Budget Session 2026: देशभर में पांच साल में कितने सरकारी स्कूल हुए बंद? होश उड़ा देंगे ये आंकड़े

सतीश कुमार
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लोकसभा में Budget Session के दौरान हाल ही में सरकारी स्कूलों के बंद होने को लेकर बड़ा सवाल उठा. बिहार से कांग्रेस सांसद डॉ. मोहम्मद जावेद और राजस्थान से सांसद भजन लाल जाटव ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से पूछा, ‘क्या सरकार को पता है कि पिछले पांच साल में देश भर में कितने सरकारी स्कूल बंद या खत्म कर दिए गए हैं? राज्यवार और केंद्र शासित प्रदेशों के हिसाब से कितने स्कूल बंद हुए? इन स्कूलों को बंद करने के क्या कारण थे? यह भी बताया जाए कि इन बंद स्कूलों की वजह से कितने बच्चे पढ़ाई छोड़ चुके हैं?

सांसदों ने कही यह बात

दोनों सांसदों का कहना था कि सरकारी स्कूल बंद होने से गरीब और ग्रामीण इलाकों के बच्चों की पढ़ाई पर बहुत बुरा असर पड़ रहा है. वे चाहते थे कि सरकार इस पर पूरी जानकारी दे और बताए कि इस दिशा में क्या कदम उठाए जा रहे हैं.

शिक्षा मंत्री ने कही यह बात

शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने सदन में जवाब देते हुए कहा कि शिक्षा भारत के संविधान में समवर्ती सूची (कॉनकरेंट लिस्ट) में आती है. इसका मतलब है कि स्कूल खोलना, बंद करना या उन्हें एक जगह से दूसरी जगह मिलाना (युक्तिकरण या रेशनलाइजेशन) मुख्य रूप से राज्य सरकारों और केंद्रशासित प्रदेशों के प्रशासन के हाथ में है. केंद्र सरकार इसमें सीधे फैसला नहीं लेती है. उन्होंने बताया कि निःशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 (आरटीई एक्ट) के तहत हर बच्चे को उसके घर के पास या पड़ोस में प्राथमिक शिक्षा (क्लास 1 से 5 तक) उपलब्ध कराना जरूरी है. आरटीई की धारा 6 के अनुसार, सभी राज्यों ने अपने यहां पड़ोस के स्कूल की दूरी और मानक तय कर लिए हैं. धारा 8 कहती है कि राज्य सरकार का फर्ज है कि हर बच्चे को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा मिले और उसके पास स्कूल हो.

धर्मेंद्र प्रधान ने दिए ये आंकड़े

शिक्षा मंत्री ने कहा कि सरकार स्कूलों की उपलब्धता को लेकर चिंतित है और इस दिशा में काफी काम हुआ है. उन्होंने यूडीआईएसई+ (यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इन्फॉर्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन प्लस) के आंकड़ों का हवाला दिया. बता दें कि यूडीआईएसई+ स्कूल शिक्षा के आंकड़े इकट्ठा करने की एक विश्वसनीय व्यवस्था है. इसके अनुसार, देश में स्कूलों तक पहुंच में काफी सुधार हुआ है. इसे ग्रॉस एक्सेस रेशियो (जीएआर) से मापा जाता है. जीएआर का मतलब है कि किसी इलाके में तय मानकों के अंदर स्कूल उपलब्ध होने वाले गांवों या बस्तियों का प्रतिशत.

ऐसे हैं स्कूलों के आंकड़े

  • प्राथमिक स्तर (क्लास 1-5): 2018-19 में 97.15% था, जो 2024-25 में बढ़कर 97.83% हो गया.
  • उच्च प्राथमिक स्तर (क्लास 6-8): 2018-19 में 96.49%, 2024-25 में 96.57% हो गया.
  • माध्यमिक स्तर (क्लास 9-10): 2018-19 में 88.24% था, जो 2024-25 में 95.35% हो गया है.
  • उच्च माध्यमिक स्तर (क्लास 11-12): 2018-19 में 65.05% था. यह 2024-25 में 94.97% हो गया.

ये आंकड़े दिखाते हैं कि विभिन्न स्तरों पर स्कूलों तक पहुंच लगातार बेहतर हो रही है. साथ ही, ड्रॉपआउट दर (स्कूल छोड़ने की दर) में भी कमी आई है.

बच्चों के लिए ऐसे होते हैं फैसले

धर्मेंद्र प्रधान ने जोर दिया कि आरटीई एक्ट के नियमों का पालन करते हुए ही कोई भी स्कूल बंद या मिलाया जा सकता है. अगर कोई स्कूल बंद होता है तो यह सुनिश्चित किया जाता है कि बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो और उन्हें पास के दूसरे स्कूल में भेजा जाए. केंद्र सरकार समग्र शिक्षा योजना के तहत राज्यों को मदद देती है, ताकि स्कूल बेहतर हों, शिक्षक उपलब्ध हों और बच्चे स्कूल छोड़ें नहीं.

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Satish Kumar Is A Journalist With Over 10 Years Of Experience In Digital Media. He Is Currently Working As Editor At Aman Shanti, Where He Covers A Wide Variety Of Technology News From Smartphone Launches To Telecom Updates. His Expertise Also Includes In-depth Gadget Reviews, Where He Blends Analysis With Hands-on Insights.
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