Bloating Vs Acidity: एसिडिटी या ब्लोटिंग? फर्क समझना जरूरी है, वरना भारी पड़ सकती है आपकी यह अनदेखी

aditisingh
4 Min Read


Difference Between Acidity And Bloating: अक्सर पेट फूलने को लोग भारी खाना या सिर्फ एसिडिटी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं. एक गोली ली और बात खत्म. लेकिन अगर लगभग हर दिन पेट में कसाव महसूस हो, शाम तक कपड़े तंग लगने लगें या कुछ ही कौर खाने के बाद पेट भरा-भरा लगे, तो मामला साधारण नहीं भी हो सकता. आंतें अक्सर धीमे संकेत देती हैं और बार-बार होने वाला ब्लोटिंग उन्हीं में से एक है. चलिए आपको बताते हैं कि इसके लक्षण क्या होते हैं.

क्या होते हैं लक्षण?

एसिडिटी में सीने में जलन, खट्टे डकार या ऊपरी पेट में जलन होती है. जबकि ब्लोटिंग में पेट में दबाव, भारीपन या सूजन जैसा एहसास होता है. दोनों साथ-साथ दिख सकते हैं, इसलिए भ्रम होता है. गैस बनना, आंतों की धीमी गति, फूड इंटॉलरेंस, हार्मोनल बदलाव या थायरॉयड की गड़बड़ी भी बिना ज्यादा एसिड के पेट फुला सकती है. डॉ. सुरनजीत चटर्जी, इंटरनेल मेडिसिन अपोलो हॉस्पिटल  के अनुसार, बार-बार ब्लोटिंग को हल्के में नहीं लेना चाहिए, यह इरिटेबल बाउल सिंड्रोम , मेटाबॉलिक गड़बड़ी या हार्मोनल असंतुलन का संकेत हो सकता है.

कब आपको इसको इग्नोर नहीं करना चाहिए?

कभी-कभार त्योहारों में ज्यादा खाना, देर रात डिनर या कोल्ड ड्रिंक के बाद पेट फूलना सामान्य है. चिंता तब होती है जब यह रोज का पैटर्न बन जाए या हफ्तों तक बना रहे. शहरी लाइफस्टाइल, तनाव और कम फिजिकल एक्टिविटी के कारण फंक्शनल गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल समस्याएं बढ़ रही हैं. ये स्कैन में साफ न दिखें, फिर भी लाइफ क्वालिटी पर असर डालती हैं. कुछ लक्षण खास तौर पर ध्यान मांगते हैं, जैसे कि हर दिन ब्लोटिंग, खाने के बाद बढ़ना, पेट दर्द, कब्ज या दस्त, जल्दी पेट भरना, थकान, वजन कम होना या बुखार. तीन महीने से ज्यादा बने रहने वाले डाइजेशन लक्षणों का खुद इलाज करने के बजाय जांच करानी चाहिए. हार्मोन और थायरॉयड की भूमिका भी अहम है। थायरॉयड कम होने पर आंतों की गति धीमी पड़ जाती है. पीरियड्स या पेरिमेनोपॉज के दौरान हार्मोनल बदलाव से पानी रुकना और गैस बढ़ना सामान्य है. तनाव भी आंतों के बैक्टीरिया और मूवमेंट को प्रभावित करता है. 

कब आपको जांच करवानी चाहिए?

एंटासिड तुरंत राहत देते हैं, लेकिन बार-बार लेना मूल समस्या को छिपा सकता है. अगर ब्लोटिंग दो-तीन हफ्तों से ज्यादा रहे या भूख, नींद और रोजमर्रा के काम प्रभावित हों, तो डॉक्टर से सलाह लें. जांच आमतौर पर  ब्लड टेस्ट जिसमें थायरॉयड, एनीमिया, स्टूल टेस्ट और जरूरत पड़ने पर इमेजिंग या एंडोस्कोपी से शुरू होती है. संतुलित आहार, फाइबर, पर्याप्त पानी, रेगुलर व्यायाम और तनाव प्रबंधन हल्के मामलों में मददगार हैं.लेकिन जब शरीर बार-बार संकेत दे, तो उसे इग्नोर न करना सबसे बड़ी समझदारी है.

ये भी पढ़ें-इमरजेंसी में ChatGPT कितना सुरक्षित? रिसर्च ने जताई चिंता, जानें AI की सीमाएं

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

Check out below Health Tools-
Calculate Your Body Mass Index ( BMI )

Calculate The Age Through Age Calculator



Source link

Share This Article
Follow:
Satish Kumar Is A Journalist With Over 10 Years Of Experience In Digital Media. He Is Currently Working As Editor At Aman Shanti, Where He Covers A Wide Variety Of Technology News From Smartphone Launches To Telecom Updates. His Expertise Also Includes In-depth Gadget Reviews, Where He Blends Analysis With Hands-on Insights.