How AI Detects Pesticides in Fruits and Vegetables: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जो पहले से शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग और कारोबार जैसे क्षेत्रों में अहम भूमिका निभा रहा है, अब रसोई तक पहुंच चुका है. एक नई पोर्टेबल डिवाइस सिर्फ 90 सेकेंड में फल और सब्जियों की क्वालिटी जांच सकती है. किसी फल या सब्जी के छोटे से टुकड़े को स्कैन करते ही यह पेस्टिसाइड के अवशेष, मौजूद केमिकल के प्रकार और उनके संभावित स्वास्थ्य प्रभाव की जानकारी दे देती है. यह पूरी प्रक्रिया बिना किसी केमिकल के, सुरक्षित और बिना नुकसान पहुंचाए की जाती है.
आईआईटी कानपुर का कमाल
यह तकनीक आईआईटी में इनक्यूबेटेड स्टार्टअप ‘स्कैनएक्स’ ने विकसित की है. टीम ने पोर्टेबल एनआईआर-एमआईआर स्पेक्ट्रोस्कोपी को एआई और मशीन लर्निंग के साथ जोड़कर यह समाधान तैयार किया है. डिवाइस निकट इन्फ्रारेड रोशनी 750 से 2500 नैनोमीटर का इस्तेमाल कर फल-सब्जियों की अंदरूनी परत तक पहुंचती है और उनमें मौजूद तत्वों की पहचान करती है. इसके साथ ही मध्य इन्फ्रारेड तरंगें 2.5 से 10 माइक्रोमीटर हानिकारक गैसों और पेस्टिसाइड अवशेषों का पता लगाने में मदद करती हैं. इन दोनों तकनीकों का मेल तेज, सटीक और बिना नुकसान वाली रासायनिक जांच संभव बनाता है.
2026 में बाजार में आएगा
स्टार्टअप ने इस डिवाइस का पेटेंट भी दाखिल किया है और इसे 2026 के अंत तक बाजार में उतारने की योजना है. इसे किसानों और आम इस्तेमाल करने वाले दोनों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है. शुरुआती परीक्षणों में अच्छे नतीजे सामने आए हैं. एक बार जांच की लागत सिर्फ 10 से 15 पैसे रहने की उम्मीद है, जिससे यह आम लोगों की पहुंच में रहेगी. एक डिवाइस कम से कम पांच साल तक काम कर सकती है और जरूरत पड़ने पर सर्विस के बाद दोबारा इस्तेमाल की जा सकेगी. इसमें बदली जा सकने वाली बैटरी दी गई है.
क्या कहते हैं एक्सपर्ट?
स्कैनएक्स के संस्थापक रजतवर्धन के मुताबिक, फलों और सब्जियों में कीटनाशकों की मौजूदगी आज बड़ी चिंता का विषय है. लोग रोज इन्हें सेहत के लिए खाते हैं, लेकिन यह नहीं जान पाते कि वे कितने सुरक्षित हैं. खेती में कीटनाशकों के अधिक इस्तेमाल से कैंसर और नर्वस सिस्टम से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है. पारंपरिक लैब जांच महंगी और समय लेने वाली होती है, इसलिए नियमित जांच आम लोगों के लिए संभव नहीं. यह डिवाइस जैविक खेती करने वाले किसानों के लिए खासतौर पर फायदेमंद साबित हो सकती है. वे अब अपने उत्पाद की क्वालिटी आसानी से साबित कर सकेंगे और बेहतर दाम पा सकेंगेय घर बैठे तेज और सटीक जांच के जरिए यह तकनीक उपभोक्ताओं को सुरक्षित भोजन देने और खाद्य सुरक्षा मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है.
Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

