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AI से दोस्ती कर सकती है अकेला, दिमाग पर भी पड़ता है यह बुरा असर

Aman Shanti .In
By Aman Shanti .In On May 26, 2026
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  • एआई टूल्स पर ज्यादा निर्भरता अकेलेपन और मानसिक स्वास्थ्य जोखिम बढ़ाती है।
  • एआई से इमोशनल अटैचमेंट वास्तविक रिश्तों और संवाद को कमजोर कर सकता है।
  • थोड़ी देर एआई इस्तेमाल करने से भी सोचने की क्षमता कम हो सकती है।
  • एआई पर निर्भरता से लोग मुश्किलों का हल खुद से खोजना छोड़ देते हैं।

AI Tools Risk: एआई टूल्स धीरे-धीरे हमारे जीवन में अहम जगह बनाते जा रहे हैं. पर्सनल से लेकर प्रोफेशनल तक हर मामले पर लोग अब एआई टूल्स की मदद ले रहे हैं. लगातार बढ़ते यूज के कारण कई लोग इन टूल्स से इमोशनली अटैच हो जाते हैं. एक मामले में तो एक महिला ने एआई से बने वर्चुअल पार्टनर से शादी भी रचा ली थी. अब एक रिसर्च में सामने आया है कि एआई टूल्स के कई छिपे हुए साइकोलॉजिकल और सोशल रिस्क हैं. इन टूल्स पर ज्यादा निर्भरता से अकेले होने तक का खतरा है. इसलिए इन्हें संभलकर यूज करना जरूरी है.

असल रिश्तों पर असर डाल सकती है एआई से दोस्ती

IIM लखनऊ की एक स्टडी में सामने आया है कि एआई कंपेनियन से हद से ज्यादा इमोशनली अटैच होना असल दुनिया के रिश्तों और मानसिक सेहत पर असर डाल सकता है. रिसर्चर का कहना है कि एआई टूल्स आने के बाद लोगों के संवाद और इमोशनल सपोर्ट मांगने का तरीका बदल गया है. इन टूल्स को कंफर्ट, कंपैनियनशिप और इमोशनल इंगेजमेंट के टूल के तौर मार्केट किया जाता है, लेकिन यूजर के बिहेवियर और साइकोलॉजी पर इसका काफी असर पड़ सकता है. रिसर्चर ने बताया कि कई लोग इमोशनल कंफर्ट के लिए लोग अब इंसानों की जगह एआई सिस्टम यूज कर रहे हैं. इससे असल लाइफ में लोगों से बातचीत छूट जाती है. रिसर्चर ने बताया कि कई यूजर इमोशनल रेगुलेशन और मेंटल हेल्थ सपोर्ट के लिए एआई टूल्स पर डिपेंड होते जा रहे हैं. अगर ऐसा ज्यादा समय तक होता है तो यह खतरनाक हो सकता है.

एआई टूल्स को 10 मिनट यूज करना भी खतरनाक

कुछ महीने पहले Carnegie Mellon University, MIT, University of Oxford और UCLA की एक और रिसर्च में सामने आया था कि कुछ देर तक ही एआई चैटबॉट्स को यूज करना लोगों को मानसिक रूप से आलसी बना सकता है. रिसर्चर ने बताया कि एआई की थोड़ी-सी मदद भी इंसान के सोचने की क्षमता को कम कर देती है. इस कारण वो प्रॉब्लम को खुद से नहीं सुलझा पाते. अगर चीजें जरा भी मुश्किल हो जाए तो वो हाथ खड़े कर देते हैं. एक बार लोगों को एआई से जवाब मिलने की आदत लग जाए तो वो खुद से किसी मुश्किल का हल निकालने का संघर्ष करने के लिए तैयार नहीं है. एआई की मदद के बदले में दिमाग बड़ी कीमत चुका रहा है. जो लोग एआई का यूज कर रहे है, वो इस टेक्नोलॉजी को कभी यूज न कर पाने वाले लोगों की तुलना में जल्दी गिव अप कर रहे हैं.

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Satish Kumar एक डिजिटल कंटेंट क्रिएटर और न्यूज़ पब्लिशर हैं। ये Sarkari Yojana, Technology News और Automobile Updates पर लेख लिखते हैं। इनके लेखों का उद्देश्य लोगों को सही और तेज जानकारी देना है।