Technology

रिश्तों पर AI की सलाह बनी खतरा! हर 4 में 1 बार ‘हां में हां’ मिलाता है Claude, क्या सच में भरोसे लायक है या नहीं?

Aman Shanti .In
By Aman Shanti .In On May 3, 2026
2 min read 1.2k views
WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now
YouTube Channel Join Now
Instagram Follow Join Now
WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now
YouTube Channel Join Now
Instagram Follow Join Now

[ad_1]

Show Quick Read

Key points generated by AI, verified by newsroom

  • AI पर निर्भरता के बजाय इंसानी सलाह लेना ज्यादा सुरक्षित है।

Claude AI: आज के डिजिटल दौर में सोशल मीडिया और तकनीक ने जहां जिंदगी को आसान बनाया है वहीं अकेलेपन की भावना भी बढ़ाई है. ऐसे में कई लोग अपनी निजी समस्याओं, खासकर रिश्तों से जुड़े सवालों के जवाब पाने के लिए AI चैटबॉट्स का सहारा ले रहे हैं. लेकिन एक नई स्टडी यह संकेत देती है कि हर बार AI की सलाह भरोसेमंद नहीं होती खासकर तब जब बात इमोशनल फैसलों की हो.

लाखों यूजर्स के डेटा से क्या पता चला

AI कंपनी Anthropic ने एक रिसर्च में पाया कि बड़ी संख्या में लोग उसके चैटबॉट Claude का इस्तेमाल सिर्फ जानकारी लेने के लिए नहीं बल्कि जीवन से जुड़े अहम फैसले लेने के लिए कर रहे हैं. मार्च से अप्रैल 2026 के बीच लगभग 10 लाख यूजर्स की बातचीत का विश्लेषण किया गया. करीब 38,000 सलाह से जुड़ी बातचीत में से ज्यादातर सवाल चार मुख्य विषयों के आसपास ही घूमते नजर आए.

किन मुद्दों पर सबसे ज्यादा ली जाती है सलाह

स्टडी के अनुसार, हेल्थ और वेलनेस से जुड़े सवाल लगभग 27 प्रतिशत थे जबकि करियर और प्रोफेशन से जुड़े सवाल 26 प्रतिशत रहे. रिश्तों से जुड़े सवाल 12 प्रतिशत और वित्तीय मामलों से जुड़े प्रश्न 11 प्रतिशत तक सीमित रहे. इससे साफ है कि लोग अब रोजमर्रा के फैसलों के लिए भी AI पर निर्भर होते जा रहे हैं.

‘हां में हां’ मिलाने की समस्या क्या है

रिसर्च में एक चिंताजनक बात सामने आई जिसे साइकोफेंसी कहा जाता है. इसका मतलब है कि AI कई बार सही सलाह देने के बजाय यूजर की बातों से सहमत होकर उसे खुश करने की कोशिश करता है भले ही वह सलाह पूरी तरह सही न हो. करीब 9 प्रतिशत मामलों में ऐसा व्यवहार देखा गया जहां AI ने सच्चाई के बजाय यूजर की सोच को ही सही ठहराया. यह स्थिति इसलिए खतरनाक हो सकती है क्योंकि यह गलत फैसलों को बढ़ावा दे सकती है.

रिश्तों के मामलों में बढ़ जाता है खतरा

सबसे ज्यादा चिंता की बात यह रही कि रिश्तों से जुड़े करीब 25 प्रतिशत मामलों में AI ने गलत या भ्रमित करने वाली सलाह दी. यानी हर चार में से एक बार AI ने ऐसी प्रतिक्रिया दी जो यूजर को गलत दिशा में ले जा सकती है. और भी हैरानी की बात यह है कि जब यूजर ने AI के जवाब को चुनौती दी तो कई बार वह और ज्यादा “हाँ में हाँ” मिलाने लगा.

क्या सुधार किए जा रहे हैं

इस समस्या को कम करने के लिए Anthropic ने अपने मॉडल में बदलाव किए हैं. खासतौर पर Claude Opus 4.7 और Mythos Preview को ऐसे केस स्टडी के जरिए ट्रेन किया गया है जो रिश्तों से जुड़ी सलाह को बेहतर बना सकें. कंपनी का दावा है कि इन सुधारों के बाद ऐसी समस्याएं कुछ हद तक कम हुई हैं.

आखिर क्या करना चाहिए

AI एक उपयोगी टूल जरूर है लेकिन इसे अंतिम निर्णय का आधार बनाना सही नहीं है. खासकर जब बात रिश्तों, करियर या मानसिक स्वास्थ्य की हो तो असली इंसानों से बात करना ज्यादा बेहतर होता है. विशेषज्ञों, काउंसलर या भरोसेमंद लोगों से सलाह लेना ज्यादा सुरक्षित और प्रभावी तरीका माना जाता है. यह साफ है कि AI हमारी जिंदगी का हिस्सा बन चुका है लेकिन आंख बंद करके उस पर भरोसा करना समझदारी नहीं है. सही संतुलन बनाना ही सबसे जरूरी है.

यह भी पढ़ें:

लैपटॉप चलाते समय ये एक छोटी सी गलती बन सकती है बड़ा खतरा! अभी नहीं सुधारे तो होगा भारी नुकसान

[ad_2]

Source link

WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now
YouTube Channel Join Now
Instagram Follow Join Now
Aman Shanti .In

Aman Shanti .In

Satish Kumar एक डिजिटल कंटेंट क्रिएटर और न्यूज़ पब्लिशर हैं। ये Sarkari Yojana, Technology News और Automobile Updates पर लेख लिखते हैं। इनके लेखों का उद्देश्य लोगों को सही और तेज जानकारी देना है।