आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आज के समय में लोगों की जिंदगी का हिस्सा बनती जा रही है. ज्यादातर लोग अब अपने काम के लिए एआई का सहारा लेने लगे हैं. इसी के साथ ही अब कई सारे एआई चैटबॉट मौजूद हैं जो लोगों के लिए अलग-अलग काम करते हैं. इसी कड़ी में एक स्टडी सामने आई है जहां बताया गया है कि जरूरत से ज्यादा एआई के इस्तेमाल से लोगों के दिमाग पर खराब असर पढ़ सकता है. आइए जानते हैं कि क्या है पूरा मामला.
AI से ज्यादा बातचीत का इंसानों की भाषा पर असर
रिपोर्ट के मुताबिक, अगर कोई व्यक्ति लंबे समय तक AI चैटबॉट्स के साथ बातचीत करता है तो संभव है कि वह धीरे-धीरे अपनी बात रखने का तरीका बदलने लगेगा. वजह ये हो सकती है कि AI को साफ, व्यवस्थित और सीधे निर्देश ज्यादा आसानी से समझ आते हैं.
मसलन, अगर कोई व्यक्ति बार-बार AI कस्टमर सर्विस चैटबॉट का इस्तेमाल करता है तो उसे ये एक्सपीरिएंस हो सकता है कि छोटी, साफ और सीधे मुद्दे पर कही गई बात का जवाब बेहतर मिलता है. ऐसे में वह इंसानों से बात करते समय भी अनजाने में इसी तरह संवाद करने लगेगा.
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क्या है Robotoid Humanness?
AI & Society में पब्लिश एक नए स्टडी पेपर में रिसर्सर्च ने इस बदलाव को Robotoid Humanness नाम दिया है. इसका मतलब ये नहीं है कि इंसान सचमुच रोबोट बन जाएंगे. बल्कि ये एक ऐसी कंडिशन होती है जिसमें लोग मशीनों के लिए अपनी लैंग्वेज, नेचर और खुद को पेश करने के तरीके को ज्यादा बेहतर बनाने लगते हैं.
AI और इंसान के बीच बन सकता है फीडबैक लूप
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि शोधकर्ताओं ने इस प्रोसेस को एक तरह के फीडबैक लूप के रूप में समझाया है. AI हमारी पिछली बातचीत और उपलब्ध जानकारी के आधार पर जवाबों को व्यक्तिगत बनाने की कोशिश करता है. वहीं, यूजर भी AI के जवाबों को देखकर अपनी बातचीत का तरीका बदल लेता है. ये प्रोसेस लगातार चलती रहे तो दोनों पक्ष एक-दूसरे के नेचर के अनुसार ढलते जाते हैं. बता दें कि वैज्ञानिकों ने इस प्रोसेस को तीन स्टेज में बांटा है.
- AI सिर्फ टूल नहीं, सोशल प्रेजेंस जैसा लगने लगता है
- AI यूजर की एक तस्वीर तैयार करता है
- यूजर भी AI के हिसाब से खुद को ढाल सकता है
इंसानों और AI के बीच सबसे बड़ा अंतर
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि शोधकर्ताओं के मुताबिक, इंसानों के बातचीत करने में काफी अंतर होता है. इंसान आपकी बात से कई बार असहमत भी हो सकता है या फिर आपकी बात को चैलेंज भी कर सकता है. लेकिन दूसरी तरफ, AI सिस्टम पैटर्न, डेटा, अनुमान और व्यक्तिगत रिएक्शन पर काफी हद तक काम करते हैं. इसीलिए एआई से ज्यादा बातचीत इंसानों को भी उनके तरीके से बात करने के लिए तैयार कर सकती है.
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