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Elon Musk को टक्कर देने उतरा चीन, Neuralink जैसी ब्रेन चिप को दी कमर्शियल मंजूरी

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By Aman Shanti .In On June 8, 2026
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  • चीन ने लकवाग्रस्त मरीजों हेतु BCI NEO को मंजूरी दी।
  • NEO कम इनवेसिव, ब्रेन सिग्नल से हाथ गति संभव।
  • परीक्षण में लकवाग्रस्त डोंग हुई ने चिप से लिखा।
  • भविष्य में BCI AI संग विचारों से उपकरण नियंत्रित।

Neo Brain-Computer Interface: Elon Musk की कंपनी न्यूरालिंक विचारों को पढ़ने वाली चिप बना रही है. अब चीन भी इस रेस में शामिल हो गया है. चीन ने दुनिया की पहले कमर्शियल ब्रेन-कंप्यूटर इंटरफेस (BCI) को मंजूरी दे दी है. NEO नाम की इस ब्रेन चिप को Neuracle Technology ने Tsinghua University के साथ मिलकर बनाया है. यह लकवाग्रस्त मरीजों को फिर से चलने-फिरने के काबिल बनाने में मदद करने के लिए डिजाइन की गई है. चीन के नेशनल मेडिकल प्रोडक्ट्स एडमिनिस्ट्रेशन ने मार्च में इसे हरी झंडी दिखाई थी. इस चिप को 18-60 साल के लोगों पर इस्तेमाल किया जा सकता है. न्यूरालिंक की चिप को अभी तक ऐसी मंजूरी नहीं मिली है.

कैसे काम करेगी यह चिप?

न्यूरालिंक की चिप को सर्जरी के जरिए ब्रेन में इंप्लांट किया जाता है, लेकिन NEO इस मामले में थोड़ी अलग है और इसी कारण यह जल्दी मंजूरी पा सकी है. NEO में आठ सेंसर हैं, जिन्हें ब्रेन की प्रोटेक्टिव मेंब्रेन dura mater पर लगाया जाएगा. ये सेंसर ब्रेन सिग्नल को कलेक्ट कर कंप्यूटर के पास भेजते हैं. फिर कंप्यूटर इन सिग्नल को कमांड बनाकर सॉफ्ट रोबोटिक ग्लव्स को भेजता है. इसी तरीके से हिलने-डुलने में असमर्थ लोग हाथ से थोड़ी मूवमेंट कर अपनी रोजमर्रा के काम कर पाएंगे. इस चिप को ब्रेन में इंप्लांट करने की जरूरत नहीं है, इसलिए टिश्यू डैमेड या ब्लीडिंग जैसी दिक्कत नहीं होती. 

एक्सीडेंट में घायल हुए मरीज पर किया गया ट्रायल 

39 साल के Dong Hui उन लोगों में शामिल हैं, जिन पर सबसे पहले इस चिप का ट्रायल किया गया था. करीब 6 साल पहले हुए एक्सीडेंट में Hui गर्दन से नीचे लकवाग्रस्त हो गए थे. 2024 में उनकी सर्जरी हुई और करीब एक साल तक उन्होंने रिहैबिलिटेशन में गुजारा. पिछले साल अक्टूबर में इस चिप की मदद से वो एक्सीडेंट के बाद पहली बार पेन पकड़कर अपना नाम लिख पाए थे.

BCI के साथ एआई को कंबाइन करने की तैयारी

NEO को कमर्शियली मंजूरी मिलने के बाद अब चाइनीज कंपनियां इसे एआई के साथ कंबाइन करने का एक्सपेरिमेंट कर रही हैं. शंघाई-बेस्ड NeuroXess ने हाल ही एक ट्रायल किया था, जिसमें लकवाग्रस्त मरीज सिर्फ अपने विचारों से कंप्यूटर कर्सर को मूव कर पाया. साथ ही वह घर में यूज होने वाले कुछ अप्लायंसेस को भी कंट्रोल कर पाया था. कंपनी ने एक लार्ज लैंग्वेज मॉडल भी तैयार किया है, जो मैंडरिन स्पीच सिग्नल को 300 कैरेक्टर प्रति मिनट की दर से डिकोड कर सकता है. इसका मतलब है कि यह चिप उन लोगों को भी नई उम्मीद दे सकती है, जो बोल नहीं पा रहे हैं.

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Satish Kumar एक डिजिटल कंटेंट क्रिएटर और न्यूज़ पब्लिशर हैं। ये Sarkari Yojana, Technology News और Automobile Updates पर लेख लिखते हैं। इनके लेखों का उद्देश्य लोगों को सही और तेज जानकारी देना है।