Budget 2026: सोने-चांदी की कीमतों में लगातार वृद्धि हो रही है. रिपोर्ट्स के अनुसार, पिछले 13 महीनों में चांदी की कीमत में 306 प्रतिशत और सोने की कीमत में 111 प्रतिशत बढ़ोतरी हुई है. फिलहाल स्थिति कुछ ऐसी है कि, गरीब या मध्यम वर्ग के लिए सोने-चांदी की खरीदारी जेब से बाहर हो गई है.
संसद तक पहुंचा सोने-चांदी का मुद्दा
सोने-चांदी का भारतीय संस्कृति में क्या महत्व है, इसका अंदाजा आप इसी से लगा सकते हैं कि, राज्यसभा में बजट सत्र के दौरान सोने-चांदी की बढ़ती कीमतों का मुद्दा उठाया गया.
कांग्रेस सांसद नीरज डांगी ने कहा कि सोने-चांदी की बेकाबू हो चुकी कीमतों ने ग्रामीण भारत, खासकर महिलाओं और विवाह योग्य परिवारों की कमर तोड़ी दी है. सोना-चांदी नारी की सुरक्षा, आत्मसम्मान और पारिवारिक भविष्य से जुड़ा है. आज स्थिति ऐसी है , किसान, श्रमिक और मध्यम वर्ग के लोग अपनी बेटियों के विवाह के लिए न्यूनतम आभूषण भी नहीं खरीद पा रहे हैं.
शादी-विवाह में क्यों जरूरी है गहने
सोने या चांदी के आभूषणों को भले ही लग्जरी लाइफस्टाइल या स्टाइल आदि के रूप में देखा जाता हो, लेकिन हिंदू धर्म में सोने-चांदी के आभूषणों का विशेष महत्व होता है. सोने-चांदी जैसे धातु को मां लक्ष्मी और सुख-समृद्धि का प्रतीक माना जाता है. इसलिए सदियों से ही ऐसी परंपरा रही है कि, शादी-विवाह के दौरान बेटी और बहुओं को आशीर्वाद स्वरूप गहने दिए जाते हैं. मंगलसूत्र, नथ, कंगन, पायल, बिछुआ जैसे आभूषणों को परंपरा, समृद्धि, और सौभाग्य के प्रतीक माना जाता है.
- भारतीय संस्कृति में शादी-विवाह के मौके पर गहनों की भूमिका बेहद खास होती है.
- गहनों को परंपरा और संस्कार के रूप में शुभता, समृद्धि और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है.
- साथ ही गहनों को आर्थिक सुरक्षा, खासतौर पर महिलाओं के लिए गहनों को भविष्य की सुरक्षा के रूप देखा जाता है.
- विवाह में गहनों को परिवार की स्थिति और सम्मान से भी जोड़ा जाता है. शादी-विवाह में बेटी-बहू को गहने देना सामाजिक प्रतिष्ठा का प्रतीक है.
- सोना-चांदी सदियों से सुरक्षित निवेश का विकल्प रहे हैं. इसलिए कहा जाता है कि, सोना-चांदी कभी मिट्टी नहीं होते, यानी ये कितने भी पुराने क्यों न हो जाएं, इनका मुनाफा हमेशा मिलता है.

