बिजली के बढ़ते बिल से परेशान लोग अब सोलर पैनल लगवाने की तरफ तेजी से बढ़ रहे हैं. खासकर 5kW का सोलर सिस्टम मीडियम साइज के घरों में सबसे ज्यादा लगाया जा रहा है, क्योंकि यह एक साथ कई एसी, फ्रिज, गीजर जैसे उपकरण आसानी से चला सकता है. लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही रहता है कि आखिर 5kW का सोलर पैनल हर महीने कितनी यूनिट बिजली बनाता है और इसका हिसाब कैसे लगाया जाता है. आइए पूरा गणित समझते हैं.
कैसे निकाला जाता है यूनिट का हिसाब?
सोलर पैनल कितनी बिजली बनाएगा, यह मुख्य रूप से तीन चीजों पर निर्भर करता है, सिस्टम की क्षमता यानी kW, इलाके में मिलने वाली धूप के घंटे यानी पीक सन आवर, और सिस्टम की परफॉर्मेंस रेशियो. भारत में ज्यादातर शहरों में औसतन 4 से 5 घंटे तक अच्छी धूप मिलती है. सीधा फॉर्मूला कुछ इस तरह है, सिस्टम की क्षमता kW को पीक सन आवर से गुणा करें, फिर उसे परफॉर्मेंस रेशियो यानी करीब 0.75 से 0.8 से गुणा करें. इससे रोजाना बनने वाली यूनिट का अंदाजा मिल जाता है.
महीने और साल भर में कितनी यूनिट मिलेगी?
रोजाना की औसत जनरेशन को 30 दिन से गुणा करने पर 5kW का सिस्टम एक महीने में लगभग 600 से 700 यूनिट बिजली बना सकता है. पूरे साल के हिसाब से देखा जाए तो यह आंकड़ा करीब 7,000 से 7,250 यूनिट तक पहुंच जाता है. यह उन घरों के लिए एकदम सही साइज माना जाता है, जिनका महीने का बिजली खर्च 400 से 600 यूनिट के बीच रहता है, यानी जहां एक से ज्यादा एसी, बड़ा फ्रिज और अन्य उपकरण रोजाना इस्तेमाल होते हैं.
किन बातों से बदल सकता है यह आंकड़ा?
हर घर में सोलर से बनने वाली यूनिट एक जैसी नहीं होगी, इसमें कई फैक्टर असर डालते हैं. पैनल किस दिशा में और किस एंगल पर लगाए गए हैं, यह जनरेशन को बढ़ा या घटा सकता है. छत पर किसी पेड़ या बिल्डिंग की छाया पड़ने से भी आउटपुट कम हो जाता है. इसके अलावा पैनल पर जमी धूल-मिट्टी और मौसम की स्थिति भी सीधा असर डालती है. पैनल की क्वालिटी और इंस्टॉलेशन कितना सही तरीके से हुआ है, यह भी लंबे समय में जनरेशन तय करता है.
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सब्सिडी और खर्च का हिसाब
केंद्र सरकार की पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत रूफटॉप सोलर पर सब्सिडी दी जाती है. हालांकि यह सब्सिडी मुख्य रूप से 3kW तक की क्षमता पर ज्यादा फायदेमंद होती है, उसके बाद क्षमता बढ़ने पर सब्सिडी की रकम उसी अनुपात में नहीं बढ़ती.
5kW सिस्टम पर आमतौर पर करीब 78,000 रुपये तक की सब्सिडी मिल सकती है, हालांकि यह राशि राज्य और डिस्कॉम के हिसाब से अलग-अलग हो सकती है. सब्सिडी के बाद बचा हुआ खर्च कुछ ही सालों में बिजली बिल की बचत से पूरा हो जाता है, जिसके बाद घर को लंबे समय तक मुफ्त बिजली मिलती रहती है.
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