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भारत में पेट्रोल की निर्भरता कम करने की दिशा में Tata Motors बड़ा कदम उठाने जा रही है. कंपनी 2026 के अंत या 2027 की शुरुआत में अपनी पहली Flex Fuel कार लॉन्च करेगी, जो E20 से लेकर E100 इथेनॉल तक पर चलेगी. माना जा रहा है कि Tata Punch इसका पहला मॉडल हो सकती है. जानिए कैसे ये टेक्नोलॉजी बदलेगी भारत की ऑटो इंडस्ट्री और क्यों इसे भविष्य की गाड़ी माना जा रहा है.
Tata Punch Flex Fuel को जल्द लॉन्च किया जा सकता है.
Tata Motors भारत की बढ़ती ईथेनॉल इकोनॉमी और पेट्रोलियम इम्पोर्ट कम करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाने जा रहा है. कंपनी के पैसेंजर व्हीकल्स के एमडी और सीईओ शैलेश चंद्रा ने हाल ही में कन्फर्म किया है कि कंपनी अपना पहला फ्लेक्स फ्यूल वाहन इस साल के अंत (2026) या 2027 की शुरुआत में लॉन्च करेगी. ये वाहन E20 से लेकर E100 (100% इथेनॉल) तक के ब्लेंडिंग पर चल सकेंगे.
ये घोषणा भारत सरकार के हाई ईथेनॉल ब्लेंडिंग पॉलिसी के साथ पूरी तरह मेल खाती है, जो क्रूड ऑयल आयात घटाने, किसानों की आय बढ़ाने और पर्यावरण संरक्षण पर जोर दे रही है. टाटा मोटर्स ने पहले ही 2025 भारत मोबिलिटी एक्सपो में Punch Flex Fuel प्रोटोटाइप पेश किया था, जो अलग-अलग ईथेनॉल मिक्स पर चलकर अपनी क्षमता साबित कर चुका है.
कंपनी का कहना है कि टेक्नोलॉजी के लिहाज से वे पूरी तरह तैयार है और रेगुलेटरी फ्रेमवर्क तैयार होते ही प्रोडक्शन में जा सकती है. ये लॉन्च भारतीय ऑटो इंडस्ट्री में फ्लेक्स फ्यूल टेक्नोलॉजी को मेनस्ट्रीम में लाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
फ्लेक्स फ्यूल टेक्नोलॉजी क्या है?
फ्लेक्स फ्यूल वाहन (FFV) ऐसे इंजन से लैस होते हैं, जो पेट्रोल और ईथेनॉल के विभिन्न अनुपातों पर चल सकते हैं. टाटा का आगामी मॉडल E20 (20% इथेनॉल), E85 (85% इथेनॉल) और E100 (प्योर इथेनॉल) सभी पर काम करेगा. इसमें स्पेशल मैटेरियल से बने फ्यूल सिस्टम, इंजेक्टर्स और सेंसर्स लगाए जाते हैं, ताकि ईथेनॉल की संक्षारक प्रकृति से नुकसान न हो.
Tata Punch हो सकता है पहला मॉडल
कई रिपोर्ट्स के मुताबिक टाटा पंच फ्लेक्स फ्यूल सबसे पहले लॉन्च हो सकती है. ऑटो एक्सपो 2025 में दिखाए गए प्रोटोटाइप में 1.2 लीटर इंजन का इस्तेमाल किया गया था, जो हाई ईथेनॉल ब्लेंडिंग को सपोर्ट करता है. पंच की पॉपुलरिटी को देखते हुए ये सही चुनाव लगता है.
पर्यावरण और आर्थिक फायदे
E100 इथेनॉल का इस्तेमाल करने से कार्बन एमिशन में काफी कमी आएगी. भारत में इथेनॉल मुख्य रूप से गन्ने और अन्य कृषि अवशेषों से बनता है, जिससे किसानों को अतिरिक्त आय होगी. सरकार का लक्ष्य आयात कम करना है, वर्तमान में भारत 90% क्रूड ऑयल आयात करता है. फ्लेक्स फ्यूल वाहन इस निर्भरता को घटाने में मदद करेंगे.
चुनौतियां और भविष्य
ईथेनॉल की उपलब्धता, फ्यूलिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और शुरुआती लागत चुनौतियां हैं, लेकिन सरकार इन पर काम कर रही है. टाटा मोटर्स की ये पहल अन्य कंपनियों को भी प्रेरित करेगी. आने वाले समय में और मॉडल्स जैसे Nexon या Tiago में भी ये टेक्नोलॉजी देखने को मिल सकती है.
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न्यूज़18 हिंदी में सीनियर सब-एडिटर के रूप में कार्यरत राम मोहन मिश्र 2021 से डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं और फिलहाल ऑटो डेस्क संभाल रहे हैं. वे कार और बाइक से जुड़ी जानकारी को आसान, स्पष्ट और भरोसेमंद तरीके से …और पढ़ें