डैशबोर्ड पर जलने वाली इन 10 लाइट्स को कभी न करें इग्नोर! अनदेखा किया, तो लग जाएगी लाखों की चपत


मॉडर्न कारों में डैशबोर्ड पर लगी अलग-अलग वार्निंग लाइट्स (Warning Lights) गाड़ी की हेल्थ कंडीशन का आईना होती हैं. ये लाइट्स इंजन, ब्रेक, बैटरी, टायर और अन्य महत्वपूर्ण सिस्टम की समस्याओं के बारे में तुरंत सूचित करती हैं. लाल रंग की लाइट्स तत्काल ध्यान देने योग्य होती हैं, जबकि पीली/नारंगी लाइट्स सावधानी बरतने का संकेत देती हैं. गर्मियों में तापमान बढ़ने के कारण इंजन, कूलिंग सिस्टम, बैटरी और टायर पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है, जिससे ये लाइट्स अधिक बार जल सकती हैं.

कई ड्राइवर इन्हें अनदेखा कर देते हैं, लेकिन इससे इंजन खराब होना, ब्रेक फेल होना या अचानक ब्रेकडाउन जैसी बड़ी समस्याएं हो सकती हैं. गर्मी में कूलेंट का जल्दी जलना, बैटरी फ्लूइड का सूखना और टायर प्रेशर बढ़ना आम हैं. इसलिए इन लाइट्स को समझना और समय पर एक्शन लेना जरूरी है. आइए जानते हैं कि डैशबोर्ड पर किस तरह की लाइट्स जलती हैं और उनका मतलब क्या है?

डैशबोर्ड लाइट्स और उनका मतलब

कार के डैशबोर्ड पर कई स्टैंडर्ड लाइट्स होती हैं. चेक इंजन लाइट (इंजन का आउटलाइन) इंजन या इमिशन सिस्टम में समस्या दर्शाती है. ये पीली या लाल कलर की हो सकती है. इंजन टेंपरेचर वार्निंग (थर्मामीटर आइकन) इंजन ओवरहीटिंग का संकेत है. बैटरी लाइट (बैटरी का चिह्न) चार्जिंग सिस्टम की खराबी बताती है.

ऑयल प्रेशर लाइट (ऑयल कैन) इंजन ऑयल का कम प्रेशर या कमी को दर्शाती है. टायर प्रेशर मॉनिटरिंग सिस्टम (TPMS) किसी टायर में हवा कम या ज्यादा होने पर जलती है. ABS लाइट एंटी-लॉक ब्रेकिंग सिस्टम की समस्या दिखाती है, जबकि ब्रेक वार्निंग हैंडब्रेक या ब्रेक फ्लूइड कम होने का संकेत देती है. अन्य लाइट्स में लो फ्यूल, एयरबैग, ट्रैक्शन कंट्रोल आदि शामिल हैं. इनके रंग के आधार पर प्राथमिकता तय करें. रेड लाइट को इग्नोर न करें.

आइकन लाइट का नाम मतलब / संकेत
🌡️ इंजन टेंपरेचर वार्निंग इंजन ओवरहीटिंग (ज्यादा गर्म) का संकेत है.
🛢️ ऑयल प्रेशर लाइट इंजन ऑयल का प्रेशर कम है या तेल की कमी है.
🔋 बैटरी लाइट चार्जिंग सिस्टम या अल्टरनेटर में खराबी है.
🛑 / ⚠️ ब्रेक वार्निंग हैंडब्रेक लगा हुआ है या ब्रेक फ्लूइड कम है.
👤 / 🪂 एयरबैग लाइट एयरबैग सिस्टम में कोई खराबी है.
⚙️ / ⚠️ चेक इंजन लाइट इंजन या एमिशन (उत्सर्जन) सिस्टम में कोई समस्या है.
(ABS) ABS लाइट एंटी-लॉक ब्रेकिंग सिस्टम में कोई खराबी है.
⚠️ / 🛞 TPMS किसी टायर में एयर प्रेशर बहुत कम या ज्यादा है.
🚗💨 ट्रैक्शन कंट्रोल टायर की पकड़ (ग्रिप) कम हो रही है या सिस्टम में खराबी है.
लो फ्यूल टैंक में फ्यूल (पेट्रोल/डीजल) बहुत कम बचा है.

गर्मियों में इन लाइट्स पर क्यों ज्यादा सावधानी बरतें

गर्मी का मौसम कार के लिए चुनौतीपूर्ण होता है. बाहरी तापमान 40 डिग्री से ऊपर जाने पर इंजन का तापमान तेजी से बढ़ता है, जिससे कूलिंग सिस्टम पर बोझ पड़ता है. कूलेंट का लेवल कम होने या रेडिएटर में समस्या होने पर टेम्परेचर लाइट जल सकती है, जिसकी अनदेखी से हेड गास्केट ब्लो हो सकता है.

बैटरी पर गर्मी का सबसे बुरा असर पड़ता है. फ्लूइड वाष्पीकृत (Evaporate) होता है, केमिकल रिएक्शन तेज होता है और बैटरी की उम्र कम हो जाती है. गर्मी में बैटरी फेल होने की संभावना दोगुनी हो जाती है. टायरों में हवा गर्म होकर फैलती है, जिससे प्रेशर बढ़ता है और ब्लोआउट का खतरा रहता है. TPMS लाइट अक्सर इसी कारण जलती है. इसके अलावा, गर्मी से वायरिंग और सेंसर प्रभावित हो सकते हैं, जिससे फॉल्स वार्निंग भी आ सकती हैं.

क्या करें जब लाइट जल जाए

  • तुरंत एक्शन लें: लाल लाइट (जैसे टेम्परेचर या ऑयल) जलने पर सुरक्षित जगह पर गाड़ी रोकें, इंजन बंद करें और ठंडा होने दें.
  • पीली लाइट: निकटतम सर्विस सेंटर जाएं. चेक इंजन लाइट के लिए OBD स्कैनर से डायग्नोसिस करवाएं.
  • गर्मियों में प्रिवेंटिव मेंटेनेंस: कूलेंट, ब्रेक फ्लूइड, ऑयल नियमित चेक करें. टायर प्रेशर सुबह ठंडे में चेक करें. बैटरी टर्मिनल साफ रखें. पार्किंग में सनशेड का इस्तेमाल करें. लंबी ड्राइव से पहले सर्विसिंग करवाएं.

सार: डैशबोर्ड लाइट्स को नजरअंदाज करना महंगा साबित हो सकता है. गर्मियों में सावधानी से न सिर्फ वाहन की उम्र बढ़ती है, बल्कि दुर्घटनाओं से बचा जा सकता है. हर ड्राइवर को मैनुअल पढ़ना चाहिए और बेसिक ज्ञान रखना चाहिए. समय पर मेंटेनेंस से सेफ ड्राइविंग सुनिश्चित की जा सकती है.



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