Cancer In Men: पुरुषों का ‘साइलेंट किलर’ है बिना आहट आने वाला यह कैंसर, 50 की उम्र के बाद सबसे ज्यादा खतरा

सतीश कुमार
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Early Signs Of Prostate Cancer: प्रोस्टेट कैंसर पुरुषों में होने वाला एक ऐसा कैंसर है, जो प्रोस्टेट ग्रंथि में शुरू होता है. प्रोस्टेट एक छोटी-सी ग्रंथि होती है, जो स्पर्म बनाने में मदद करती है. इस बीमारी की सबसे बड़ी समस्या यह है कि शुरुआती दौर में इसके लक्षण अक्सर नजर नहीं आते. कई पुरुषों को शुरुआत में कोई खास परेशानी महसूस नहीं होती, क्योंकि शुरुआती प्रोस्टेट कैंसर चुपचाप बढ़ता रहता है. कई बार यह बीमारी सालों तक धीरे-धीरे बढ़ती रहती है और तब जाकर सामने आती है, जब यह काफी आगे बढ़ चुकी होती है. यही वजह है कि यह कैंसर लोगों को बिना चेतावनी दिए पकड़ लेता है.

भारत में गंभीर समस्या

भारत में प्रोस्टेट कैंसर पुरुषों में होने वाले कैंसरों में तीसरे स्थान पर है. इससे पहले लंग्स और मुंह का कैंसर आता है. दुनियाभर में हर साल करीब 15 लाख नए मामले सामने आते हैं और बढ़ती उम्र के साथ इसके मामलों में लगातार इजाफा होने की आशंका है. इंडियन जर्नल ऑफ यूरोलॉजी में 2024 में आई एक स्टडी के मुताबिक, प्रोस्टेट कैंसर के मामले 50 साल की उम्र के बाद तेजी से बढ़ने लगते हैं और 64 साल के बाद इनमें और तेजी देखी जाती है. चिंता की बात यह है कि करीब 43 प्रतिशत मामलों में कैंसर का पता तब चलता है, जब वह शरीर के दूसरे हिस्सों तक फैल चुका होता है.

भारत में अवेयरनेस की कमी

इतनी आम बीमारी होने के बावजूद भारत में प्रोस्टेट कैंसर को लेकर जागरूकता काफी कम है. इसकी एक बड़ी वजह यह है कि शुरुआती लक्षण बहुत सामान्य लगते हैं. रात में बार-बार यूरिन आना या यूरिन की धार कमजोर होना जैसी समस्याओं को ज्यादातर पुरुष बढ़ती उम्र का असर मानकर नजरअंदाज कर देते हैं या इसे प्रोस्टेट बढ़ने की आम समस्या समझ लेते हैं. लक्षण इतने हल्के होते हैं कि लोग यह सोचते ही नहीं कि डॉक्टर को दिखाने की जरूरत है.

शुरुआत में नहीं दिखते हैं लक्षण

मायो क्लिनिक के मुताबिक, प्रोस्टेट कैंसर के शुरुआती चरण में अक्सर कोई लक्षण नहीं होते. हालांकि, कुछ संकेत ऐसे हो सकते हैं जिन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. इनमें यूरिन में खून आना, जिससे यूरिन का रंग गुलाबी या लाल दिख सकता है, स्पर्म में खून आना, बार-बार यूरिन लगना, यूरिन शुरू करने में दिक्कत और रात में बार-बार यूरिन के लिए उठना शामिल है. अगर कैंसर आगे बढ़ जाए, तो यूरिन का रिसाव, पीठ या हड्डियों में दर्द, इरेक्शन में दिक्कत, अत्यधिक थकान, बिना वजह वजन कम होना और हाथ-पैरों में कमजोरी जैसे लक्षण सामने आ सकते हैं.

कैसे होते हैं इसके लक्षण?

सर्जिकल ऑन्कोलॉजी विशेषज्ञ डॉ. अरुण कुमार गोयल ने TOI को बताया कि उम्र बढ़ने के साथ कई पुरुषों में बेनाइन प्रोस्टेटिक हाइपरप्लासिया की समस्या हो जाती है. इसके लक्षणों में यूरिन की धार कमजोर होना, ब्लैडर पूरी तरह खाली न होना और रात में दो बार से ज्यादा यूरिन के लिए उठना शामिल है. बीपीएच के लक्षण आमतौर पर धीरे-धीरे बढ़ते हैं, जबकि प्रोस्टेट कैंसर में लक्षण तेजी से बढ़ सकते हैं और इसके साथ यूरिन या स्पर्म में खून, लगातार हड्डियों या पीठ में दर्द और अचानक वजन कम होना जैसे संकेत दिखाई दे सकते हैं.

डॉक्टरों के मुताबिक, आमतौर पर 50 साल की उम्र के बाद प्रोस्टेट कैंसर की नियमित जांच शुरू की जाती है. जिन पुरुषों के परिवार में पहले किसी को प्रोस्टेट कैंसर रहा हो, उन्हें 40 से 45 साल की उम्र से ही पीएसए टेस्ट और डिजिटल रेक्टल एग्जामिनेशन कराना चाहिए. समय पर जांच और लक्षणों को गंभीरता से लेने से प्रोस्टेट कैंसर को शुरुआती स्टेज में पकड़ा जा सकता है, जहां इलाज के सफल होने की संभावना काफी ज्यादा होती है.

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Satish Kumar Is A Journalist With Over 10 Years Of Experience In Digital Media. He Is Currently Working As Editor At Aman Shanti, Where He Covers A Wide Variety Of Technology News From Smartphone Launches To Telecom Updates. His Expertise Also Includes In-depth Gadget Reviews, Where He Blends Analysis With Hands-on Insights.
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