आपका Smart TV, Camera और Fridge इंटरनेट पर हैं? कहीं कोई आपको चुपके से देख तो नहीं रहा?


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  • एक रोबोट वैक्यूम ने हजारों घरों का डेटा दिखाया.

Internet Connected Devices: आज के समय में किसी भी आधुनिक घर में नजर डालें तो आपको कई ऐसे डिवाइस मिल जाएंगे जो इंटरनेट से कनेक्ट होते हैं. लिविंग रूम में रखा स्मार्ट टीवी, रोबोट वैक्यूम, स्मार्ट कैमरा और स्मार्टवॉच आपकी एक्टिविटी का रिकॉर्ड रखते हैं. ये सभी डिवाइस इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) का हिस्सा हैं जिनका मकसद हमारी जिंदगी को आसान और सुविधाजनक बनाना है. लेकिन इन सुविधाओं के पीछे एक बड़ा सवाल छिपा है कि आखिर इन डिवाइसों द्वारा इकट्ठा किया गया डेटा आखिर जाता कहां है?

घर बन चुका एक डिजिटल नेटवर्क

स्मार्ट होम अब भविष्य की बात नहीं रह गई है. इंटरनेट से जुड़े टीवी, कैमरे, स्मार्ट स्पीकर, डोरबेल, बेबी मॉनिटर और रोबोट वैक्यूम जैसे डिवाइस लाखों घरों का हिस्सा बन चुके हैं. कम डेटा कीमतें, तेज इंटरनेट और सस्ते हार्डवेयर ने इन डिवाइसों को आम लोगों तक पहुंचा दिया है.

हालांकि, ज्यादातर लोग यह नहीं समझते कि हर स्मार्ट डिवाइस असल में एक छोटा कंप्यूटर है जो लगातार इंटरनेट के जरिए डेटा भेजता और रिसीव करता रहता है. यह जानकारी अक्सर निर्माता कंपनियों के क्लाउड सर्वरों तक पहुंचती है जहां उसका प्रोसेसिंग और स्टोरेज होता है.

स्मार्ट डिवाइस एक-दूसरे से कैसे बात करते हैं?

कई IoT डिवाइस MQTT नामक कम्युनिकेशन सिस्टम का इस्तेमाल करते हैं. इसे आसान भाषा में समझें तो यह मशीनों के लिए एक डाक सेवा की तरह काम करता है. डिवाइस सीधे एक-दूसरे से संपर्क नहीं करते बल्कि एक सेंट्रल सर्वर के जरिए मैसेज का आदान-प्रदान करते हैं. उदाहरण के लिए, एक रोबोट वैक्यूम अपनी बैटरी, सफाई की कंडिशन और मैपिंग से जुड़ी जानकारी सर्वर पर भेजता है जिसे मोबाइल ऐप रिसीव कर लेता है.

यह व्यवस्था तभी सुरक्षित रहती है जब सही लोगों को ही डेटा तक पहुंचने की अनुमति मिले. अगर यह कंट्रोल कमजोर पड़ जाए तो आपकी निजी जानकारी अनजान लोगों तक पहुंच सकती है.

बैकडोर क्या होता है और यह कितना खतरनाक है?

साइबर सुरक्षा की दुनिया में बैकडोर ऐसा रास्ता होता है जिससे कोई व्यक्ति या सॉफ्टवेयर नॉर्मल सेफ्टी तरीकों को दरकिनार करके सिस्टम तक पहुंच सकता है.

कई बार यह खराब डिजाइन या प्रोग्रामिंग की वजह से बन जाता है. दूसरी ओर, कुछ मामलों में डिवाइसों के अंदर ऐसे सॉफ्टवेयर भी पाए गए हैं जो मालिक की जानकारी के बिना इंटरनेट कनेक्शन का इस्तेमाल अन्य एक्टिविटी के लिए करते हैं. ऐसी स्थिति में डिवाइस अपना सामान्य काम तो करता रहता है लेकिन पर्दे के पीछे किसी और के लिए भी काम कर सकता है.

रोबोट वैक्यूम से उजागर हुई हजारों घरों की जानकारी

हाल ही में एक रोबोट वैक्यूम से जुड़ी घटना ने स्मार्ट डिवाइस सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए. एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने अपने वैक्यूम को कंट्रोल करने के लिए उसके नेटवर्क सिस्टम को स्टडी किया.

जांच के दौरान पता चला कि सर्वर की सुरक्षा व्यवस्था में कमी के कारण हजारों अन्य डिवाइसों की जानकारी भी दिखाई दे रही थी. इसमें घरों के फ्लोर मैप, कैमरा फीड और अन्य संवेदनशील डेटा शामिल था. सबसे चौंकाने वाली बात यह थी कि इसके लिए किसी मुश्किल हैकिंग तकनीक की जरूरत नहीं थी. समस्या सर्वर पर मौजूद Authorization में थी. इस घटना ने साबित किया कि कई बार खतरा डिवाइस में नहीं बल्कि उसे चलाने वाले क्लाउड सिस्टम में छिपा होता है.

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