Rolls Royce: भारत में बनेगी रॉल्स-रॉयस! ‘मेक इन इंडिया’ से करोड़ों की कार हो सकती है इतनी सस्ती

ब्रिटिश कंपनी रॉल्स-रॉयस अब भारत को अपना तीसरा सबसे बड़ा डोमेस्टिक मार्केट बनाने की सोच रही है. कंपनी के सीईओ तुफान एर्गिनबिलगिच ने हाल ही में भारत दौरे पर यह बात कही. यह खबर ब्रिटिश हाई कमीशन की पोस्ट से सामने आई है. रॉल्स-रॉयस पहले से ही यूके को अपना मुख्य बाजार मानती है और अब भारत को तीसरे नंबर पर रखना चाहती है. इससे भारत और ब्रिटेन के बीच इंजीनियरिंग और इनोवेशन में सहयोग और मजबूत होगा. साथ ही कार की कीमतें भारत में कम हो सकती है.

कंपनी का कहना है कि इससे जेट इंजन, नौसेना के लिए प्रोपल्शन सिस्टम और दूसरे क्षेत्रों में नई संभावनाएं खुलेंगी. भारत में रॉल्स-रॉयस का 90 साल पुराना इतिहास है और यहां पहले से ही इंजीनियरिंग सेंटर, सप्लाई चेन पार्टनरशिप और एयरोस्पेस व डिफेंस संस्थानों के साथ काम चल रहा है. हाल ही में कंपनी ने भारत में अपना ग्लोबल कैपेबिलिटी एंड इनोवेशन सेंटर बढ़ाया है, जो सिविल स्पेस, डिफेंस, डिजिटल सर्विसेज और इंजीनियरिंग टीमों को सपोर्ट करता है.

2030 तक पूरा हो सकता है कंपनी का ये प्लान

हालांकि, कंपनी ने भारत में कोई नया प्रोडक्शन यूनिट लगाने की साफ घोषणा नहीं की है, लेकिन घरेलू बाजार बनाने की योजना से यहां उत्पादन और सप्लाई बढ़ने की उम्मीद है. रॉल्स-रॉयस 2030 तक भारत से अपनी सप्लाई चेन सोर्सिंग को कम से कम दोगुना करने का प्लान बना रही है. इससे लोकल पार्टनरशिप और टैलेंट डेवलपमेंट को बढ़ावा मिलेगा. कंपनी का मानना है कि भारत की बढ़ती अर्थव्यवस्था और डिफेंस जरूरतों से यह कदम फायदेमंद होगा. भारत में रॉल्स-रॉयस की मौजूदगी 25 साल से है और यहां एमटीयू ब्रांड के तहत 2600 से ज्यादा इंजन और जेनसेट काम कर रहे हैं, जो नौसेना, सेना, माइनिंग और पावर सेक्टर में इस्तेमाल होते हैं. कंपनी को उम्मीद है कि 2026-27 तक उसका प्राइवेट सेक्टर पावर सिस्टम बिजनेस सरकारी सप्लाई से ज्यादा हो जाएगा. इसका कारण डेटा सेंटर्स, सेमीकंडक्टर साइट्स, फैक्टरियों और संस्थानों में बैकअप पावर की बढ़ती मांग है.

कितनी घट सकती है रॉल्स-रॉयस की भारत में कीमत?

इस योजना से कीमतों में कमी आने की उम्मीद की जा रही है, क्योंकि जुलाई 2025 में भारत और यूके के बीच साइन हुए कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक एंड ट्रेड एग्रीमेंट (सीईटीए) से टैरिफ कम होंगे और बाजार पहुंच आसान होगी. इस समझौते से दोनों देशों के बीच व्यापार 2030 तक दोगुना होने का अनुमान है. आयात शुल्क कम होने से रॉल्स-रॉयस के प्रोडक्ट्स, जैसे जेट इंजन और पावर सिस्टम, भारत में सस्ते हो सकते हैं. हालांकि सटीक कितनी कमी आएगी, यह अभी स्पष्ट नहीं है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि लोकल सोर्सिंग बढ़ने से लागत 20-30 प्रतिशत तक घट सकती है. वहीं, मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत और यूके के बीच फ्री ट्रेड डील (FTA) के तहत यह ड्यूटी धीरे-धीरे लगभग 10% तक घटाई जाएगी, जिससे रॉल्स-रॉयस जैसी कारों की कीमतों में 30–40% तक तक गिरावट संभव मानी जा रही है.