Crude Oil Crisis: मिडिल ईस्ट में तनाव से तेल पर संकट, क्राइसिस से बचने के लिए भारत चल सकता है ’तुरूप का पत्ता’

aditisingh
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Middle East Tensions: अमेरिका के हाई टैरिफ और राष्ट्रपति Donald Trump के दबाव के बाद भले ही भारत ने रूस से कच्चे तेल के आयात में कुछ कमी की थी, लेकिन मौजूदा पश्चिम एशिया तनाव और सप्लाई अनिश्चितता के बीच नई दिल्ली अब वैकल्पिक रणनीति पर विचार कर सकती है. फरवरी में भारत का सबसे बड़ा कच्चा तेल आपूर्तिकर्ता रूस रहा, जबकि दूसरे स्थान पर Saudi Arabia रहा. पश्चिम एशियाई देशों से भारत का आयात बढ़कर लगभग 1 मिलियन बैरल प्रतिदिन तक पहुंच गया, जो जनवरी में लगभग 7.7 लाख बैरल प्रतिदिन था.

रूस से आयात में उतार-चढ़ाव

ग्लोबल डेटा और एनालिटिक्स फर्म Kpler के अनुसार फरवरी में रूस से भारत ने लगभग 1 मिलियन बैरल प्रतिदिन कच्चा तेल आयात किया. जनवरी में यह आंकड़ा करीब 1.1 मिलियन बैरल प्रतिदिन था. पिछले साल दिसंबर में यह लगभग 1.2 मिलियन बैरल प्रतिदिन रहा. हालांकि आयात में मामूली कमी आई है, लेकिन रूस अब भी भारत के लिए प्रमुख आपूर्तिकर्ता बना हुआ है.

केप्लर के मुताबिक, आने वाले वर्षों में सऊदी अरब से 6 से 7 लाख बैरल प्रतिदिन आयात जारी रह सकता है. यह पिछले छह वर्षों में किसी एक देश से होने वाला सबसे स्थिर और बड़ा आयात स्तर हो सकता है. केप्लर में रिफाइनिंग और मॉडलिंग के रिसर्च एनालिस्ट सुमित रितोलिया के अनुसार, पिछले दो-तीन महीनों में भारत की पश्चिम एशिया पर तेल निर्भरता बढ़ी है, क्योंकि रूस से आयात में कमी के बाद खाड़ी देशों से सप्लाई बढ़ाई गई है.

क्या कहते हैं एक्सपर्ट?

वर्तमान में Strait of Hormuz के जरिए इराक, सऊदी अरब, यूएई और कुवैत से रोजाना 2.5 से 2.7 मिलियन बैरल तेल भारत पहुंच रहा है. हालांकि यदि क्षेत्रीय तनाव और बढ़ता है, तो इस समुद्री मार्ग से कार्गो मूवमेंट प्रभावित हो सकता है. ईरान से जुड़े तनाव के कारण पश्चिम एशिया में शिपमेंट अनिश्चितता बढ़ी है. ऐसे में भारतीय रिफाइनर अब वैकल्पिक स्रोतों जैसे अफ्रीका, अमेरिका या लैटिन अमेरिका की ओर भी नजर डाल सकते हैं, ताकि सप्लाई चेन जोखिम को कम किया जा सके.

भारत फिलहाल संतुलित तेल आयात रणनीति अपना रहा है. रूस से प्रतिस्पर्धी कीमतों पर सप्लाई खाड़ी देशों से स्थिर आपूर्ति और संभावित वैकल्पिक स्रोतों की तलाश आने वाले महीनों में तेल बाजार की दिशा काफी हद तक पश्चिम एशिया की भू-राजनीतिक स्थिति और वैश्विक कीमतों पर निर्भर करेगी.

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Satish Kumar Is A Journalist With Over 10 Years Of Experience In Digital Media. He Is Currently Working As Editor At Aman Shanti, Where He Covers A Wide Variety Of Technology News From Smartphone Launches To Telecom Updates. His Expertise Also Includes In-depth Gadget Reviews, Where He Blends Analysis With Hands-on Insights.