Dollar vs Rupee: भारतीय रुपये में हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन एक बार फिर तेजी देखने को मिली. शुक्रवार को रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले दो पैसे मजबूत होकर 91.62 के स्तर पर पहुंच गया. पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के बीच भारतीय रिफाइनरियों को रूसी तेल खरीदने के लिए अमेरिका द्वारा 30 दिनों की छूट दिए जाने से रुपये को सहारा मिला. विदेशी मुद्रा कारोबारियों का कहना है कि अमेरिकी मुद्रा में गिरावट के बावजूद घरेलू शेयर बाजारों के नकारात्मक रुख और विदेशी कोषों की निकासी ने रुपये की बढ़त को सीमित कर दिया.
अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के मद्देनजर अमेरिकी प्रशासन ने भारतीय रिफाइनरियों को रूसी तेल खरीदने की अनुमति देने के लिए 30 दिनों की अस्थायी छूट दी है. विदेशी मुद्रा विश्लेषकों के अनुसार अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच जारी युद्ध से पैदा हुई अनिश्चितताओं और अत्यधिक उतार-चढ़ाव से स्थानीय मुद्रा को बचाने के लिए रिजर्व बैंक ने भी हस्तक्षेप किया. हालांकि, डॉलर की मजबूती, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और विदेशी संस्थागत निवेशकों की भारी निकासी ने रुपये पर दबाव बनाए रखा है.
रुपये में क्यों मजबूती?
अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया अपने पिछले बंद भाव 91.64 के मुकाबले मजबूत होकर खुला और डॉलर के मुकाबले दो पैसे की बढ़त के साथ 91.62 के स्तर पर कारोबार करता दिखा. पिछले दो सत्रों में 97 पैसे की गिरावट के बाद गुरुवार को भारतीय रुपया 41 पैसे संभलकर 91.64 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था. इस बीच, छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की स्थिति को दर्शाने वाला डॉलर सूचकांक 0.37 प्रतिशत गिरकर 98.94 पर आ गया. वहीं वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड वायदा कारोबार में 1.05 प्रतिशत गिरकर 84.51 डॉलर प्रति बैरल पर रहा.
क्या कहते हैं एक्सपर्ट?
डीबीएस बैंक इंडिया के कार्यकारी निदेशक और ट्रेडिंग प्रमुख समीर करयाट के मुताबिक पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव का भारतीय रुपये पर काफी असर पड़ा है. कच्चे तेल की आपूर्ति और बढ़ती कीमतों को लेकर चिंताओं ने रुपये की विनिमय दर पर दबाव बनाया है.
उन्होंने कहा कि मौजूदा अनिश्चित माहौल में निवेशकों का रुझान सुरक्षित परिसंपत्तियों की ओर बढ़ गया है, जिससे रुपये पर दबाव और बढ़ा है. इसी वजह से इस सप्ताह रुपये की विनिमय दर में करीब 1.4 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है.
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