Technology

अब मशीनों को मिलेगा इंसानी दिमाग? स्मार्ट इलेक्ट्रॉनिक स्किन बनाने में जुटे रिसर्चर

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By Aman Shanti .In On June 16, 2026
1 min read 1.2k views
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  • वैज्ञानिक दिमाग जैसी लचीली इलेक्ट्रॉनिक स्किन विकसित कर रहे हैं।
  • यह रोबोटिक्स और AI हार्डवेयर में नए अवसर देगी।
  • इसमें सेंसिंग, मेमोरी और कंप्यूटिंग जैसी क्षमताएं होंगी।
  • अभी भी मेमोरी रिटेंशन एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।

Electronic Skin: रिसर्चर इन दिनों एक ऐसी इलेक्ट्रॉनिक स्किन पर काम कर रहे हैं, जो स्ट्रैचेबल होगी और हमारे दिमाग की तरह इंफोर्मेशन को प्रोसेस कर पाएगी. इससे रोबोटिक्स और एआई हार्डवेयर समेत कई फील्ड में नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है. अब एआई इमेज रिकग्नेशन और मेडिकल डेटा एनालिसिस समेत कई मामलों में इंसानी दिमाग को पछाड़ चुकी है, लेकिन इंसानी शरीर को लेकर यह अभी भी चुनौतियां का सामना कर रही है. इस समस्या को दूर करने के लिए रिसर्चर अब इस नई तरह की स्किन पर काम कर रहे हैं. 

इंसानों और मशीनों के बीच आ रही यह समस्या

इंसानी शरीर के टिश्यू सॉफ्ट और फ्लेक्सिलबल होने के साथ-सात लगातार मूव करते रहते हैं, लेकिन इलेक्ट्रॉनिक्स इस मामले में बहुत पीछे है. अगर सबसे एडवांस्ड सिलिकॉन चिप की भी बात करें तो यह काफी कठोर होती है और इसे किसी ऑर्गन, मसल या स्किन में इंटीग्रेट करना बहुत मुश्किल होता है. अगर ऐसा कोई इलेक्ट्रॉनिक्स लगा भी दिया जाए तो इसके लूज होने या टिश्यू में इंफेक्शन करने जैसी दिक्कतें आने लगती हैं. अब रिसर्चर इंसानी शरीर को इलेक्ट्रॉनिक्स के हिसाब से ढालने की बजाय इंसानी शरीर के हिसाब से इलेक्ट्रॉनिक्स तैयार करने में लगे हुए हैं.

ये हैं इलेक्ट्रॉनिक स्किन की खास बातें

इंसानी दिमाग से इंस्पिरेशन लेकर तैयार की गई यह इलेक्ट्रॉनिक स्किन एक साथ कई खूबियों से लैस है. इसे ऐसे मैटेरियल से तैयार किया जाता है, जो स्ट्रैच होने के साथ मुड़ और लिविंग टिश्यू के साथ आसानी से एडजस्ट हो सकता है. इसमें सेंसिंग, मेमोरी और कंप्यूटिंग जैसी खासियत भी है. इसे ज्यादा पावर की भी जरूरत नहीं पड़ती और यह 0.5 volts पर भी कई जरूरी टास्क परफॉर्म कर सकती है.

कैसे काम करेगी इलेक्ट्रॉनिक स्किन?

ट्रेडिशनल सर्किट की बात करें तो ये मेटल पाथवेज को इलेक्ट्रॉन्स मूव करने के लिए यूज करते हैं. वहीं इलेक्ट्रॉनिक स्किन में पॉलीमर्स और जेल जैसे आयनोजेल्स जैसे सॉफ्ट मेटैरियल से इलेक्ट्रॉन्स और आयन को मूव किया जाता है. इस मैकेनिज्म को मिक्स्ड आयोनिक-इलेक्ट्रॉनिक कंडक्शन कहते हैं और यह इंसानी नर्वस सिस्टम द्वारा यूज किए जाने वाले इलेक्ट्रॉकेमिकल सिग्नलिंग की तरह काम करता है. 

अभी भी कई चुनौतियां बाकी

इस टेक्नोलॉजी को लेकर काफी प्रोसेस हुई है, लेकिन कई चुनौतियां बाकी है. इनमें सबसे बड़ी चुनौती मेमोरी रिटेंशन को लेकर है. कई सॉफ्ट मेमोरी डिवाइसेस के सिग्नल के जाते ही उनमें स्टोर मेमोरी गायब हो जाती है. ऐसे में इन्हें लॉन्ग-टर्म में यूज करना थोड़ा मुश्किल हो जाता है.

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Satish Kumar एक डिजिटल कंटेंट क्रिएटर और न्यूज़ पब्लिशर हैं। ये Sarkari Yojana, Technology News और Automobile Updates पर लेख लिखते हैं। इनके लेखों का उद्देश्य लोगों को सही और तेज जानकारी देना है।