाद गाड़ी का फिटनेस टेस्ट होगा. अगर गाड़ी प्रदूषण और सुरक्षा मानकों पर खरी उतरती है, तो उसे दोबारा रजिस्टर कराया जा सकता है. इसका मतलब है कि अगर आप अपनी गाड़ी का अच्छे से रखरखाव करते हैं, तो उसे लंबे समय तक चला सकते हैं. यही रास्ता है जिससे कई गाड़ियां 50 साल तक पहुंचकर विंटेज कैटेगरी में एंट्री कर सकती हैं. लेकिन यहां एक बात ये भी याद रखने की है कि एक समय के बाद फिटनेस टेस्ट और उस गाड़ी का रखरखाव तुलनात्मक रूप से महंगा हो जाएगा. असली परीक्षा यहीं शुरू होगी.

रजिस्ट्रेशन होल्ड और स्टैटिक हेरिटेज का विकल्प

सरकार ऐसे विकल्पों पर भी काम कर रही है जहां गाड़ी को स्टैटिक हेरिटेज के रूप में रखा जा सके. इसका मतलब है कि आप गाड़ी को सड़क पर नहीं चलाएंगे, लेकिन उसे अपने पास सुरक्षित रख सकते हैं. इस स्थिति में गाड़ी पर स्क्रैप का नियम लागू नहीं होगा. यह गाड़ी सड़कों के लिए भले इस्तेमाल में न आए, लेकिन एक ऐतिहासिक एसेट के तौर पर बची रह सकती है.

इलेक्ट्रिक रेट्रोफिटिंग बन सकता है नया रास्ता

भविष्य में पुरानी गाड़ियों को बचाने का एक बड़ा तरीका इलेक्ट्रिक रेट्रोफिटिंग हो सकता है. इसमें गाड़ी के पेट्रोल या डीजल इंजन को हटाकर उसे इलेक्ट्रिक में बदला जाता है. इससे गाड़ी प्रदूषण के नियमों में फिट बैठती है और लंबे समय तक इस्तेमाल में रह सकती है. कई देशों में यह ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है और भारत में भी धीरे-धीरे अपनाया जा रहा है.

आम आदमी बनाम अमीर का फर्क

स्क्रैप पॉलिसी का असर सभी पर बराबर नहीं पड़ेगा. एक अमीर व्यक्ति अपनी महंगी गाड़ी को लंबे समय तक संभाल सकता है. वह भारी रजिस्ट्रेशन फीस दे सकता है या गाड़ी को गैराज में रख सकता है. लेकिन एक आम आदमी के लिए यह आसान नहीं है. मारुति ऑल्टो, स्विफ्ट या हुंडई i20 जैसी गाड़ियां शायद ही भविष्य में विंटेज बन पाएं. क्योंकि 20 साल बाद उनका रखरखाव और टैक्स भरना महंगा पड़ सकता है.

दुनिया में कैसे काम करती है स्क्रैप पॉलिसी

भारत अकेला देश नहीं है जहां पुरानी गाड़ियों पर सख्ती हो रही है. दुनिया के कई देशों में पहले से ऐसे नियम लागू हैं.

देश पॉलिसी खास बात
अमेरिका Cash for Clunkers पुरानी गाड़ी देने पर नई खरीदने में छूट
यूरोप ELV Directive 95% गाड़ी री-साइकिल करना जरूरी
जापान Recycling Law गाड़ी खरीदते समय ही फीस ली जाती है
चीन ELV Rules प्रदूषण कम करने और मेटल री-यूज पर फोकस

इन उदाहरणों से साफ है कि स्क्रैप पॉलिसी का मकसद सिर्फ पुरानी गाड़ियां हटाना नहीं है. इसका असली उद्देश्य प्रदूषण कम करना और संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करना है.

असली शौकीन ही रख पाएंगे विंटेज कार

स्क्रैप पॉलिसी विंटेज कारों को खत्म नहीं करेगी, लेकिन उनके रास्ते को मुश्किल जरूर बना देगी. जो लोग अपनी गाड़ियों को संभाल सकते हैं, उनके लिए विकल्प खुले हैं. लेकिन आम लोगों के लिए यह बदलाव चुनौती लेकर आएगा. यही वजह है कि आने वाले समय में सड़कों पर पुरानी गाड़ियों की संख्या कम हो सकती है, जबकि असली विंटेज कारें सिर्फ खास लोगों तक सीमित रह जाएंगी.



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