- उपयोगकर्ता अनजाने में डेटा सब्जेक्ट बन रहे, छोटे सुझाव बदलते हैं।
Internet: इंटरनेट का इस्तेमाल भारत ही नहीं बल्की पूरी दुनिया में काफी तेजी से बढ़ चुका है. लोग आज किसी भी चीज को सर्च करने से लेकर सोशल मीडिया का इस्तेमाल या फिर ऑनलाइन पेमेंट तक के लिए इंटरनेट पर निर्भर हो चुके हैं. लोग आज इंटरनेट से इस कदर कनेक्ट हो चुके हैं कि अगर थोड़ी देर के लिए इंटरनेट न चलें तो लोग बौखलाने लगते हैं.
इसी को देखते हुए एक नए शोध से ये जानकारी सामने आई है कि इंटरनेट का इस्तेमाल लोगों के सोचने के तरीके को बदल रहा है. साथ ही इसका असर लोगों के व्यक्तित्व पर भी पड़ सकता है.
एल्गोरिदम तय करते हैं आपको क्या दिखाई देगा
आपको ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर दिखने वाली चीजें पूरी तरह प्लान्ड होती हैं. आपको कौन-सा वीडियो दिखाना है, कौन सी खबर आपकी फीड पर आनी चाहिए, ये सभी चीजें अपने आप नहीं होती हैं बल्कि इसके पीछे पूरी एक एल्गोरिदम काम करती है जो आपकी एक्टिविटी के अनुसार आपको चीजें पेश करती है.
आपकी आदतों का नक्शा तैयार हो रहा है
एम्स्टर्डम विश्वविद्यालय के मीडिया शोधकर्ता ब्योर्न बेइन्योन के मुताबिक, आज बड़ी से बड़ी टेक कंपनियां केवल यूजर्स का डेटा इकट्ठा नहीं करतीं हैं बल्कि उस डेटा का विश्लेषण करके उनके आने वाले कल के व्यवहार का भी पता लगाने की कोशिश करती है.
बता दें कि जब आप कोई भी चीज गूगल या इंटरनेट पर सर्च करते हैं या फिर किसी पोस्ट पर क्लिक करते हैं, वीडियो देखते हैं, ऑनलाइन खरीदारी करते हैं या सोशल मीडिया पर स्क्रॉल करते हैं तो आपकी हर एक एक्टिविटी एक डिजिटल रिकॉर्ड में बदल जाती है. इसी रिकॉर्ड का इस्तेमाल कंपनियां आपके व्यवहार को समझने के लिए करती हैं.
डेटा सब्जेक्ट बनते जा रहे हैं इंटरनेट यूजर्स
शोध में एडवां इंटरनेट यूजर्स को “डेटा सब्जेक्ट” कहा गया है. इसका मतलब है कि आजकल लोग जाने या अनजाने में अपनी पर्सनल लाइफ की चीजों को एक डेटा में बदलते जा रहे हैं जिसका बड़ी-बड़ी टेक कंपनियां अपने फायदे के लिए इस्तेमाल कर रही हैं.
इतना ही नहीं हैरान करने वाली बात ये है कि ज्यादातर लोगों को अभी भी यह लगता है कि ऑनलाइन जो भी फैसले वह ले रहे हैं वह पूरी तरह से उनका फैसला है.
छोटे-छोटे सुझाव बदल सकते हैं बड़े फैसले
इसीलिए अब इंटरनेट लोगों पर इस कदर हावी हो चुका है कि ऑनलाइन दिखाई गई एक छोटी सी चीज लोगों के सोचने के तरीके को भी पूरी तरह से बदल दे रही है. फोन पर आने वाला नोटिफिकेशन, रिकमंड किया गया वीडियो या फिर ऑनलाइन शॉपिंग की रिकमेंडेशन देखने में मामूली लग सकती है. लेकिन यही छोटी-छोटी चीजें समय के साथ हमारी आदतों और फैसले लेने के तरीकों को पूरी तरह से प्रभावित कर सकती हैं.
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