कार का इंजन ऑयल इंजन की लाइफ और परफॉर्मेंस के लिए बेहद जरूरी है. सही ऑयल इंजन के पार्ट्स को लुब्रिकेट करता है, गर्मी कम करता है और फ्रिक्शन से बचाता है. अगर ऑयल खराब हो जाए या लेवल कम हो तो इंजन ओवरहीट हो सकता है, घिस सकता है या भारी नुकसान पहुंचा सकता है. रेगुलर चेकअप और समय पर चेंज से कार की उम्र बढ़ती है और महंगे रिपेयर से बचा जा सकता है.
ज्यादातर कारों में हर 5000 से 10000 किलोमीटर या साल में एक बार ऑयल बदलने की सलाह दी जाती है, लेकिन ड्राइविंग स्टाइल और कंडीशन के हिसाब से ये बदल सकता है. सही तरीके से चेक और चेंज करने से न सिर्फ इंजन सुरक्षित रहता है बल्कि फ्यूल इकोनॉमी भी बेहतर होती है. ये जानना जरूरी है कि ऑयल की कंडीशन कैसे चेक करें और उसे बदलने का सही तरीका क्या है?
इंजन ऑयल की कंडीशन कैसे चेक करें
कार को समतल जगह पर पार्क करें और इंजन को ठंडा होने दें. बोनट खोलकर डिपस्टिक निकालें, साफ कपड़े से पोंछें और फिर से डालकर निकालें. लेवल मिन और मैक्स मार्क के बीच होना चाहिए. रंग एम्बर या हल्का भूरा होना चाहिए. काला, दूधिया या बहुत गाढ़ा ऑयल खराब होने का संकेत है. जलने जैसी गंध या धातु के कण भी समस्या बताते हैं.
ऑयल बदलने से पहले जरूरी तैयारी
नया सही ग्रेड का ऑयल, नया ऑयल फिल्टर, रिंच, ड्रेन पैन, जैक और सेफ्टी गियर रखें. कार को जैक से उठाकर स्टैंड लगाएं. इंजन को थोड़ा गर्म करें, ताकि ऑयल आसानी से निकल सके.
स्टेप-बाय-स्टेप ऑयल चेंज प्रोसेस
पहले ड्रेन प्लग खोलकर पुराना ऑयल पूरी तरह निकाल दें. पुराना फिल्टर हटाएं और नया फिल्टर लगाएं. ड्रेन प्लग कसें. नए ऑयल की सही मात्रा डालें. डिपस्टिक से लेवल चेक करें. इंजन स्टार्ट करके लीकेज देखें. कुछ किलोमीटर चलाने के बाद दोबारा लेवल चेक करें.
सावधानियां और टिप्स
पुराना ऑयल पर्यावरण के लिए हानिकारक है, इसे सही जगह डिस्पोज़ करें. हमेशा मैनुअल के अनुसार ऑयल का इस्तेमाल करें. अगर अनुभव कम हो तो मैकेनिक से करवाएं. नियमित चेक से इंजन हमेशा स्वस्थ रहता है.