निर्माता-निर्देशक तिग्मांशु धुलिया बोले-फूहड़ता न हो, समाज की गहराई को दर्शाने वाली फिल्मों की जरूरत
बिना पूरी ट्रेनिंग के सिनेमा में आने से कलाकारों को बचना चाहिए
संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। अर्थपूर्ण और यथार्थवादी फिल्मों के लिए मशहूर बॉलीवुड के निर्माता-निर्देशक तिग्मांशु धुलिया ने कहा कि भोजपुरी फिल्मों में फूहड़ता के साथ मनोरंजन नहीं होना चाहिए। समाज की गहराई को दर्शाने वाली फिल्में भी बननी चाहिए। ठीक उसी तरह जैसे हिंदी सिनेमा में पान सिंह तोमर जैसी गंभीर और संवेदनशील फिल्में बनीं।
गोरखपुर सिनेमा महोत्सव में आए तिग्मांशु धुलिया ने विशेष बातचीत में भोजपुरी, रंगमंच और बॉलीवुड को लेकर खुलकर विचार रखे। भोजपुरी फिल्में बनाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि फिलहाल उन्होंने इस बारे में नहीं सोचा है। उन्होंने माना कि भोजपुरी के कुछ फिल्म निर्माता इस समय समाज के गंभीर मुद्दों पर काम कर रहे हैं, जो एक अच्छा संकेत है।
फिल्म पान सिंह तोमर के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार, ””साहेब, बीवी और गैंगस्टर”” जैसी कल्ट क्लासिक फिल्म देने वाले तिग्मांशु ने कहा कि आज का दर्शक दो वर्गों में बंट चुका है। एक वर्ग गंभीर सिनेमा चाहता है, जबकि दूसरा मनोरंजन की तलाश में रहता है। ऐसे में फिल्मकारों के सामने संतुलन बनाना बड़ी चुनौती है।
रंगमंच से जुड़े एक सवाल पर उन्होंने कहा कि मंच पर अभिनय की परंपरा मजबूत हो रही है। नए कलाकारों को सीखने के अवसर मिल रहे हैं। उन्होंने कहा कि बिना पूरी ट्रेनिंग के सिनेमा में आने से बचना चाहिए। अभिनय केवल शौक नहीं बल्कि एक अनुशासित कला है। इसके लिए तकनीकी और व्यावहारिक प्रशिक्षण जरूरी है। बॉलीवुड फिल्मों के निर्देशन की चुनौतियों पर उन्होंने कहा कि निर्देशन बहुत कठिन काम है।

